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20 साल की उम्र में भी पत्नी के साथ 'लिव-इन' में रह सकता है पति: SC

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति-पत्नी की उम्र 21 साल से कम है तो दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं.

FP Staff Updated On: May 06, 2018 12:53 PM IST

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20 साल की उम्र में भी पत्नी के साथ 'लिव-इन' में रह सकता है पति: SC

हादिया केस जैसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति-पत्नी की उम्र 21 साल से कम है तो दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं.

दरअसल यह मामला केरल का है जिसमें 19 साल की तुषारा और 20 साल के नंदकुमार ने पिछले साल शादी कर ली थी.

हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक लड़का 21 साल का नहीं था. शादी के बाद लड़की के पिता ने लड़के पर अपहरण का ममाला दर्ज करवाया. इसके बाद उन्होंने केरल हाईकोर्ट से शादी को रद्द करने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि शादी के वक्त  लड़के की उम्र 20 साल थी. इसलिए इस शादी को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया जाए. इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए इस शादी को रद्द कर दिया था और लड़की को उसके पिता के पास वापस भेज दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए के सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा, 'अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने के अधिकार को न तो कोई कोर्ट कम कर सकता है ना ही कोई व्यक्ति, संस्था या फिर संगठन. अगर युवक शादी के लिए तय उम्र यानी 21 साल का नहीं हुआ है, तो भी वह अपनी पत्नी के साथ 'लिव इन' में रह सकता है. यह पति-पत्नी पर निर्भर है कि वो शादी लायक उम्र होने पर दोबारा शादी करें या वैसे ही लिव-इन में रहें.'

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में कवर होता है लिव इन रिलेशनशिप

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संसद ने भी घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिलाओं के संरक्षण के प्रावधान तय कर दिए हैं. लिव इन रिलेशनशिप भी इस एक्ट में कवर होता है. कोर्ट ने कहा कि अदालत को मां की किसी भी तरह की भावना या पिता के अहंकार से प्रेरित एक सुपर अभिभावक की भूमिका नहीं निभानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दोनों हिंदू हैं और इस तरह की शादी हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत एक शून्य विवाह नहीं है.

इसके पहले हादिया मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसल को पलट दिया था. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हादिया और मुस्लिम युवक को बतौर पति-पत्नी साथ रहने की इजाजत दे दी थी.

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