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छत्तीसगढ़ः सिपाही ने आदिवासी के 35 मुर्गे चुराए, हुआ सस्पेंड

पुलिसकर्मियों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुर्गे को उल्टा क्यों लटकाया

FP Staff Updated On: Mar 16, 2018 05:04 PM IST

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छत्तीसगढ़ः सिपाही ने आदिवासी के 35 मुर्गे चुराए, हुआ सस्पेंड

बस्तर में माओवादियों और पुलिस बीच संघर्ष लगातार जारी है. पुलिस स्थानीय आदिवासियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने का भरसक प्रयास कर रही है. आला अधिकारी इस बात पर जोर देते रहते हैं कि ग्रामीणों के साथ तालमेल बिठाकर ही इस समस्या को खत्म किया जा सकता है.

लेकिन निचले स्तर के पुलिसकर्मी उनकी उम्मीदों पर झटके में पानी फेर देते हैं. हाल ये है कि एक गरीब आदिवासी का 35 मुर्गा पुलिसकर्मी जबरन ले लेता है. उसे पैसे देने के बजाए, हड़का कर भगा देता है.

होली के दिन (2 मार्च) दूर गांव से एक आदिवासी मुर्गा बेचने शहर आ रहा था. त्यौहार का दिन था, सो मुर्गे की खपत ज्यादा थी. आदिवासी साइकिल के दोनों तरफ मुर्गा बांधे हुआ था. मुर्गे उलटे लटके हुए थे. एक सिपाही ने इस घटना को क्रूर बताते हुए आदिवासी को थाने ले आया. पुलिसकर्मियों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुर्गे को उल्टा क्यों लटकाया.

थोड़ी पूछताछ के बाद जब वो बाहर निकला तो उसके साइकिल में बंधे मुर्गे गायब थे. उसने पुलिस से शिकायत की. लेकिन पुलिस ने उसे झिड़क दिया और भगा दिया. घटना बस्तर जिले के बकावंड क्षेत्र की है.

फेसबुक पर ही एडीजी ने दिए जांच के ऑर्डर, दो सिपाही सस्पेंड 

ये बात बस्तर के एक स्थानीय अखबार के पत्रकार रितेश पांडेय के पास पहुंची. रितेश पांडेय ने उस आदिवासी को न्याय दिलाने की बात सोची. कोतवाली में फोन किया. लेकिन वहां पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है. इसके बाद रितेश ने सीधे जिले के आला अधिकारी को फोन मिलाया और कहा कि आदिवासी को न्याय मिलना चाहिए.

इसपर जिले के उस आला अधिकारी ने कहा कि 'भाषण न दो.' दूसरे दिन रितेश पांडेय ने अपने अखबार में छोटी सी खबर बनाई. बात आई-गई हो गई. एक हफ्ते तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. एक हफ्ते के बाद रायपुर में हिन्दुस्तान टाइम्स के पत्रकार रितेश मिश्रा ने फेसबुक पर इस घटना की जानकारी शेयर की.

इसे एडीजी आरके विज ने पढ़ा और फेसबुक पर ही इनक्वायरी ऑर्डर कर दी. उन्होंने बस्तर के एसपी डी श्रवण कुमार को फोन किया और कहा कि एक दिन के भीतर कार्रवाई चाहिए. जांच हुई, दो सिपाही शैलेंद्र सिंह और मुरली सोनकर सस्पेंड कर दिए गए. यही नहीं थानेदार 13 हजार रुपया लेकर गांव गए और उस आदिवासी को ससम्मान पैसा लौटाया.

घोर नक्सल प्रभावित बस्तर में जहां आला अधिकारी ग्रामीणों को मुख्यधारा में लाने को तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं. वहीं निचले स्तर के कर्मचारियों के ऐसी हरकतों की वजह से ग्रामीणों का फोर्स के प्रति विश्वास कम होता है.

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