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कलाम की प्रतिमा के पास भगवत गीता रखने से विवाद

कलाम के रिश्तेदारों ने कहा था, 'कुछ लोगों द्वारा बिना वजह का विवाद खड़ा किया जा रहा है

Bhasha Updated On: Jul 31, 2017 12:52 PM IST

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कलाम की प्रतिमा के पास भगवत गीता रखने से विवाद

पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम की प्रतिमा के पास उत्कीर्ण भगवत गीता रखे जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया जबकि उनके परिवार ने प्रतिमा के पास कुरान और बाइबल रखकर विवाद को शांत करने का प्रयास किया.

एक स्थानीय हिंदूवादी संगठन के नेता ने प्रतिमा के पास कुरान और बाइबल रखने पर इस आधार पर आपत्ति जताई कि इसके लिए 'कोई अनुमति नहीं ली गई.' कुछ घंटे बाद स्मारक के लिए तैनात अधिकारियों ने प्रतिमा के पास एक कांच के डिब्बे में बाइबल और कुरान रखी. स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई को किया था.

हिंदू मक्काल काची नेता के. प्रभाकरण ने यह दावा करते हुए पुलिस में यह शिकायत दर्ज कराई कि दोनों पुस्तकें (कुरान और बाइबल) अधिकारियों से अनुमति लिए बिना रखी गई. उन्होंने कहा, 'मैं इन पुस्तकों का सम्मान करता हूं. उन्हें (स्मारक में) बिना अनुमति के रखा जाना गलत है. यह देखने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए कि ऐसी चीजें फिर नहीं हों.'

वाइको की पार्टी एमडीएमके और पीएमके ने 15 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित स्मारक में वीणा बजाते कलाम की लकड़ी की प्रतिमा के बगल में उत्कीर्ण भगवत गीता रखे जाने की जरूरत पर सवाल उठाया था. स्मारक की डिजाइन और निर्माण डीआरडीओ ने किया है जिससे कलाम लंबे समय तक जुड़े रहे.

रिश्तेदारों ने कहा, ये बिना वजह का विवाद

कलाम के रिश्तेदारों शेख दाऊद और सलीम ने कहा था, 'कुछ लोगों द्वारा बिना वजह का विवाद खड़ा किया जा रहा है. डीआरडीओ अधिकारियों ने स्मारक के निर्माण के लिए काफी मेहनत की और प्रतिमा के पास भगवत गीता किसी (गलत) उद्देश्य से नहीं लगाई है. अब हमने प्रतिमा के पास दो पुस्तकें कुरान और बाइबल रख दी हैं.' उन्होंने कहा कि वे प्रतिमा के पास जल्द ही तमिल ग्रन्थ थिरुक्कल भी रखेंगे. उनके रिश्तेदारों ने कहा कि कलाम सभी भारतीयों के नेता थे और किसी को भी मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास नहीं करना चाहिए.

एमडीएमके के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी संस्थापक वाइको वहां भगवत गीता लगाने की जरूरत पर सवाल उठा चुके हैं जबकि कलाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी केवल थिरुक्कल का उल्लेख करते थे. पीएमके के एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर वहां पवित्र ग्रंथ की मौजूदगी पर सवाल उठाया और कहा कि कलाम भारत के सभी नागरिकों के लिए एक समान थे.

यहां कलाम के पैतृक गांव पेइकराम्बू में 15 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित स्मारक का उद्घाटन 27 जुलाई को कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.

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