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नोटबंदी से हवाला का धंधा मंदा, चोरों ने भी बदला स्टाइल

नोटबंदी के बाद से अपराध की खबरों की संख्या घटी है ?

Updated On: Nov 18, 2016 06:14 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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नोटबंदी से हवाला का धंधा मंदा, चोरों ने भी बदला स्टाइल

देश में नोट बंदी के बाद से ही हत्या, लूट, डकैती जैसे रोज होने वाले अपराध की घटनाओं में कमी आई है. रोजाना हत्या, लूट, डकैती से पटे रहने वाले अखबार और न्यूज चैनल से क्राइम की खबरें लगभग गायब सी हो गई हैं. पिछले एक हफ्ते से अपराध जगत से ऐसी एक भी बड़ी खबर नहीं आई है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हो. इस समय देश में अगर कोई खबर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है तो वह है रोज लाखों-करोड़ रुपए जब्ती.

नोटबंदी में है दम, अपराध हुए कम?

यही हाल हवाला कारोबारियों का है. नोटबंदी के बाद से देश में हवाला कारोबारियों के धंधे में तेजी से गिरावट आई है. दिल्ली में हवाला कारोबारियों का मेन अड्डा दिल्ली-6 में सन्नाटा पसरा हुआ है. लूट, हत्या, डकैती, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाओं में कमी के सवाल पर जब हमने सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी एमएस रंधावा से बात की तो उनका कहना था कि, 'इतनी जल्दी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. हमलोग नजर बनाए हुए हैं.'

हवाला कारोबारी हैं अंडरग्राउंड

आईबी के एक अधिकारी कहते हैं कि,

"रोज हमारी एक रिपोर्ट होम मिनिस्ट्री में जाती है. आठ तारीख के बाद से हम लोग जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान सीमा से सटे राज्यों पर विशेष नजर रख रहे हैं. अभी तक जो जानकारी मिली है उसमें एक भी हवाला के ट्रांजेक्शन का सबूत नहीं मिला है. कई बड़े हवाला कारोबारी अंडरग्रांउड हो गए हैं या फिर उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया है."

मयखाने सूने हैं

नोटबंदी का असर शराब के दुकानों पर भी देखा जा रहा है. 8 तारीख से पहले शराब के दुकानों पर लंबी लाइनें लगी रहती थी, जो आज कल नदारद है. लक्ष्मी नगर के एक अंग्रेजी शराब के ठेके के मैनेजर अमिताभ बताते हैं कि,

'बिक्री तो हो रही है, पर उसमें गिरावट बहुत ज्यादा है. पहले हमारे पास स्टॉक डेली आते थे. डेली माल खप जाता जाता था, पर अब एक बार स्टॉक मंगाने के बाद तीन-चार दिन उसी स्टॉक से काम चल जाता है. गिरावट तो आई है. लोगों के पास रुपये नहीं हैं'.

पत्रकारों से पटे रहने वाला दिल्ली का प्रेस क्लब शाम होते ही गुलजार हो जाता था, पर आज-कल शराब का मजा लेने वाले पत्रकारों की संख्या में भारी कमी आई है. रोजाना पीने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि," मेरा शराब पीना तो छूटा नहीं है पर इसमें कमी जरूर आई है."

क्या अपराध थम जाएंगे ?

एक अनुमान के अनुसार, देश में इस समय कई शहरों में अपराध की घटनाओं में 40 प्रतिशत तक कमी आई है. देश के कुछ हिस्सों से अभी भी चोरी, झपटमारी की खबरें आ रही हैं. चोर 500 और हजार के नोट को छोड़ रहे हैं, और 100-100 के नोट ले रहे हैं. यानि अब चोर भी स्टॉक के हिसाब से चोरी कर रहे हैं. देखना ये है कि, क्या वाकई पैसों की कमी से अपराध की घटनाओं में कमी आई है. ऐसे में पैसों की पर्याप्त मात्रा आने के बाद पहले वाली ही स्थिति रहेगी या उसमें कुछ सुधार होगा.

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