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जवानों के शव से बर्बरता: कांग्रेस बोली- PM पाक को दिखाएं 56 इंच का सीना

कांग्रेस ने मोदी सरकार से कहा कि वह अपनी नींद से जागे.

Bhasha Updated On: May 02, 2017 09:07 AM IST

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जवानों के शव से बर्बरता: कांग्रेस बोली- PM पाक को दिखाएं 56 इंच का सीना

पाकिस्तानी सेना ने अपनी बर्बरता का सबूत एक बार फिर पेश किया है. जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सोमवार को नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलीबारी में दो भारतीय जवानों शहीद हो गए थे. इनके शवों के साथ पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ने (बैट) बर्बरता की थी. बैट ने दोनों शवों को क्षत विक्षत कर दिया.

वहीं इस घटना के बाद अब कांग्रेस ने मोदी सरकार से कहा कि वह अपनी नींद से जागे. कांग्रेस ने साथ ही प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए नीति बनाते समय विपक्ष को भरोसे में लें. कांग्रेस ने पाकिस्तान या आतंकवाद से निपटने के लिए नीति या दिशा की कमी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और सवाल किया कि वह पाकिस्तान को अपनी 56 इंच का सीना कब दिखाएंगे.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हत्या की कड़ी निंदा की और इसे बबर्र और शर्मनाक कृत्य बताया. उन्होंने ट्वीट किया, सरकार को टिप्पणी से आगे बढ़ना चाहिए और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि ऐसे कायराना हमले किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं और पाकिस्तान के स्वयं के हित और सुरक्षा के हित में नहीं हैं.

उन्होंने सितम्बर 2016 के लक्षित हमले के बाद देश में आतंकवादी हमलों की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा नीत राजग सरकार पर उसकी कश्मीर नीति को लेकर हमला किया. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मई 2014 के बाद से जम्मू कश्मीर में 200 सैनिक शहीद हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यह सरकार क्या कर रही है और यह घटना देश में एक विश्वसनीय राजनीतिक नेतृत्व की कमी और इस संबंध में एक नीति या दिशा की कमी दिखाती है.

शर्मा ने पीएम मोदी से कहा कि वह अपनी चुप्पी तोड़ें और विपक्ष को इस मुद्दे पर और आतंरिक सुरक्षा पर विश्वास में लेकर कश्मीर पर एक नीति घोषित करें ताकि सीमापार से प्रायोजित आतंकवादी घटनाओं पर रोक लग सके. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री का दायित्व बनता है कि प्रमुख विपक्षी दलों के नेतृत्व को विश्वास में लें। प्रधानमंत्री को विपक्षी नेताओं के साथ बैठक करके उस नीति पर चर्चा करनी चाहिए जो कश्मीर में जो हो रहा है उसे नियंत्रित करने के लिए उनके दिमाग में है.

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