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आतंकियों का शव रस्सियों से बांधकर ले जाना एक प्रक्रिया: सेना

भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिम कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मेथसन ने कहा कि आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी.

Updated On: Sep 15, 2018 09:51 PM IST

Bhasha

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आतंकियों का शव रस्सियों से बांधकर ले जाना एक प्रक्रिया: सेना
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हाल ही में भारतीय सैनिकों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी के शव को रस्सियों से घसीट रहे हैं. जिसके बाद इस मुद्दे पर भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिम कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मेथसन ने कहा कि आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी ताकि उनके शरीर से बंधे विस्फोटकों और ग्रेनेड में होने वाले विस्फोट के खतरे से बचा जा सके .

मेथसन ने कहा, 'आतंकी अपने शरीर से विस्फोटक (आईईडी) और ग्रेनेड बांध लेते हैं. सैनिक जब उनके शवों को उठाते हैं तो उनके लिए हमेशा खतरा बना रहता है. आतंकियों के शवों को रस्सी से बांध कर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी, ताकि उन पर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट की घटना में बचाव हो सके.'

दरअसल, कुछ लोगों ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन करार दिया है. लेफ्टिनेंट जनरल मेथसन ने कहा कि इसका जवाब दिया जाना चाहिए कि देश की रक्षा के लिए लड़ रहे सैनिकों की जिंदगी ज्यादा मायने रखती है या आतंकवादियों के मानवाधिकार का मुद्दा.

समीक्षा करने का अधिकार

सेना में पुनर्गठन के सवाल पर सैन्य कमांडर ने कहा कि दुनिया भर की सेनाएं समय-समय पर अपनी समीक्षा करती हैं ताकि यह देखा जा सके कि उनका ढांचा संभावित खतरों से लड़ने के अनुकूल है या नहीं. उन्होंने कहा, 'प्रत्येक इकाई को अपनी समीक्षा करने का अधिकार है. एक अध्ययन का आदेश दिया गया था लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है. किसी को किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए.'

उन्होंने बताया कि हाइफा दिवस के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख बिपिन रावत जयपुर आएंगे. रावत यहां हाइफा मूर्ति के विमोचन कार्यक्रम में भी भाग लेंगे. इस्राइल में सौ साल पहले हाइफा शहर को तुर्कों के कब्जे से मुक्त करवाने में अपनी जान न्यौछावर करने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हाइफा दिवस मनाया जाता है. सौ साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम 23 सितंबर को यहां हो रहा है. मेथसन ने कहा कि बहुत कम भारतीय ही इस दिवस के बारे में जानते हैं लेकिन इस्राइल में हर साल इस दिवस को मनाते हैं.

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