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डिनर डिप्लोमेसी मिशन 2019 ! सोनिया के घर 19 पार्टियों के नेताओं का जमघट

पूर्व कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी 10 जनपथ स्थित अपने आवास पर इस डिनर पार्टी की मेजबानी की

Updated On: Mar 13, 2018 10:46 PM IST

FP Staff

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डिनर डिप्लोमेसी मिशन 2019 !  सोनिया के घर 19 पार्टियों के नेताओं का जमघट

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र देश में बदलते समीकरणों के बीच विपक्ष बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश में जुटी है. इसी के तहत लोकसभा में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार को 'डिनर डिप्लोमेसी' के तहत तमाम दलों के मुखियाओं को रात के खाने के लिए बुलाया . पूर्व कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 10 जनपथ स्थित अपने आवास पर इस डिनर पार्टी की मेजबानी की.

सोनिया गांधी के इस डिनर में जिन 20 पार्टियों ने हिस्सा लिया उनमें राम गोपाल यादव ( समाजवादी पार्टी), बदरुद्दीन अजमल ( एआईयूडीएफ), शरद पवार (एनसीपी), तेजस्वी यादव (आरजेडी), मीसा भारती (आरजेडी), उमर अब्दुल्ला (नेशनल कांफ्रेंस), हेमंत सोरेन (जेएमएम), अजीत सिंह (आरएलडी), डी राजा (सीपीआई), मोहम्मद सलीम (सीपीएम), कनिमोझी (द्रमुक), कुट्टी (मुस्लिम लीग), सतीश चंद्र मिश्रा (बीएसपी), केरल कांग्रेस, बाबू लाल मरांडी (जेवीएम), रामचंद्रन (आरएसपी), शरद यादव (भारतीय ट्राइबल पार्टी), सुदीप बंधोपाध्याय (टीएमसी), जीतन राम मांझी ( हिंदुस्तान अवाम मोर्चा ), डॉ. कुपेंद्र रेड्डी ( जेडी-एस ), सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल, एके एंटोनी, रणदीप सुरजेवाला ( कांग्रेस ) शामिल हैं.

हालांकि कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पार्टी के बाद कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये मित्रता दर्शाने के लिए है और विपक्षी पार्टियों में एकता दर्शाने के लिए.

उन्होंने कहा, ' कांग्रेस का ये मानना है कि सरकार जहां दीवारें खड़ी करेगी वहां मित्रता और सौहार्द्र का रास्ता बनाएंगे.' उन्होंने यह भी कहा कि जब देश की सरकार संसद नहीं चलने देना चाहती है वहीं देश की समस्याओं को लेकर चिंतित विपक्ष का आपस में विचार विमर्श लाजिमी है.

2004 के बाद सोनिया गांधी को एक बार फिर से नेतृत्व की बागडोर अपने हाथ में लेने की जरूरत है. उन्हें क्षेत्रीय पार्टियों के आगे खुद को लीडर के तौर पर पेश करना ही होगा. सोनिया अपने बेटे राहुल गांधी को भी विपक्ष के नेता के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं. यह कांग्रेस के सम्मान और अस्मिता का सवाल है, जिसकी जिम्मेदारी एक बार फिर से सोनिया गांधी के कंधों पर है.

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