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राज्यसभा में आज पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में तनाव का माहौल

Citizenship amendment bill-असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में इस विधेयक का कड़ा विरोध हो रहा है. मणिपुर की राजधानी इंफाल के ईस्ट और वेस्ट जिले में एहतियातन 12 फरवरी तक धारा 144 लागू कर दी गई है. साथ ही यहां इंटरनेट सर्विस भी बाधित कर दी गई है

Updated On: Feb 12, 2019 10:25 AM IST

FP Staff

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राज्यसभा में आज पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में तनाव का माहौल

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में आज यानी मंगलवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पेश किया जा सकता है. विपक्षी पार्टियां और एनडीए के सहयोगी भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं. वहीं सरकार के पास बजट सत्र खत्म होने से पहले इस बिल को पास कराने का अंतिम मौका है.

लोकसभा ने इस विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान बीते आठ जनवरी को पारित कर दिया था. राज्यसभा में इसे मंजूरी मिलनी अभी बाकी है.

इंफाल ईस्ट और वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में धारा 144 लागू

इस बीच असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का कड़ा विरोध हो रहा है. सोमवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा. इंफाल के ईस्ट और वेस्ट जिले में एहतियातन 12 फरवरी तक धारा 144 लागू कर दी गई है. साथ ही यहां इंटरनेट सर्विस भी बाधित कर दी गई है.

मणिपुर में पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर हिंसा फैल गई थी और यहां तनाव का माहौल है. रविवार को यहां पुलिस के साथ हुई झड़प में दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने इस दौरान आक्रोशित महिलाओं की भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे थे.

Image Source: News18

(फोटो साभार: News18)

मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के CM ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर जताई आपत्ति

इससे पहले सोमवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध किया. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इस बिल को राज्यसभा में पारित नहीं करने की अपील की.

बीजेपी के इन दोनों मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री को आधे घंटे तक हुई इस बैठक में पूर्वोत्तर की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी जहां इस विधेयक के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है.

बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक के कानून बन जाने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय भारत में केवल छह साल रहने और बिना उचित दस्तावेजों के भी देश की नागरिकता मिल सकेगी.

(भाषा से इनपुट)

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