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2017 का सबसे रहस्यमय सपना: कोई तो बता दे इसका मतलब मेरे भाई!

डर लग रहा है कहीं दिमाग में कोई केमिकल लोचा तो नहीं हो गया?

Updated On: Apr 10, 2017 07:59 AM IST

Rakesh Kayasth Rakesh Kayasth

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2017 का सबसे रहस्यमय सपना: कोई तो बता दे इसका मतलब मेरे भाई!

सपना आखिर क्या है? मनोवैज्ञानिक सपनों का अलग तरह से विश्लेषण करते हैं और भारतीय ज्योतिष शास्त्र अपने ढंग से.

कई दिनों से मैं एक विचित्र सपना देख रहा हूं, जिसका मतलब न ज्योतिषि बता पा रहे हैं, न मनोवैज्ञानिक.

डर लग रहा है कहीं दिमाग में कोई केमिकल लोचा तो नहीं हो गया? सोचा एक बार आप सबसे पूछकर देख लूं, शायद आप मायने समझा दें और खुद को मनोरोगी मानने से बच जाऊं.

क्या आप बता सकते हैं मेरे सपने का मतलब?

मैंने सपना देखा कि कहीं से थक-हारकर मैं घर लौटा हूं. पहुंचते ही मैं हैरान रह गया. दरवाजे का लॉक टूटा हुआ था.

सामान इधर-उधर बिखरा था. अंदर पहुंचा तो एक आदमी पर नजर पड़ी, दुबली कद-काठी का लेकिन चेहरे से पेशेवर अपराधी जैसा.

वह बड़े इत्मीनान से घर कीमती चीजें मेरे ही बैग में भर रहा था. उसे देखते ही मेरे मुंह से चीख निकल गई लेकिन उसने घूरते हुए चुप रहने का इशारा किया. मैंने डरते-डरते पूछा-तुम कौन हो?

उसने बेपरवाही से जवाब दिया- तुझे दिखाई नहीं देता? मैंने कहा- मैं शोर मचाउंगा, पुलिस को बुलाउंगा

उसने गंभीरता से कहा- तुम्हे याद है, आज से पांच दिन पहले तुम्हारे पड़ोसी के घर का ताला टूटा था? मैने कहा- हां टूटा था, क्या तुमने…

उसने कहा- और पिछले महीने मिश्राजी के घर चोरी हुई थी. मैने कहा- हां हुई थी? उसने कहा- उस समय तुम कहां थे? क्या तब तुमने शोर मचाया था, पुलिस को बुलाया था?

मैं असमंजस में पड़ गया..

कौन है ये डकैत?

गौ माता के नाम पर क्या हर गुनाह माफ है!

गौ माता के नाम पर क्या हर गुनाह माफ है!

उसने हिकारत से कहा- कितने गिरे हुए खुदगर्ज आदमी हो तुम, सिर्फ अपने बारे में सोचते हो, मतलबी कहीं के तुम्हे शर्म नहीं आती?

उसकी बात मुझे गोली की तरह लगी. शर्मिंदगी का ऐसा इंजेक्शन उसने लगाया था कि मुझे होश में आने में चंद मिनट लग गए.

तब तक वह सामान समेटकर दरवाजे से बाहर निकल चुका था. खुद को संभालते हुए मैं उसके पीछे-पीछे भागा.

चौराहे पर जाकर मैने उसे पकड़ लिया. हम दोनो गुत्थम-गुत्था थे. मदद के लिए मैने गला फाड़कर आवाज लगाई- चोर-चोर-चोर!

देखते-देखते कई लोग घरो से निकल आये. मैने फिर चोर-चोर की आवाज़ लगाई. लेकिन वो मुझसे दोगुनी ऊंची आवाज में चिल्लाया- भारत माता की जय…

जनता ने भी उसके सुर में सुर मिलाया- भारत माता की जय...

उल्टा फंसा मैं

उसके बाद मुझ पर लात-घूंसों की बारिश होने लगी. मैंने महसूस किया कि मैं पिट रहा हूं और वो भीड़ का फायदा उठाकर कहीं गायब हो चुका है.

मेरा कॉलर पकड़कर किसी ने ऊंची आवाज में पूछा- क्यों बे देशद्रोही कहां रहता है?

ना जाने मेरे जिह्वा पर सरस्वती कैसे विराजी और मैने हकलाते हुए कहा- वो मेरे घर चोरी करने आया था. मेरी गाय चुराने.

इतना सुनते ही भीड़ उस आदमी के पीछे दौड़ पड़ी और आखिरकार उसे पकड़ लिया.

चोरी करने आया आदमी अब अस्पताल में भर्ती है, उसकी हालत नाजुक है. दूसरी तरफ गौ-तस्कर को पकड़वाने के लिए मेरा जगह-जगह नागरिक अभिनंदन किया जा रहा है.

सिर पर पट्टी बांधे हाथो में गुलदस्ता लिये मैं मंच पर खड़ा था, अचानक न्यूज चैनल वाले आए और कहने लगे- अपने घर ले चलिए... आपकी गाय का भी इंटरव्यू करना है.

सिर्फ गाय का ही सहारा?

बस हर बार इसी सीन पर हर बार मेरा सपना टूट जाता है. मैं खुद को पसीने से तर-बतर पाता हूं. मैं सोचता हूं मैने गाय कब पाली थी.

फिर उठकर चेक करता हूं कि अपने दो बेडरूम के फ्लैट में मैं उसे कहां बांधता था?

भाइयो कृपया करके रास्ता बताएं क्या ये किसी मनोवैज्ञानिक बीमारी का लक्षण है? हमारी सरकार आजकल नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित है.

इस बारे में बिल भी पार्लियामेंट से पास हो चुका है, इसलिए खुलकर पूछ रहा हूं, अगर मैं मानसिक रूप से बीमार हूं तो मेरी मदद कीजिए.

(लेखक जाने-माने व्यंग्यकार हैं)

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