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साइरस मिस्त्री की चिट्ठी, नहीं मिली काम करने की आजादी

मिस्त्री ने कहा है कि टाटा मोटर्स को सफल बनाने के लिए नैनो को बंद करना जरूरी है...

Updated On: Nov 17, 2016 10:14 AM IST

FP Staff

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साइरस मिस्त्री की चिट्ठी, नहीं मिली काम करने की आजादी

टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि टाटा मोटर्स घाटे में चल रही अपनी छोटी कार नैनो को केवल भावनात्मक कारणों से बंद नहीं कर सकी.

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्त्री ने एक ईमेल में कहा है कि टाटा मोटर्स को दोबारा सफल बनाने के लिए नैनो को बंद करना जरूरी है. नैनो प्रोजेक्ट रतन टाटा के दिल के करीब माना जाता है.

मिस्त्री के ईमेल के मुताबिक, टाटा समूह की नेटवर्थ 1,74,000 करोड़ रुपए के करीब है. हालांकि उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की फेयर वैल्यू का वास्तविक आकलन किया जाए तो ग्रुप को लगभग 1,18,000 करोड़ रुपए राइट-ऑफ करने पड़ सकते हैं.

ईटी की खबर में कहा गया है कि मिस्त्री टाटा संस चेयरमैन के तौर पर बंधे हुए महसूस कर रहे थे.

वह टाटा ग्रुप को और फिसलने से रोकने और पिछली गलतियों को ठीक करने के लिए अशक्त थे.

साइरस मिस्त्री का पलटवार

मिस्त्री ने यह भी कहा है कि उन्हें 22 करोड़ के फर्जीवाड़े को भी नजरअंदाज करने को कहा गया. मिस्त्री ने टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स को भेजे ईमेल में ये बातें कहीं हैं.

लाइवमिंट ने ईमेल के हवाले से लिखा है, मिस्त्री ने लिखा है कि जब उन्हें चेयरमैन बनाया गया था, तब उन्हें फैसले लेने के पूरे अधिकार दिए जाने का वादा किया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नियमों में बदलाव कर टाटा ट्रस्ट्स को अधिक अधिकार दिए गए.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, मिस्त्री ने रतन टाटा के खिलाफ हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया है. नैनो का उत्पादन बंद करने से रतन टाटा के हिस्सेदारी वाली एक कंपनी को भी नुकसान होता जिसे नैनो ग्लाइडर्स सप्लाई किए जाते थे.

मिस्त्री ने यह भी लिखा है कि एविएशन सेक्टर में टाटा की एंट्री के पीछे रतन टाटा थे और उनके दबाव में ही टाटा ग्रुप ने एयर एशिया और सिंगापुर एयरलाइंस से हाथ मिलाया.

इस सौदे में टाटा को शुरुआती वादे से अधिक पैसे लगाने पड़े. रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्त्री ने टाटा ग्रुप के विदेशी सौदों और टेलिकॉम सेक्टर में कारोबार की भी आलोचना की है.

इस बीच, रतन टाटा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी का एनडीटीवी से बातचीत में मिस्त्री के इस बयान का जवाब दिया है कि उन्हें गलत तरीके से हटाया गया. सिंघवी ने कहा, 'क्या साइरस यह मानते हैं कि पूरा बोर्ड नासमझ है? बोर्ड के सभी सदस्यों का मिस्त्री ने विश्वास खो दिया था.'

बोर्ड के नौ सदस्यों में से छह ने साइरस मिस्त्री को हटाने के पक्ष में वोट दिया था, वहीं दो सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया.

फैसले लेने की आजादी न मिलने के मिस्त्री के आरोप पर टाटा के वकील ने एनडीटीवी को बताया कि समूह के वरिष्ठ सदस्य 'कठपुतली का खेल दिखाने वाले नहीं हैं'. मिस्त्री को बोर्ड की मीटिंग में शामिल होने का अधिकार था.

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