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शेल्टर होम्स पर NCPCR की रिपोर्ट ‘खौफनाक’, हम असहाय: सुप्रीम कोर्ट

इस मामले में अदालत की मदद कर रही वकील ने कहा कि शीर्ष न्यायालय का आदेश ‘न्यायिक सक्रियता’ नहीं हैं, क्योंकि शेल्टर होम्स में रह रहे बच्चों की बेहतरी अहम है

Updated On: Aug 28, 2018 10:31 PM IST

Bhasha

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शेल्टर होम्स पर NCPCR की रिपोर्ट ‘खौफनाक’, हम असहाय: सुप्रीम कोर्ट
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भारत में शेल्टर होम्स में बच्चों की स्थिति पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की रिपोर्ट को ‘खौफनाक’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलरवार को कहा कि वह ‘असहाय’ है, क्योंकि इस मामले में अधिकारियों को कोई निर्देश दिए जाने पर उसे ‘न्यायिक सक्रियतावाद’ करार दे दिया जाएगा.

शेल्टर होम्स पर एनसीपीसीआर की सोशल ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2,874 बाल शेल्टर होम्स में से सिर्फ 54 के लिए आयोग ने सकारात्मक टिप्पणी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 185 शेल्टर होम्स का ऑडिट किया गया उनमें से सिर्फ 19 के पास वहां रह रहे बच्चों का लेखा-जोखा था.

हम कुछ किए तो न्यायिक सक्रियतावाद के आरोप लगेंगे

जस्टिस एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यदि अदालत ने इस मामले में कुछ कहा तो उस पर ‘न्यायिक सक्रियतावाद’ के आरोप लगेंगे, भले ही अधिकारी अपना काम करने में ‘दिलचस्पी नहीं लें’ और सिर्फ ‘जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ें’ और इन आसरा घरों की स्थिति के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहें.

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यदि अधिकारियों ने ठीक से अपना काम किया होता तो बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए कांड जैसी घटनाएं नहीं होतीं. मुजफ्फरपुर में एक शेल्टर होम में कई लड़कियों से बलात्कार और उनके यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई है.

इस मामले में अदालत की मदद कर रही वकील अपर्णा भट ने कहा कि शीर्ष न्यायालय का आदेश ‘न्यायिक सक्रियता’ नहीं हैं, क्योंकि शेल्टर होम्स में रह रहे बच्चों की बेहतरी अहम है. पीठ ने उनसे कहा, ‘क्या आपने एनसीपीसीआर की रिपोर्ट देखी है? यह खौफनाक है.’ इस मामले में अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी.

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