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गुजरात बीजेपी की चुनावी नैया की खिवैया भी प्यारी गैया

गुजरात सरकार का नया कानून देश का सबसे सख्त गोरक्षा कानून बन गया है

Sanjay Singh Updated On: Apr 01, 2017 02:36 PM IST

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गुजरात बीजेपी की चुनावी नैया की खिवैया भी प्यारी गैया

गुजरात में अब गाय का वध इंसान की हत्या करने के बराबर जुर्म होगा. गुजरात विधानसभा ने जो नया कानून पास किया है उससे पूरे देश का ये सबसे सख्त गोरक्षा कानून बन गया है.

राज्यपाल की मंजूरी के बाद ये कानून लागू हो जाएगा. इस कानून के लागू होने पर गुजरात में सिर्फ गायों ही नहीं, बछड़ों, सांड़ और भैंसों का कत्ल करने पर भी रोक लग जाएगी.

गुजरात की सरकार इतना सख्त कानून बनाने के लिए खुद को शाबाशी दे रही है. नया कानून 1954 के गुजरात एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट में बदलाव करके बनाया गया है. इस कानून को 2011 में उस वक्त की मोदी सरकार ने भी संशोधित किया था.

नए बदलावों के बाद ये कानून और भी सख्त हो गया है. मौजूदा कानून में 2011 में जो बदलाव हुए थे उनके मुताबिक गोवध पर सात साल कैद का प्रावधान था. मौजूदा कानून में ये सजा बढ़ाकर उम्र कैद कर दी गई है.

मुख्यमंत्री ने नया कानून पासे होने के बाद ट्वीट करके कहा कि, 'गुजरात विधानसभा ने गोरक्षा का कानून पास किया है, जो कि देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक है. इससे गुजरात में गोवध करने पर उम्रकैद की सजा मिलेगी. भारतीयों के लिए गाय सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि प्रतीक है. गाय धरती की, पोषक की और त्याग की प्रतीक है'.

गुजरात देश का ऐसा राज्य है जहां आम तौर पर शाकाहारी खाना खाया जाता है. मांसाहार बहुत कम होता है. यहां ध्यान रखने वाली बात है कि गुजरात विधानसभा ने चुनाव से कुछ महीने पहले ही नए कानून को मंजूरी दी है. इस कानून का राजनैतिक-सामाजिक असर पड़ना तय है.

An Indian Hindu man feeds a sacred cow at Goshala, cow shelter, in Hyderabad on October 6, 2010. Cows remain a protected animal in Hinduism and are often treated as a member of the family. Infertility in cattle accounts for major economic losses in dairy farming and dairy industry in India. AFP PHOTO/Noah SEELAM (Photo credit should read NOAH SEELAM/AFP/Getty Images)

गाय को लेकर राजनीति हो रही है और गोरक्षा को नया रूप-रंग दिया जा रहा है

विपक्ष को मौका

हालांकि, जिस तरह से गाय को लेकर राजनीति हो रही है और गोरक्षा को नया रूप-रंग दिया जा रहा है, उससे इस बात की उम्मीद कम ही है कि विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे पर विजय रूपानी सरकार का विरोध करेगी.

हालांकि, कानून के कुछ मुद्दों को लेकर हंगामा होना तय है. ये आशंका तो जताई ही जा रही है कि पुलिस और गोरक्षा के नाम का अभियान चलाने वाली संस्थाएं इस कानून का दुरुपयोग कर सकती हैं.

किसी के पास बीफ मिलने पर भी उससे सख्ती से निपटा जाएगा. नये कानून के मुताबिक बीफ मिलने पर एक से पांच लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है. साथ ही आरोपी को सात से दस साल तक की सजा भी हो सकती है.

बीफ रखना गैर जमानती जुर्म है. अब तक बीफ रखने पर अधिकतम सात साल की सजा का ही प्रावधान था. इसमें कम से कम तीन साल की कैद हो सकती थी, जबकि जुर्माना 50 हजार तक किया जा सकता था.

नए कानून में सख्त सजा के प्रावधान के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि पुराने कानून में कई झोल थे. पुराने कानून में 16 साल तक के दूध देने वाले जानवरों के मारने पर ही रोक थी. इसके बावजूद गायों का वध हो रहा था.

पहले के कानून में मारने के लिए गायों को ले जाने पर रोक का कोई प्रावधान नहीं था. राज्य के 'मालधारी' यानी चरवाहा समुदाय के लोग काफी समय से गोहत्या और बीफ के कारोबार के खिलाफ सख्त कानून की मांग कर रहे थे.

गुजरात विधानसभा ने नया कानून उस वक्त पास किया है, जब पूरे देश में यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई की बहस हो रही है. बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अवैध बूचड़खाने बंद करने का वादा किया था.

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पवित्र गाय

पिछले साल गुजरात में सात दलितों को कुछ गोरक्षकों ने बुरी तरह पीटा था.

मोदी-शाह का गृहराज्य

पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि दूध देने वाले जानवरों की तस्करी करके उन्हें काटा जा रहा है. इससे देश के बहुमूल्य संसाधन का नुकसान होता है. चुनाव के बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने इसे सेहत, साफ-सफाई और पर्यावरण से भी जोड़ दिया था.

पिछले साल गुजरात में सात दलितों को कुछ गोरक्षकों ने बुरी तरह पीटा था. दलितों का जुर्म ये था कि वो एक मरी हुई गाय की चमड़ी उतार रहे थे. दलितों की पिटाई का ये वीडियो वायरल होने के बाद पूरे गुजरात में दलितों ने एकजुट होकर इसका पुरजोर विरोध किया था.

राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले ने काफी जोर पकड़ा था. इस घटना को लेकर राजनैतिक हलकों में काफी बहस हुई थी.अभी ये पता नहीं है कि गुजरात के नए कानून पर तमाम संस्थाएं कैसी प्रतिक्रिया देंगी. अभी ये भी साफ नहीं है कि सरकार कैसे मरे हुए जानवरों का निपटारा करेगी.

अगर किसी के पास खुद से मरे हुए जानवर का मांस मिलता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी. सवाल ये भी है कि क्या बीजेपी के राज वाले दूसरे राज्य भी इस तरह के कानून बनाएंगे? फिलहाल इस सवाल का जवाब देना मुश्किल है.

लेकिन, बीजेपी की ये कोशिश जरूर होगी कि वो पूरे देश में गुजरात के इस नए कानून का प्रचार करे. इस साल गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं. ये पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृहराज्य है. इसीलिए पार्टी किसी भी कीमत पर ये चुनाव जीतना चाहेगी.

क्योंकि गुजरात जीतना मोदी और अमित शाह की प्रतिष्ठा का सवाल है.

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