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25 प्रतिशत तक बढ़े दलितों के खिलाफ अपराध, आदिवासी, ST के खिलाफ घटे

2006 में प्रति 1 लाख दलितों पर 16.3 का अपराध आंकड़ा था, जो 2016 में बढ़कर 20.3 हुआ है

FP Staff Updated On: Apr 19, 2018 01:24 PM IST

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25 प्रतिशत तक बढ़े दलितों के खिलाफ अपराध, आदिवासी, ST के खिलाफ घटे

देश में दलितों के खिलाफ अपराध में 25 प्रतिशत की तेजी आई है. यह आंकड़ा 2006 से 2016 तक का है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर इंडियास्पेंड ने अपने एक विश्लेषण में इस पर प्रकाश डाला है. विश्लेषण के मुताबिक 2006 में प्रति 1 लाख दलितों पर 16.3 का अपराध आंकड़ा था, जो 2016 में बढ़कर 20.3 हुआ है. हालांकि आदिवासियों या एसटी के खिलाफ अपराध में कमी आई है. ये आंकड़े 2006 में प्रति 1 लाख आदिवासियों पर 6.9 थे, जो 2016 में 6.3 हुए हैं.

बीते 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट-1989 के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि कानून के तहत दर्ज अपराधों के लिए बिना अनुमति लिए लोग या सार्वजनिक कर्मचारी की कोई तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी. शिकायत में दोष पाए जाने पर अग्रिम जमानत का प्रावधान शुरू किया गया है.

इस फैसले के बाद पूरे देश में दलित और आदिवासी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. 2 अप्रैल को विरोध में आयोजित भारत बंद राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पंजाब और मध्य प्रदेश में हिंसक हो गया, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई.

2011 की जनगणना के मुताबिक, दलित या एससी भारत की आबादी का 16.6 फीसदी (201 मिलियन या 20.1 करोड़) बनाती हैं. 2001 में यह आंकड़े 16.2 फीसदी थे. देश की आबादी में 8.6 फीसदी (104 मिलियन या सवा दस करोड़) हिस्सेदारी आदिवासियों की है, एक दशक पहले के लिए आंकड़े 8.2 फीसदी था.

अव्वल रहे बिहार, केरल, कर्नाटक

2006 से 2016 के बीच, दलितों और एससी के खिलाफ कम से कम 422,799 अपराध दर्ज किए गए. अपराध में सबसे ज्यादा वृद्धि आठ राज्यों में दर्ज किए गए. ये राज्य हैं गोवा, केरल, दिल्ली, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और सिक्किम, जहां अपराध दर में 10 गुना वृद्धि हुई है. इस बीच, केरल, कर्नाटक और बिहार में अपराध दर में सबसे ज्यादा वृद्धि के साथ आदिवासियों के खिलाफ 81,322 अपराधों की खबर मिली.

2016 तक मध्य प्रदेश (43.4), गोवा (43.2), और राजस्थान (42) में दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दर दर्ज किए गए, जबकि उनकी सजा दर 31 फीसदी, 8 फीसदी और 45 फीसदी थी. 2006 से 2016 के दौरान दिल्ली में सबसे अधिक वृद्धि (67 फीसदी) की सूचना मिली है.

पुलिस जांच में दोगुने बढ़े पेंडिंग मामले

एससी के खिलाफ अपराध के पेंडिंग पुलिस जांच के मामले दोगुने बढ़े हैं. साल 2006 में 8,380 मामले थे, जो साल 2016 में 16,654 मामले हुए. 4,311 मामलों के साथ बिहार की हालत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे बद्तर है. एसटी के खिलाफ अपराध में लंबित मामले में 55 फीसदी वृद्धि हुई है. यह आंकड़े 2006 में 1,679 थे, जो बढ़ कर 2016 के अंत में 2,602 हुए हैं. आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा लंबित (405) मामलों की सूचना मिली है.

फर्जी साबित हुए 6 हजार मामले

दलितों के खिलाफ दर्ज अपराधों की संख्या, जो पुलिस की शुरुआती जांच में गलत साबित हुए, उनकी संख्या 6,000 रही. भारत में कुल 5,347 मामले झूठे साबित हुए हैं और राजस्थान में अकेले लगभग आधे या 49 फीसदी झूठे मामले दर्ज किए गए (2,632 मामले). एसटी के खिलाफ दर्ज अपराध और गलत साबित होने के मामले 27 फीसदी की गिरावट आई है. यह आंकड़े 2006 में 1257 मामलों से गिरकर 2016 में 912 हुए हैं.

(इंडियास्पेंड के लिए एलिसन सलदानहा और चैतन्य मल्लापुर की रिपोर्ट)

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