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पत्नी को रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकतीं अदालतें: SC

जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यू. यू. ललित ने कहा, ‘हम एक पति को पत्नी को रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. यह मानवीय रिश्ता है

Updated On: Nov 26, 2017 11:24 AM IST

FP Staff

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पत्नी को रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकतीं अदालतें: SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतें ‘पत्नी को रखने’ के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती हैं. कोर्ट ने पेशे से पायलट एक व्यक्ति को अलग रह रही पत्नी और बेटे की परवरिश के लिए 10 लाख रुपए अंतरिम गुजारा भत्ता के तौर पर जमा कराने के लिए कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस जमानत आदेश को बहाल कर दिया है जिसे पति की ओर से सुलह समझौता मानने से इनकार करने के कारण रद्द कर दिया गया था.

जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यू यू ललित ने कहा, ‘हम एक पति को पत्नी को रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. यह मानवीय रिश्ता है. आप (व्यक्ति) निचली अदालत में 10 लाख रुपए जमा कराएं जिसे पत्नी अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिना शर्त निकाल पाएगी.’

राशि कम करने की बात पर कहा 'ये फैमिली कोर्ट नहीं है' 

जब व्यक्ति के वकील ने कहा कि राशि को कम किया जाए तो पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट फैमिली कोर्ट नहीं है और इसपर कोई बातचीत नहीं हो सकती है.

पीठ ने कहा, ‘अगर आप तुरंत 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हैं तो जमानत आदेश को बहाल किया जा सकता है’. इसके बाद वकील 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हो गया, हांलांकि उन्होंने थोड़ा वक्त मांगा.

पीठ ने कहा, ‘हम याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए बयान के मद्देनजर जमानत के आदेश को बहाल करने को तैयार हैं कि याचिकाकर्ता चार हफ्ते के अंदर 10 लाख रुपए जमा कराएगा.’

कोर्ट ने कहा कि इस राशि को पत्नी बिना किसी शर्त के निकाल सकती है ताकि वो अपनी और अपने बच्चे की फौरी जरूरतों को पूरा कर सके.

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