S M L

सीबीआई के नए निदेशक करेंगे रंजीत सिन्हा पर आरोपों की जांच

रंजीत सिन्हा पर कोयला घोटाले के संदिग्धों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Feb 02, 2017 09:12 AM IST

0
सीबीआई के नए निदेशक करेंगे रंजीत सिन्हा पर आरोपों की जांच

आलोक वर्मा ने सीबीआई के नए डायरेक्टर का चार्ज ले लिया है. सीबीआई डायरेक्टर का चयन करने वाली कोलेजियम ने पिछले सप्ताह ही आलोक वर्मा के नाम पर मुहर लगाई थी.

सीबीआई निदेशक बनते ही आलोक वर्मा को अपने ही विभाग के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच शुरू करनी की पहली जिम्मेदारी मिली है.

सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर रंजीत सिन्हा पर कोयला घोटाले के संदिग्धों से अपने घर पर मुलाकात करने और उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है. सीबीआई के इतिहास में यह पहली बार होगा कि जब किसी पूर्व डायरेक्टर के खिलाफ मामले की जांच सीबीआई का ही डायरेक्टर करेगा.

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आलोक वर्मा को सीबीआई के दो अधिकारियों का चयन कर एसआईटी को नेतृत्व करने के लिए कहा था.

एसआईटी इस बात का पता लगाएगी कि क्या पूर्व निदेशक और कोयला घोटाले के आरोपियों की मुलाकात के बाद जांच प्रभावित हुई या अभियोजन पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई थी.

आलोक वर्मा जांच के काम में केंद्रीय सर्तकता आयुक्त से भी मदद ले सकते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई निदेशक कोयला घोटाला मामले के विशेष अभियोजन अधिकारी आरएस चीमा से भी मदद ले सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने रंजीत सिन्हा के खिलाफ सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एमएल शर्मा की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद यह निर्देश जारी किया था.

RanjitSinha

शर्मा कमेटी ने पाया था दोषी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एमएल शर्मा की कमेटी ने जांच में पाया था कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी. साथ ही अपने आवास पर आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी.

कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि इन मुलाकातों से संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो.

सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा पर लगे पद के दुरुपयोग के आरोप की जांच का निर्देश देते हुए न्यायालय ने 14 मई 2015 के अपने आदेश का हवाला दिया था. इस आदेश में कोर्ट ने कहा था कि कि जांच अधिकारी या जांच दल की अनुपस्थिति में कोल ब्लॉक आवंटन मामले के आरोपियों से सिन्हा की मुलाकात पूरी तरह अनुचित है. शीर्ष न्यायालय ने 14 मई 2015 के आदेश में शर्मा से सिन्हा के आचरण की जांच करने को कहा था.

 

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
International Yoga Day 2018 पर सुनिए Natasha Noel की कविता, I Breathe

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi