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झारखंडः सीआरपीएफ ने शुरू किया भाषा और संस्कृति पाठ्यक्रम, नक्सलियों से निपटने का नया रास्ता

इस प्रोग्राम के तहत सीआरपीएफ के करीब 1200 जवानों को आदिवासी जिंदगी के बारे में बताया जाएगा, सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से सीआरपीएफ के जवान बातचीत करेंगे और कई चीजें सीखेंगे और उन्हें बताएंगे भी

Updated On: Nov 11, 2018 05:43 PM IST

FP Staff

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झारखंडः सीआरपीएफ ने शुरू किया भाषा और संस्कृति पाठ्यक्रम, नक्सलियों से निपटने का नया रास्ता

पहली बार सीआरपीएफ ने अपनो जवानों को झारखंड के आदिवासी और स्थीनीय इलाकों से रूबरू कराने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यह एक खास प्रोग्राम का हिस्सा है जिसे नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए किया गया है. इस प्रोग्राम के तहत सीआरपीएफ के करीब 1200 जवानों को आदिवासी जिंदगी के बारे में बताया जाएगा. सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से सीआरपीएफ के जवान बातचीत करेंगे और कई चीजें सीखेंगे और उन्हें बताएंगे भी.

झारखंड सीआरपीएफ के आईजी संजय ए लातकर ने बताया कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इस प्रोग्राम की शुरुआत की गई है. स्थानीय लोगों में शिक्षा की कमी होने की वजह से वह लोग कई चीजों से डरते हैं ऐसे में उनके डर को दूर करना जरूरी है. उन लोगों तक पहुंचने के लिए उनकी भाषा जानना और उनकी संस्कृति को समझना भी जरूरी है. इस बात को ध्यान में रखते हुए कई तरह के लैंग्वेज और कल्चर के कोर्स की शुरुआत की गई है. सीआरपीएफ के जवानों को हो, संथाली, नागपुरी, कुरुख, सदरी, भोजपुरी जैसे आदिवासी भाषाएं सिखाई जा रही हैं. जवानों को ये भाषाएं लिखना भी सिखाया जा रहा है. साथ ही उन्हें आदिवासी संस्कृति की भी पहचान कराई जा रही है.

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