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छत्तीसगढ़: पस्त नहीं हो रहे माओवादियों के हौसले, सुरक्षाबलों ने बरामद किया IED

सोमवार को भी छत्तीसगढ़ के सुकमा में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी

Updated On: Nov 13, 2018 03:06 PM IST

FP Staff

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छत्तीसगढ़: पस्त नहीं हो रहे माओवादियों के हौसले, सुरक्षाबलों ने बरामद किया IED

छत्तीसगढ़ चुनावों के पहले चरण के मतदान के बाद इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस की 40वीं बटालियन ने भारी मात्रा में IED बरामद की है. यह IED राजनंदगांव जिले के बाकरकट्टा में बरामद की गई है.

सोमवार को भी छत्तीसगढ़ के सुकमा में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई थी. इस गोलीबारी में 2 माओवादी मारे गए थे और उनसे 2 राइफल भी बरामद हुई थीं. यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छत्तीसगढ़ चुनाव के प्रथम चरण के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में वोटिंग कराई गई थी.

गौरतलब है कि नक्सली संगठन- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व में भी बदलाव की खबर मिली थी. खबरों के मुताबिक, नम्बला केशव राव को इस प्रतिबंधित संगठन का प्रमुख बनाया गया था. सूत्रों के मुताबिक, राव ने नक्सल-माओवादी आंदोलन का प्रमुख चेहरा और शीर्ष नेता व पार्टी महासचिव मुप्पला लक्ष्मण राव की जगह ली थी.

लक्ष्मण राव का एक और नाम गणपति भी है और यह शख्स अपने इसी नाम से ज्यादा मशहूर है. इस सिलसिले में विभिन्न सूत्रों से मिल रही खबरों की मानें तो गणपति ने अपने पद से इस्तीफा देकर नम्बला केशव राव उर्फ बासवराज के लिए जगह बनाई थी यानी केशव राव को इस प्रतिबंधित संगठन का नया प्रमुख बनाया था.

हालांकि, सीपीआई (माओवादी) ने इस सिलसिले में किसी तरह का औपचारिक ऐलान नहीं किया था, लेकिन उच्च स्तर के सूत्रों ने भी बासवराज को इस प्रतिबंधित संगठन के मुखिया के पद पर पदोन्नत किए जाने को लेकर पुष्टि कर दी थी. ऐसे में नक्सली हमले भी बढ़ने की आशंका जताई गई थी.

मतदान को प्रभावित करने के लिए पहले ही नक्सलियों ने कई प्रयास किए थे. मतदान के दौरान भी ऐसी कई घटनाएं सामने आई थीं. बीजापुर के पामेड़ इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच नक्सलियों को मार गिराया था. इस मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के तीन जवान भी जख्मी हो गए थे. हालांकि नक्सलियों की तमाम धमकियों के बावजूद जनता ने लोकतंत्र के महापर्व में जम कर हिस्सा लिया था.

लेकिन फिर भी माओवादियों के साथ सुरक्षाबलों का संघर्ष यह साबित करता है कि आने वाले चरण के चुनावों और उसके नतीजों पर माओवादी असर डाल सकते हैं. ऐसे में सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस बात का ध्यान रखना होगा कि माओवादी चुनाव को प्रभावित न कर सकें. इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही हर हालात से निपटने के लिए योजना भी बनानी होगी.

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