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साइबर फ्रॉड: सरकार डाल-डाल तो अपराधी पात-पात

नोटबंदी के बाद से लोग डिजिटल पेमेंट्स के तरीके को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 30, 2017 05:10 PM IST

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साइबर फ्रॉड: सरकार डाल-डाल तो अपराधी पात-पात

नोटबंदी के बाद से सरकार कैशलेस इकनॉमी को बढ़ावा देने में लगी हुई है. भारत सरकार के इस कदम को देश के कई राज्यों का भी समर्थन मिल रहा है. भारत सरकार की योजना है कि आने वाले दिनों में आधार कार्ड को डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाए.

इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम कितना सुरक्षित?

भारत सरकार आने वाले कुछ महीनों में आधार कार्ड को पेमेंट कार्ड की तरह इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है.

देश में इस वक्त हर तरफ इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है. मगर इन सबके बीच यह बात निकल कर आ रही है कि हमारे बैकिंग सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के लिए कितने सुरक्षित हैं?

एक तरफ केंद्र के सभी मंत्रालयों द्वारा अपनी योजनाओं में डिजिटल ट्रांजेक्शंस को बढ़ावा देने के लिए कई स्तर पहल की जा रही है तो दूसरी तरफ कुछ साइबर फ्रॉड गिरोह सरकार की इस योजना को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं.

Hacking

हालात यह है कि इस तरह के गिरोह ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को जालसाजी कर कुछ ही मिनटों में हजम करने में लगे हुए हैं. देश में और खासकर राजधानी दिल्ली में कुछ ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो एटीएम कार्ड का डाटा चुराकर लोगों के खाते में सेंध लगा रहे हैं. लोगों को आए दिन इस तरह की घटनाओं से दो-चार होना पड़ रहा है.

कमोबेश ऐसे ही मामले देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहे हैं. ग्राहकों को आए दिन कभी चोरी किए गए डाटा के जरिए नुकसान झेलना पड़ रहा है तो कभी एटीएम कार्ड का क्लोन बना कर उनके पैसे निकाल लिए जा रहे हैं. इतना ही नहीं अब तो ऑनलाइन खरीददारी में भी फर्जीवाड़ा कर लोगों को चूना लगाया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस के अपराध शाखा ने पिछले सप्ताह कुछ ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो दुबई से डेबिट कार्ड का क्लोन बना कर दिल्ली और मुंबई भेजता था. इस तरह के एटीएम कार्ड के क्लोन से रात के समय ही पैसे निकाले जाते हैं.

यूं करें डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल

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साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं कि डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड को इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

सबसे पहले तो अपना डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए. कार्ड को जब एटीएम मशीन में डालते हैं तो डालने से पहले यह देख लें कि मशीन के साथ कोई चिप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तो नहीं लगा है.

पवन दुग्गल आगे कहते हैं कि लोगों को अपने कार्ड का इस्तेमाल उन वेबसाइट पर ही करना चाहिए जो http से शुरू होते हैं. ग्राहकों को वैसे वेबसाइट के प्रयोग से बचना चाहिए जो http से शुरू नहीं होते हैं.

साथ ही सुनसान जगहों में रखे एटीएम या बिना गार्ड वाले एटीएम के इस्तेमाल करने से बचें. मोबाइल फोन में एटीएम का पिन न रखें.

खास कर नोटबंदी के बाद से पिछले कुछ महीनों में देशभर के एटीएम कार्ड्स सुरक्षा में बड़े स्तर पर सेंध लगने के मामले सामने आ रहे है. सुरक्षा के लिहाज से एटीएम कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में अभी काफी कदम उठाए जाने की जरूरत है.

साइबर ठगी रोकने के सरकार कितनी चिंतित?

cyber

देश की अर्थव्यवस्था को कैशलेस में बदलना हो तो सुरक्षा एक गंभीर विषय बना हुआ है. सरकार द्वारा सुरक्षा को लेकर कई जरूरी कदम उठाए गए हैं लेकिन अभी तक वह नकाफी साबित हुए हैं.

नवंबर में नोटबंदी के बाद सरकार ने 25 दिसंबर को डिजिटल पेमेंट की दो स्कीम लॉन्च की थीं. लकी ग्राहक योजना और डिजिधन व्यापार योजना.

एक तरफ सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए लकी ड्रा योजना की शुरूआत करती है. डिजिटल ट्रांजेक्शंस को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति से अवार्ड दिलाया जाता है तो दूसरी तरफ ठगी के शिकार हो रहे लोगों की समस्या को सुलझाने के लिए कोई जरूरी कदम नहीं उठाए जाते हैं.

दिन-प्रतिदिन साइबर फ्रॉड से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी 

दिल्ली,आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्य ही हैं, जहां पर डिजिटल ट्रांजेक्शन सबसे ज्यादा होते हैं. सरकार की योजनाओं का इन्हीं राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के लोग ज्यादा लाभान्वित हो रहे हैं और इन्हीं जगहों के लोगों को लकी ड्रा या अन्य तरह से फायदा पहुंचाया जाता है.

नोटबंदी के बाद से लोग डिजिटल पेमेंट्स के तरीके को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं.

नीति आयोग के मुताबिक डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या में 23 गुना इजाफा हुआ है. मार्च 2017 में 2 हजार 425 करोड़ रुपए की कुल 63 लाख 80 हजार ट्रांजेक्शंस हुईं.

जबकि, नवंबर 2016 में 101 करोड़ रुपए वैल्यू की महज 2 लाख 80 हजार डिजिटल ट्रांजेक्शंस हुई थीं. आधार इनेबल्ड पेमेंट 2.5 करोड़ (नवंबर 2016) से बढ़कर 5 करोड़ (मार्च 2017) तक पहुंच गई हैं.

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