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मध्य प्रदेश: डेयरी के बिजनेस में किस्मत आजमाएंगे शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान और उनका परिवार अब जल्द ही डेयरी के व्यवसाय में अपना भाग्य आजमाने जा रहा है. मुख्यमंत्री के विदिशा स्थित फार्म हाउस में इसकी तैयरियां अंतिम चरण में हैं

Dinesh Gupta Updated On: Nov 22, 2017 09:16 AM IST

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मध्य प्रदेश: डेयरी के बिजनेस में किस्मत आजमाएंगे शिवराज सिंह चौहान

मध्यप्रदेश की राजनीति में भाग्य के धनी और सफल नेता माने जाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनका परिवार अब जल्द ही डेयरी के व्यवसाय में अपना भाग्य आजमाने जा रहा है. मुख्यमंत्री के विदिशा स्थित फार्म हाउस में इसकी तैयरियां अंतिम चरण में हैं. अगले दो माह में दूध और उसके उत्पादों की बिक्री का काम शुरू हो सकता है. सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सड़क मार्ग से विदिशा पहुंचकर अपने नए प्रोजक्ट की प्रगति की समीक्षा की. उनकी धर्म पत्नी साधना सिंह भी साथ थीं.

डेयरी प्रोडक्ट के व्यवसाय के लिए सुंदर डेयरी प्रायवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई गई है. इस कंपनी में सीधे शिवराज सिंह चौहान शेयर होल्डर नहीं हैं. शेयर होल्डर में उनके दोनों पुत्र कार्तिकेय और कुणाल के नाम बताए जाते हैं. कार्तिकेय ने भोपाल के सबसे महंगे विट्टन मार्केट में फ्लावर शॉप खोली है. जिसका नाम सुंदर फ्लावर है. यहां बुके की कई वैरायटी हैं. फ्लावर विदिशा के फार्म से ही आते हैं.

मुख्यमंत्री चौहान के दूसरे पुत्र कुणाल यूएस में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. बताया जाता है कि डेयरी बिजनेस के लिए पांच करोड़ का फायनेंस राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) से कराया गया है. डेयरी के लिए पचास से अधिक गाय रविवार की रात बेंगलूरू से एक ट्रेन की बोगी में भरकर भोपाल लाई गईं. यहां उन्हें सड़क मार्ग से विदिशा भेजा गया. विदिशा के ग्राम निमखिरिया के पास मुख्यमंत्री का फॉर्म हाउस है.

फेल हो चुका है अनार की खेती का प्रयोग

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा ही खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात करते रहे हैं. जून में उन्हें अपने खेत पर लगी अनार की फसल को दाम न मिलने के कारण उजाड़ना पड़ा था. उन्होंने टमाटर मवेशियों को खिलाए थे. अनार का बगीचा नौ एकड़ में लगाया गया था.

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मुख्यमंत्री का फॉर्म हाउस लगभग सौ बीघा का है. यह प्रदेश का सबसे आधुनिक फार्म हाउस माना जाता है. मधुमक्खी का पालन भी होता है और शहद भी तैयार होती है. कई फलदार पौधे हैं. अनार की खेती फेल होने वजह काली मिट्टी की अधिकता होना बताया गया. खेती में घाटा होने के बाद शिवराज सिंह चौहान को डेयरी का धंधा मुनाफे का लगा है. डेयरी में 200 गाय रखे जाने की योजना है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

राज्य के उद्यानिकी राज्य मंत्री और मुख्यमंत्री के भरोसेमंद सूर्यप्रकाश मीणा के अनुसार सौ गाय की अगली खेप जनवरी के प्रथम सप्ताह में पहुंच जाएगी. पहली खेप से भोपाल आईं गायों की अगवानी करने के लिए ही मुख्यमंत्री विदिशा गए थे. उनके साथ वेटनरी विभाग के अफसरों की टीम भी थी.

इन गायों को रखने के लिए विशेष इंतजाम भी फॉर्म हाउस में किए गए हैं. गाय साहीवाल और गिर नस्ल की बताईं जातीं हैं. ये ठंडे वातावरण में ही अधिक दूध देतीं हैं. गाय के लिए एसी वाले शेड बनाए गए हैं. प्रशिक्षित डॉक्टरों की पूरी टीम देखरेख के लिए वहां तैनात कर दी गई है.

योगी आदित्यनाथ के पास भी हैं साहीवाल गाय

सूर्यप्रकाश मीणा के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इरादा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विदिशा जिले को अग्रणी जिले के रूप में स्थापित करने का है. वे कहते हैं कि इसी कारण यहां डेयरी फॉर्म खोला गया है. सूत्रों के अनुसार फार्म हाउस पर निकाले जाने वाले दूध के लिए तकनीकी सहयोग गुजरात की सहकारी क्षेत्र की नामी संस्था अमूल से लिया जा रहा है.

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बताया जाता है कि अमूल के मानकों के अनुसार और उसकी देखरेख में ही दूध निकाला जाएगा. दूध की पैकैजिंग का इंतजाम भी यहीं किया गया है. कोल्ड स्टोरेज भी बनकर तैयार है. गाय का दूध मशीनों से निकाला जाएगा.

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साहीवाल गाय दिन में तीन बार दूध देती है. बताया जाता है कि इस डेयरी के उत्पादन बाजार में नए ब्रांड के साथ उतारे जाएंगे. दही और श्रीखंड भी यहां तैयार होगा. इस गाय को डेयरी फार्मिग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसके दूध में प्रोटीन के मात्रा अधिक होती है. डेयरी बिजनेस के लिए यह गाय मुनाफे का सौदा मानी जाती है. मुख्यमंत्री के फार्म के लिए गिर की गाय भी खरीदी गईं हैं. यह एक बार में चालीस से साठ लीटर दूध देती है. भारत में गिर नस्ल की लगभग पांच हजार गाय ही बची हैं. एक साहीवाल गाय की कीमत चालीस से साठ हजार रूपए के बीच होती है.

पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने डेयरी क्षेत्र में कदम रखा

शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने खेती में आधुनिक तरीके तो अपनाए ही और डेयरी क्षेत्र में भी उतर रहे हैं. चौहान के पहले भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल गौर का पेशा वकालत रहा है. जबकि उमा भारती प्रवचन करतीं थीं. नब्बे के दशक में मुख्यमंत्री रहे सुंदरलाल पटवा का परिवार चार पहिया वाहनों का व्यवसाय करता था. जबकि कैलाश जोशी का परिवार राजनीतिक क्षेत्र में ही सक्रिय है.

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कांग्रेस शासनकाल में मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह राद्यौगढ़ रियासत से संबंध रखते हैं. लेकिन उनके पास भी ज्यादा जमीन नहीं है. मोतीलाल वोरा पेशे से पत्रकार थे. अर्जुन सिंह की भी खेती से कोई आमदनी नहीं थी. उन पर सीधे आरोप चुरहट लौटरी कांड में लगे थे. जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से डंपर कांड जुड़ा हुआ है.

मुख्यमंत्री ने डंपर खरीदकर जेपी गु्रप को किराए पर दिए थे. मामले की जांच लोकायुक्त द्वारा की गई. जांच रिपोर्ट में पद के दुरूपयोग के आरोप साबित नहीं हुए थे. जांच अधिकारी ने पाया कि मुख्यमंत्री ने डंपर फायनेंस कराए थे. मार्जिन मनी का भुगतान विदिशा की कुछ जमीन को बेचकर किया गया था. जमीन के खरीददार वर्तमान उद्यानिकी राज्य मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा थे.

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