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साइरस मिस्त्री सही हैं: रतन टाटा को नैनो डंप कर देना चाहिए

मिस्त्री के खुलासे का सबक साफ है, शौक से जुड़े बिजनेस निर्णयों को निर्देश नहीं दे सकते

Updated On: Nov 18, 2016 07:09 AM IST

R JAGANNATHAN

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साइरस मिस्त्री सही हैं: रतन टाटा को नैनो डंप कर देना चाहिए

रतन टाटा और टाटा परिवार के लिए अपनी विश्वसनीयता पर कोई दाग लगाए बगैर मिस्त्री विवाद से उबरना मुश्किल हो सकता है.

टाटा संस बोर्ड को अपने पांच पन्ने के पत्र में मिस्त्री ने विदेश में अधिग्रहण से जुड़े कमजोर निर्णय लेने और कुछ मामलों में फ्रॉड करने समेत कई आरोप लगाए हैं.

लेकिन मिस्त्री ने जिन बातों का खुलासा किया है वे रतन टाटा को निजी तौर पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी. मिस्त्री के आरोप नैनो कार प्रोजेक्ट, एयर एशिया और एयर विस्तारा में ग्रुप के निवेश के साथ टाटा व सिंगापुर एयरलाइंस के बीच समझौते को लेकर हैं.

नैनो प्रोजेक्ट के तहत रतन टाटा का 'एक लाख रुपये की कार' देने का सपना था. दुपहिया वाहन चलाने से जुड़े खतरों का यह सस्ता विकल्प पेश किया गया था. यह भी साफ है कि विमानन भी रतन टाटा का निजी शौक रहा है.

यह सही है कि प्रमोटर अपने शौक को पूरा करने के लिए काम करे और करोड़ों डॉलर से खड़े किए बिजनेस को अपने शौक में लगाए. लेकिन टाटा के मामले में पैसा रतन टाटा के निजी कोष से नहीं आया है.

नैनों की नाकामी से उपजे सवाल

वह ग्रुप का पैसा है. इससे यह सवाल पैदा होता है कि रतन टाटा कंपनी के बोर्ड को बिजनेस लॉजिक के उलट अपने निजी शौक के लिए आतंकित कर रहे हैं.

मिस्त्री का कहना था, 'नैनो विकसित करने के पीछे सोच थी एक लाख रुपये से कम में कार. लेकिन उसकी लागत हमेशा इससे ज्यादा रही.

यह उत्पाद लगातार घाटे में रहा और घाटा बढ़कर 1000 करोड़ तक पहुंच गया. जब नैनो से होने वाले फायदे की कोई संभावना नहीं दिख रही. जरूरत है कि इसे बंद कर दिया जाए. केवल भावुक वजहों ने हमें ऐसा नहीं करने दिया.

MUMBAI, INDIA - MARCH 23: (R-L) Ravi Kant Managing Director of Tata Motors and Ratan Naval Tata Chairman of Tata Group attend the launch of the Tata Nano on March 23, 2009 in Mumbai, India. Tata Motors today launched the world's cheapest car which will initially go on sale in India and cost roughly 2000 USD. (Photo by Ritam Banerjee/Getty Images)

नैनो बंद करने की दूसरी चुनौती यह है कि इससे एक संस्था के लिए नैनो—ग्लाइडर की आपूर्ति बंद हो जाएगी. यह कंपनी कार बनाती है और इसमें टाटा ने शेयर ले रखे हैं.'

इसमें थोड़ा भ्रम है कि नैनो एक असफलता है. इसके बजाय यह 'सस्ती इंजीनियरिंग' का एक विचार है जो वैश्विक हित में है.

नैनो के विचार से ही प्रेरित होकर रेनॉ क्विड और हुंडई इओन सफल हो चुकी हैं. टाटा का नैनो प्रोजेक्ट कई कारणों से असफल हुआ:

सस्ते का गड़बड़ अर्थशास्त्र 

भारतीय सस्ते प्रॉडक्ट तो खरीदना चाहते हैं लेकिन उसे 'सस्ता' नहीं कहना चाहते. नैनो पर लखटकिया कार का लेबल चस्पा हो गया था और इसने किसी की आंकाक्षाओं या जरूरतों को पूरा नहीं किया.

कम ही लोग ऐसी कार चाहते थे जिन्होंने अपनी जरूरतों के मद्देनजर समझौता किया. इसीलिए यह कार साफ तौर पर अपने दावे को पूरा नहीं कर सकी. जबकि नैनो प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने के कई प्रयास किए गए.

इस प्रोजेक्ट के तहत नैनो ट्विस्ट लॉन्च हुई. बाद में और भी मॉडल उतारे गए जिसमें आॅटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली जेनएक्स शामिल है.

खराब उत्पाद अपने साथ हमेशा असफलता का टैग लगाए रखते हैं. सबसे समझदार निर्णय यही हो सकता है कि इन्हें बंद कर दिया जाए और उनसे होने वाले नुकसान को सहन कर लिया जाए.

लेकिन जैसा कि मिस्त्री आरोप लगाते हैं, इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देकर जारी रखा जा रहा है क्योंकि यह रतन टाटा से भावनात्मक रूप से जुड़ा है. इस कारण इसे कोई खत्म करना नहीं चाहता.

क्या ग्रुप में किसी के पास यह साहस नहीं है जो बॉस को यह बता सके? मिस्त्री का आरोप है कि नैनो संभवत: जारी रहेगा क्योंकि टाटा की दिलचस्पी किसी और कंपनी में है जो नैनो ग्लाइडर्स का इस्तेमाल करती है.

हो सकता है कि आखिरी बिंदु प्रासंगिक न हो, लेकिन नैनो का जारी रहना दिखाता है कि यदि टाटा एक असफल उत्पाद को गैर-उद्यमी कारणों से जारी रखते हैं तो उनका उसमें स्वार्थ है.

शौक पर दांव लगाने के नुकसान

नैनो को बचाया नहीं जाना चाहिए. अगर टाटा सस्ती कार के विचार के लिए दृढ़ हैं तो उन्हें पूरी तरह से एक नया प्लेटफार्ट तैयार करना चाहिए और नैनो ब्रांड को हटा देना चाहिए. इसे पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता.

नैनो की नादानी के साथ टाटा का एक और शौक है विमानन. अपने पूर्ववर्ती जेआरडी टाटा की तरह रतन टाटा विमानन को लेकर आकर्षित रहे हैं. 1990 के दशक में सिंगापुर एयरलाइंस के साथ किया गया निवेश असफल हो गया है.

किंगफिशन की असफलता के बाद जब इस क्षेत्र में विदेशी निवेश का रास्ता खुला तो टाटा इसमें कूद पड़े. सिर्फ एक में नहीं, बल्कि दो एयरलाइन सेवा में.

जैसा कि मिस्त्री का आरोप है कि इन दोनों ने टाटा संस के बोर्ड पर स्पष्ट रूप से यह दबाव डाला कि रतन टाटा के शौक पर दांव लगाया जाए.

कोई यह कल्पना नहीं कर सकता कि ये निवेश दोषपूर्ण होंगे, लेकिन अंतत: इंडिगो ने यह साबित किया है कि विमानन कंपनी को सही रणनीति के साथ मुनाफे में चलाया जा सकता है. लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि वह एक लंबी दौड़ के लिए होगा.

नैनो और टाटा विमानन में निवेश के खिलाफ मिस्त्री के धमाके का सबक एकदम सीधा है: प्रमोटर के शौक से जुड़े बिजनेस निर्णयों को निर्देश नहीं दे सकते.

शौक के लिए निजी तौर पर फंड करना चाहिए. रतन टाटा यह तब भी कर रहे थे जब 2012 में वे चेयरमैन थे, और रिटायरमेंट के बाद भी करते रहे हैं.

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