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योग्यता और क्षमता के आधार पर अपने नेता चुने कांग्रेस- अरुण जेटली

जेटली ने अपने संबोधन के बाद लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि दशकों तक देश का शासन चलाने वाली कांग्रेस पार्टी का भारत की वर्तमान जमीनी हकीकतों और आकांक्षाओं के साथ कोई तालमेल नहीं है

Bhasha Updated On: Oct 08, 2017 11:14 AM IST

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योग्यता और क्षमता के आधार पर अपने नेता चुने कांग्रेस- अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी अमेरिका यात्रा से पहले कांग्रेस पार्टी पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का ठोस स्वरूप में विस्तार होना तब तक संभव नहीं है, जब तक कि वह अपने नेताओं का चुनाव योग्यता और क्षमता के आधार पर नहीं करती. और अपनी मध्यमार्गी विचारधारा पर वापस नहीं लौटती.

नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैलिफोनिर्या यूनिवर्सिटी में इंडिया कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जेटली ने उक्त टिप्पणी की. गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले महीने ही यहां के विद्यार्थियों को संबोधित किया था.

राहुल ने तब एक सवाल के जवाब में कहा था कि वंशवाद की राजनीति भारत में एक समस्या है लेकिन उनकी पार्टी में शामिल ज्यादातर लोगों की कोई वंशानुगत पृष्ठभूमि नहीं है. अपने भाषण में राहुल ने राजनीतिक ध्रुवीकरण की भी आलोचना की थी.

केंद्रीय वित्त मंत्री एक हफ्ते की यात्रा पर सोमवार को अमेरिका पहुंचेंगे. इस दौरान वह न्यूयॉर्क और बोस्टन में अमेरिकी कॉर्पोरेट कंपनियों के साथ बैठक करेंगे तथा वॉशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में भाग लेंगे.

कांग्रेस की मध्यमांर्गी विचारधार नहीं है

जेटली ने अपने संबोधन के बाद लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि दशकों तक देश का शासन चलाने वाली कांग्रेस पार्टी का भारत की वर्तमान जमीनी हकीकतों और आकांक्षाओं के साथ कोई तालमेल नहीं है. ऐतिहासिक और परंपरागत रूप से कांग्रेस भारत में केंद्रीय स्थान में रही. वह दशकों तक इसी तरह रही और वह सत्ता की स्वाभाविक पार्टी थी.

जेटली ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में, यदि मैं कहूं, यह प्रक्रिया 2004 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के गठन के साथ शुरू हुई तथा जारी रही, और आज मैं पाता हूं कि ज्यादातर मुद्दों पर उनका अधिकांश रुख परंपरागत कांग्रेस पार्टी की मध्यमार्गी विचारधारा का नहीं है. कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर चुटकी लेते हुए जेटली ने कहा, वैचारिक एजेंडा है, जिस पर धुर वाम का प्रभाव है और कांग्रेस सिर्फ उनकी चीयर लीडर बनकर रह गयी है.

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