S M L

पंजाबी-खासी समुदाय में टकराव का नतीजा है शिलॉन्ग हिंसा?

शिलॉन्ग में अशांत क्षेत्रों में सेना ने फ्लैग मार्च निकाला और रात भर हुई हिंसा और आगजनी के बाद कई लोगों को बचाया गया

FP Staff Updated On: Jun 03, 2018 12:47 PM IST

0
पंजाबी-खासी समुदाय में टकराव का नतीजा है शिलॉन्ग हिंसा?

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में रविवार को 7 घंटे के लिए कर्फ्यू हटाने का निर्देश दिया गया. हालांकि कई प्रकार की पाबंदियां फिलहाल जारी रहेंगी. लुमडिनगिरी और कैंट इलाके में सुबह 8 बजे से 3 बजे तक के लिए कर्फ्यू हटाने की घोषणा की गई.

इससे पहले शनिवार को कुछ हिस्सों में दूसरे दिन भी कर्फ्यू जारी रहा. अशांत क्षेत्रों में सेना ने फ्लैग मार्च निकाला और रात भर हुई हिंसा और आगजनी के बाद कई लोगों को बचाया गया.

शिलॉन्ग में रात भर चली हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने एक दुकान और एक मकान को आग के हवाले कर दिया और कम से कम 5 गाड़ियों को तोड़ दिया. इस हिंसा में एक सीनियर पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए.

रक्षा विभाग के प्रवक्ता रत्नाकर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना से आग्रह किया कि प्रभावित इलाकों में फ्लैग मार्च करें. सेना के जवानों ने फ्लैग मार्च किया और करीब 500 लोगों को बचाया जिसमें 200 महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.

प्रदेश के गृह मंत्री जेम्स के संगमा ने एएनआई से कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों पर गौर किया जा रहा है. संगमा ने कहा, हम उनकी मांगों पर ध्यान दे रहे हैं. उन्हें विरोध प्रदर्शन रोक देना चाहिए. शिलॉन्ग के थेम ल्यू मावलोंग इलाके में अवैध लोगों की बसाहट के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर गए हैं.

क्या है पूरा मामला?

गुरुवार दोपहर थेम मेटोर इलाके के लोगों ने एक बस क्लिनर के साथ कथित तौर पर मारपीट की जिसके बाद दोनों समूहों के बीच यह झड़प हुई. इस झड़प ने तब और उग्र रूप ले लिया जब सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई कि चोट के कारण क्लिनर की मौत हो गई. पुलिस को उनको रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.

क्लिनर और 3 अन्य घायलों को अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.

कैसे भड़का मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को थेम ल्यू मावलोंग इलाके में एक खासी लड़के और एक पंजाबी महिला के बीच झगड़े के बाद मामला गंभीर हो गया. मावलोंग में तकरीबन 350 पंजाबी परिवार रहते हैं.

'पंजाबी लेन' में रहने वाले सन्नी सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पिछली रात वे नहीं सो पाए क्योंकि कुछ ही दूरी पर एक पंजाबी परिवार के घर को आग के हवाले कर दिया गया.

इस इलाके के खासी लोग पंजाबी समुदाय को हटाने की लंबे दिनों से मांग कर रहे हैं. पंजाबी लेन के गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव गुरजीत सिंह ने कहा कि हालिया हिंसा एक बड़े एजेंडे का हिस्सा है. सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 1980 से वो (खासी) हमें अवैध निवासी बता रहे हैं और हमें यहां से चले जाने को कह रहे हैं. यहां कई साल से रह रहे हैं और रहेंगे. हमारा यही स्टैंड है. कई नेता किसी और सुरक्षित जगह पर पुनर्वास कराने की बात करते हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं. सारी बातें खोखली साबित हो रही हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
'हमारे देश की सबसे खूबसूरत चीज 'सेक्युलरिज़म' है लेकिन कुछ तो अजीब हो रहा है'- Taapsee Pannu

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi