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रंजन गोगोई को CJI नियुक्त करने के खिलाफ SC में याचिका, बुधवार को सुनवाई

याचिकाकर्ता ने कहा है कि वे 12 जनवरी को शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के विवरण को आधार बना रहे हैं और एक कानूनी सवाल पर फैसला चाहते हैं

Updated On: Sep 25, 2018 09:53 PM IST

Bhasha

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रंजन गोगोई को CJI नियुक्त करने के खिलाफ SC में याचिका, बुधवार को सुनवाई

जस्टिस रंजन गोगोई को देश का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने याचिकाकर्ता आरपी लूथरा से कहा कि वह इस मामले में कोर्ट मास्टर के समक्ष मेमो दाखिल करें.

लूथरा ने इस याचिका का पीठ के समक्ष उल्लेख किया था. उन्होंने कहा कि कोर्ट को इस पर तत्काल सुनवाई की तारीख निर्धारित करनी चाहिए. पीठ ने कहा, ‘आप इंतजार कीजिए और देखिए. आप उल्लेख करने संबंधी मेमो दीजिए. हम इसे देखेंगे.’

लूथरा ने वकील सत्यवीर शर्मा के साथ दायर याचिका में कहा है कि वे 12 जनवरी को शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के विवरण को आधार बना रहे हैं और एक कानूनी सवाल पर फैसला चाहते हैं. यह प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जे चेलमेश्वर (अब रिटायर्ड) , जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने की थी.

जजों का पीसी करना न्याय प्रणाली को नुकसान पहुंचाने से कम नहीं

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता चीफ जस्टिस को लिखे गए बिना तारीख वाले पत्र और उसे शीर्ष अदालत के चार जजों द्वारा वितरित किए जाने को अपना आधार बना रहे हैं. याचिका के अनुसार चार वरिष्ठतम जजों का यह कृत्य देश की न्याय प्रणाली को नुकसान पहुंचाने से कहीं भी कम नहीं था. याचिका में कहा गया है कि उन्होंने देश में इस कोर्ट के चुनिंदा आंतरिक मतभेदों के नाम पर जनता में आक्रोश पैदा करने का प्रयास किया.

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता प्रतिवादी भारत सरकार और चीफ जस्टिस की उस कार्रवाई से आहत है, जिसकी वजह से जस्टिस रंजन गोगोई को उनके गैरकानूनी और संस्था विरोधी कृत्य के लिए प्रताड़ित करने की बजाय देश के चीफ जस्टिस के पद पर नियुक्ति के रूप में हुई है.

याचिका में कहा गया है कि भारत सरकार और चीफ जस्टिस का यह कृत्य गैरकानूनी और असंवैधानिक है क्योंकि न्यायपालिका का सर्वोच्च पद ऐसे व्यक्ति को सौंपा जा रहा है जो न्यायिक कदाचार और न्यायिक रूप से अयोग्यता का दोषी है. याचिका में जस्टिस रंजन गोगोई को तीन अक्टूबर से देश का नया प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने का आदेश निरस्त करने का अनुरोध किया गया है.

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