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विदेश यात्रा के दौरान पासपोर्ट रद्द करने पर विचार करें केंद्र : हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा, 'सोचिए क्या होगा अगर विदेश यात्रा के दौरान एक नागरिक का पासपोर्ट रद्द कर दिया जाए

Updated On: Aug 22, 2017 04:14 PM IST

Bhasha

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विदेश यात्रा के दौरान पासपोर्ट रद्द करने पर विचार करें केंद्र : हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से उन नतीजों पर विचार करने का निर्देश दिया कि अगर भारतीय नागरिक का पासपोर्ट रद्द करने का आदेश दिया जाता है तो विदेश की यात्रा के दौरान ऐसे भारतीय नागरिकों को किन परेशानियों से गुजरना पड़ेगा.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने कहा कि अगर भारतीय नागरिकों का पासपोर्ट रद्द कर दिया जाता है तो वे इमिग्रेशन से नहीं गुजर पाएंगे जिससे वे भारत नहीं लौट पाएंगे.

कोर्ट ने कहा, 'सोचिए क्या होगा अगर विदेश यात्रा के दौरान एक नागरिक का पासपोर्ट रद्द कर दिया जाए. वह वापस नहीं लौट पाएगा. वह इमिग्रेशन से नहीं गुजर पाएगा.’ अदालत ने एक शादीशुदा जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. दंपति ने याचिका में 1995 में विदेश यात्रा के दौरान उनकी नागरिकता और पासपोर्ट रद्द करने को चुनौती दी है.

बाद में उनके पासपोर्ट को जब्त कर लिया गया और यह पूरी कार्रवाई उन्हें बगैर कोई नोटिस दिए की गई.

पासपोर्ट रद्द किए जाने के कारण दंपति किसी भी देश का नागरिक नहीं रहा और उन्हें शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग से शरणार्थी का दर्जा हासिल करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने कनाडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया और जो उन्हें मिल गई. अदालत ने कहा कि उसके पास नगा कार्यकर्ता और उसकी पत्नी जैसे दंपति की तरह कई अन्य मामले हैं जिसमें कारण बताओ नोटिस दिए बगैर पासपोर्ट रद्द कर दिए गए.

पीठ ने कहा, 'अपने (सरकार के) आचरण को देखिए. इन लोगों ने अपनी जिंदगी के 22 साल खो दिए.’ अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन से कहा कि पासपोर्ट रद्द करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया होनी चाहिए और अधिकारियों को प्रभावित लोगों के लिए ऐसे कदमों के नतीजों के बारे में संवेदनशील होने की जरुरत है.

अदालत की चिंताओं को शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचाने पर सहमति जताते हुए संजय जैन ने कहा कि मौजूदा ममाले में पीठ अपने आदेश में कह सकती है कि दंपति को भारतीय पासपोर्ट मिलने का अधिकार है और वे नागरिक बने रह सकते हैं.

उन्होंने ने कहा कि इसके बाद दंपति कनाडा वापस जा सकता है और वहां भारतीय उच्चायोग में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकता है तथा आवेदन देने के 12 सप्ताह के भीतर पासपोर्ट बन जाएगा.

उन्होंने कहा कि दंपति को उनकी कनाडा की नागरिकता भी छोड़नी होगी. अदालत ने दंपति के वकील से उसे कनाडाई नागरिकता छोड़ने की प्रक्रिया के बारे में सूचित करने के लिए कहा ताकि उसे उसके आदेश में शामिल किया जा सकें.

पीठ ने एएसजी से पूछा कि क्या कार्यकर्ता लुइंगम लुइथुई की पत्नी के खिलाफ कोई लुकआउट सर्कुलर है. याचिकाकर्ताओं के वकील ने इस संबंध में संदेह जाहिर किया.

दंपति की याचिका के अनुसार, उन्हें अपने परिवार से मिलने के लिए केवल पर्यटक वीजा पर भारत आने की अनुमति दी गई और वह भी तब जब कोई बीमार हो और अदालत के आदेश से ही वे भारत आ सकते हैं.

याचिका में उन्होंने जन्म से देश के नागरिक के तौर पर भारत में स्थाई आवास के अधिकार समेत उनके नागरिक अधिकारों को पूर्ण रूप से बहाल करने का अनुरोध किया है.

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