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अगर जांच एजेंसियां टाइम पर जाग जातीं तो न होता पीएनबी घोटाला: सीवीसी रिपोर्ट

सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पीएनबी और भारतीय जांच एजेंसियां अगर समय पर जागी होतीं तो नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे लोग भारतीय बैंकों के पैसे लेकर विदेश नहीं भागे होते.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 09, 2018 07:07 PM IST

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अगर जांच एजेंसियां टाइम पर जाग जातीं तो न होता पीएनबी घोटाला: सीवीसी रिपोर्ट

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की एक रिपोर्ट के खुलासे के बाद भारतीय जांच एजेंसियों के काम करने के तौर-तरीकों पर सवाल उठने लगे हैं. सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पीएनबी और भारतीय जांच एजेंसियां अगर समय पर जागी होतीं तो नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे लोग भारतीय बैंकों के पैसे लेकर विदेश नहीं भागे होते.

सीवीसी ने खासतौर पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ 13 हजार 600 करोड़ रुपए के घोटाले की खबर सार्वजनिक होने से करीब एक साल पहले ही रत्न एवं आभूषण सेक्टर में हो रही अनियमितता को लेकर भारतीय जांच एजेंसियों को आगाह किया था.

सीबीआई और ईडी ने हाल ही में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी एवं उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया था.

सीवीसी के मुताबिक पिछले साल जनवरी महीने में सीबीआई, ईडी और 10 बैंकों के सतर्कता आयुक्तों को जिनमें पीएनबी के अधिकारी भी शामिल हैं, को पत्र लिख कर आभूषण कंपनियों के खाते में गंभीर अनियमितता होने की बात कही गई थी. इस रिपोर्ट में आभूषण बनाने वाली कंपनियों के कामकाज और लोन लेन-देन को लेकर चौकसी बरतने की बात कह गई थी.

सीवीसी ने इस मीटिंग में खासतौर पर आभूषण कारोबारी जतिन मेहता की कंपनी विनसम ग्रुप का उदाहरण दिया था. जतिन मेहता पर 6 हजार करोड़ रुपए घोटाला करने का आरोप है. जतिन मेहता भी इस समय देश से फरार चल रहा है.

सीवीसी के मुताबिक पीएनबी ने उनकी सलाह को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि यह घोटाला भारतीय बैंकिंग सेक्टर के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला बन कर सामने आया.

Punjab-National-Bank-PNB

दो महीने पहले ही 13 हजार 600 करोड़ रुपए का पीएनबी घोटाला सामने आया था. इस मामले में तीन कंपनियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है. जिन कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें गीतांजलि जेम्स, गिली इंडिया और नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड शामिल हैं.

इस घटना से सबक लेते हुए सीवीसी ने पंजाब नेशनल बैंक के चार्टेड अकाउंट्स को जल्द से जल्द पेश होने और वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारियां मुहैया कराने का आदेश दिया है.

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी के मुताबिक, पीएनबी के मुख्य सतर्कता आयुक्त से पीएनबी बैंक के पूरी जानकारी मंगाई गई है. चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि पीएबी के सतर्कता आयुक्त से एक रिपोर्ट देने को कहा गया है. साथ ही देश की और बैंकों के सतर्कता प्रणाली को मजबूत करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है.

दूसरी तरफ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के आरोपी अरबपति कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर दिया है. लेकिन, दोनों मामा-भांजा घोटाला सामने आने के बाद से ही देश से फरार हैं.

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ईडी की विशेष अदालत ने पहले ही दोनों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर रखा है. इंटरपोल से भी रेड-कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद मामा-भांजा अब भी भारतीय जांच एजेंसियों के पकड़ से काफी दूर है.

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को लेकर भारतीय जांच एजेंसियां विदेशी जांच एजेंसियों के लगातार संपर्क में है. नीरव मोदी ने भी खुद को बैंकरप्ट घोषित करने के लिए अमेरिका की एक अदालत में अर्जी दाखिल कर रखी है. माना जा रहा है नीरव ने यह कदम भारतीय जांच एजेंसियों की तरफ से बढ़ते दबाव की वजह से उठाया है.

इस बीच भारतीय जांच एजेंसियां खासकर ईडी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े उन सभी ठिकानों को खंगाल रही है, जहां पर दोनों के छुपे होने की आशंका सबसे ज्यादा है. नीरव मोदी के बारे में तो लगभग साफ हो चुका है कि वह हांगकांग में छुपा है. वहीं अब मेहुल चोकसी के ठिकाने का भी पता लगने की बात सामने आ रही है. मेहुल चोकसी के बारे में कहा जा रहा है कि वह न्यूयॉर्क में देखा गया है.

पिछले दिनों ही देश के आयकर विभाग ने कुछ बेनामी संपत्ति खरीदने को लेकर नीरव मोदी के खिलाफ 2017 में दर्ज एक मामले में जमानती वारंट जारी किया था. आयकर विभाग का कहना है कि इस मामले की जांच काफी समय से चल रही है. आयकर विभाग साल 2017 में ही नीरव मोदी का बयान भी दर्ज करा चुका है, लेकिन बाद में पता चला कि नीरव मोदी ने उस समय झूठा बयान दर्ज करवाया था.

गौरतलब है कि पिछले महीने ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत ने कई देशों को लेटर रोगेटरी (एलआर) जारी किया था. एलआर जारी करने का मतलब होता है कि जिन-जिन देशों में नीरव मोदी के कारोबार या संपत्ति है, वहां पर भी भारतीय जांच एजेंसियां उसके कारोबार और संपत्तियों की पड़ताल कर सकती है.

इस घोटाले के आरोपी नीरव मोदी, उसकी पत्नी अमी मोदी, भाई निशाल मोदी और गीतांजलि के ग्रुप के मालिक मेहुल चौकसी के खिलाफ इंटरपोल को भी अलर्ट कर दिया गया है.

Nirav Modi

इन चारों के खिलाफ पिछले महीने ही इंटरपोल ने डिफ्यूजन नोटिस जारी किया था. इन चारों को एक सप्ताह के अंदर भारतीय विदेश मंत्रालय या भारतीय दूतावास में रिपोर्ट करने को कहा गया था. लेकिन, सात दिनों के अंदर ये लोग हाजिर नहीं हुए इसके बाद सभी के पासपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने रद्द कर दिया था.

इस बीच नीरव मोदी की गिरफ्तारी को लेकर भारत के अनुरोध पर हांगकांग प्रशासन विचार करने की बात कहा है. सोमवार को चीन ने कहा है कि हांगकांग की न्यायिक व्यवस्था और दोनों देशों के समझौते के आधार पर हांगकांग चाहे तो गिरफ्तारी के अनुरोध को स्वीकार कर सकता है.

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