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छत्तीसगढ़: बेटी को जन्म देने वाली मां का स्वागत ​ग्रीटिंग कार्ड से

कार्ड में बच्ची को बचाने और उसे आगे बढ़ाने का संदेश होता है और उसमे मां और बच्चे की तस्वीर होती है

Bhasha Updated On: Oct 14, 2017 05:30 PM IST

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छत्तीसगढ़: बेटी को जन्म देने वाली मां का स्वागत ​ग्रीटिंग कार्ड से

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बेटी के जन्म पर मां को आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड दे कर बधाई देने का रिवाज शुरू किया गया है. यहां सरकारी अस्पताल में बेटियों को जन्म देने वाली माताओं का स्वागत आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड से किया जाता है. मां की खुशी उस वक्त और बढ़ जाती है जब नवजात बच्ची के साथ महतारी-नोनी बोर्ड (मां-बेटी बोर्ड) पर उनकी तस्वीरें होती है.

रायगढ़ जिले की कलेक्टर शम्मी आबिदी ने बताया कि जिले में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत 62 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बेटी जन्म देने वाली मां का स्वागत ग्रीटिंग कार्ड से किया जाता है. जिला प्रशासन ने जिले में बालिकाओं के जन्म और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया है.

आबिदी ने बताया कि इस वर्ष अगस्त महीने में जिला प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चियों और मां के लिए रंगीन और आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड देना शुरू किया था. कार्ड में बच्ची को बचाने और उसे आगे बढ़ाने का संदेश होता है तथा उसमे मां और बच्चे की तस्वीर होती है.

निजी अस्पतालों में भी किया जाएगा लागू 

इसी तरह प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक महतारी नोनी बोर्ड लगाया जाता है. जिसमें एक माह तक मां और नवजात बच्ची की फोटो लगाई जाती है. अब इसे निजी अस्पतालों में भी करने पर भी विचार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों (प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों) में महिलाओं के संस्थागत प्रसव की संख्या 92 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई है.

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि रायगढ़ जिले में योजना शुरू होने के बाद लिंग अनुपात बेहतर हुआ है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में प्रति एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 947 थी, जो वर्ष 2014-15 में घटकर 918 रह गई थी.

जनवरी वर्ष 2015 को हरियाणा के पानीपत में शुरू की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले को शामिल किए जाने के बाद कई कदम उठाए गए. इसके फलस्वरूप वर्ष 2015-16 में प्रति एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या बढ़कर 928 और पिछले वर्ष 2016-17 में 936 हो गई है.

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