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CJI महाभियोग: आज से दीपक मिश्रा की कोर्ट में नहीं जाऊंगा- कपिल सिब्बल

सिब्बल ने कहा, सीजेआई जब तक रिटायर नहीं हो जाते, तब तक उनकी कोर्ट में नहीं जाऊंगा. क्योंकि मैं अपने पेशे में नैतिकता के उच्चतम मानदंडों का पालन करता हूं

Updated On: Apr 23, 2018 10:16 AM IST

FP Staff

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CJI महाभियोग: आज से दीपक मिश्रा की कोर्ट में नहीं जाऊंगा- कपिल सिब्बल

पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है. पार्टी के नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वो आज यानी सोमवार से  जस्टिस दीपक मिश्रा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार कपिल सिब्बल ने कहा कि जब तक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रिटायर नहीं हो जाते, तब तक वो उनकी कोर्ट में नहीं जाएंगे. क्योंकि मैं अपने पेशे में नैतिकता के उच्चतम मानदंडों (हाई स्टैंडर्ड) का पालन करता हूं.

सिब्बल ने कहा कि मेरे अलावा 63 अन्य लोगों ने भी जस्टिस दीपक मिश्रा को उनके पद से हटाने की मांग की है. मैं अब सोमवार से सीजेआई की अदालत में नहीं जाऊंगा. सिब्बल ने कहा कि अगर सीजेआई दीपक मिश्रा रिटायरमेंट तक सुनवाई करेंगे तो यह मानकों के खिलाफ होगा.

पूर्व वित्त मंत्री और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम के सीजेआई के खिलाफ महाभियोग याचिका पर दस्तखत नहीं करने पर कहा कि सिब्बल ने कहा, पी चिदंबरम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है इसलिए इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने के लिए उनसे पूछा नहीं गया. सिब्बल ने कहा कि वो खुद चिदंबरम के वकील हैं, उन्हें इसका अफसोस है कि अब वो चिदंबरम का मुकदमा लड़ने के लिए सीजेआई की अदालत में नहीं पेश हो पाएंगे.

बता दें कि पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिम केस सीजेआई की अदालत में विचाराधीन है. वो अयोध्या राम मंदिर विवाद और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह मानहानि से जुड़े केस में भी वकील हैं.

सिब्बल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं करने को लेकर मीडिया में आई खबरों का भी खंडन करते हुए इसे मनगढ़ंत बताया.

कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों ने बीते शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए महोभियोग प्रस्ताव पेश किया था. वेंकैया नायडू अगर इस नोटिस को स्वीकार करते हैं तो प्रक्रिया के नियमों के अनुसार विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए उन्हें न्यायविदों की 3 सदस्यों की एक समिति का गठन करना होगा.

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