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सोहराबुद्दीन मामले में पुलिसकर्मी आरोपमुक्त होंगे या नहीं, सोमवार को आ सकता है फैसला

जस्टिस ए एम बदर ने सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन और सीबीआई की दायर पांच पुनरीक्षण याचिकाओं पर चार जुलाई के बाद से नियमित आधार पर सुनवाई की

Updated On: Sep 09, 2018 04:42 PM IST

Bhasha

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सोहराबुद्दीन मामले में पुलिसकर्मी आरोपमुक्त होंगे या नहीं, सोमवार को आ सकता है फैसला

सोहराबुद्दी शेख मामले में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आरोपमुक्त किया जाए या नहीं इस मामले पर सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है. दरअसल 2005-06 में सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और सहायक के मुठभेड़ मामले में गुजरात और राजस्थान के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर कथित रूप से शामिल होने का आरोप है.

सीबीआई के मूताबिक 2005-2006 में दोनों राज्यों की पुलिस की फर्जी मुठभेड़ में शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसका सहायक तुलसीराम प्रजापति मारे गए थे. गुजरात पुलिस ने तब दावा किया था कि सोहराबुद्दीन शेख के आतंकवादियों से संबंध थे.

निचली अदालत ने अधिकारियों को कर दिया था आरोपमुक्त

जस्टिस ए एम बदर की अगुवाई में 16 जुलाई को हाई कोर्ट ने गुजरात की एक निचली अदालत के इस मामले में आरोपियों को आरोपमुक्त करने को चुनौती देने वाली पांच याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. निचली अदालत ने गुजरात के आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन, गुजरात एटीएस के पूर्व प्रमुख डी जी वंजारा, गुजरात पुलिस के अधिकारी एन के अमीन, राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी दिनेश एम एन और राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल दलपत सिंह राठौड़ को आरोपमुक्त कर दिया था.

14 पुलिसकर्मी समेत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी हुए आरोपमुक्त

जस्टिस ए एम बदर ने सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन और सीबीआई की दायर पांच पुनरीक्षण याचिकाओं पर चार जुलाई के बाद से नियमित आधार पर सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला गुजरात से मुंबई की विशेष अदालत में ट्रांसफर किया गया था. जहां 2014 से 2017 के बीच 38 लोगों में से 15 को आरोप मुक्त कर दिया गया था. जिन्हें आरोप मुक्त किया गया था उनमें 14 पुलिस अधिकारी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं.

नवंबर 2005 में मारा गया था सोहराबुद्दीन

सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार, गुजरात के संदिग्ध गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने हैदराबाद के पास से अगवा कर लिया था. इसके बाद उन्हें नवंबर 2005 में एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था.

सीबीआई ने दावा किया था कि राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने गुजरात और राजस्थान के अधिकारियों के इशारे पर प्रजापति को दिसंबर 2006 में अन्य फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था. जिन अधिकारियों ने प्रजापति को मारने के निर्देश दिए थे वे पति-पत्नी की हत्या में शामिल थे. जस्टिस  बदर ने गुजरात के आईपीएस अधिकारी विपुल अग्रवाल की याचिका पर भी अलग से सुनवाई की.

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में सह-आरोपी अग्रवाल की आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका को पिछले साल निचली अदालत ने खारिज कर दिया था. कयास लगाए जा रहे हैं कि अग्रवाल के मामले में भी फैसला सोमवार को आ सकता है.

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