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तेज हवाओं और धूल ने फिर बढ़ाया दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर

पिछेल दो-तीन दिनों से दिल्ली में कई जगहों पर हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है. यहां पर पीएम 2.5 की मात्रा 5 से 7 गुना तक अधिक हो गई है

Updated On: Jun 13, 2018 01:41 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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तेज हवाओं और धूल ने फिर बढ़ाया दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर एक बार फिर से कोहराम मच गया है. दिल्ली-एनसीआर में पिछले 24 घंटों में प्रदूषण का लेवल एक बार फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. मौसम के जानकारों का मानना है कि मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है. इस समय जो हवाएं चल रही हैं वह काफी तेज हैं और धूल भी उड़ा रही हैं. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है.

बता दें कि मंगलवार दोपहर से ही दिल्ली-एनसीआर के लोगों को एक बार फिर से धूल भरी आंधी और जहरीली हवा से सांस लेने में दिक्कतें आ रही हैं. धूल की परत 7 हजार से 15 हजार फीट तक फैल रही है. इसी कारण से आसमान साफ दिखाई नहीं दे रहा है.

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा है हवा का इंडेक्स

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के मुताबिक दिल्ली में हवा का इंडेक्स पिछले दो दिनों से 290 पार है. गाजियाबाद, गुरुग्राम और नोएडा में भी हवा का इंडेक्स 310 के पार चल रही है.

मौसम में आए अचानक इस बदलाव के बाद सांस के मरीजों को खासकर बहुत परेशानी झेलनी पड़ सकती है. दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों को भी मास्क पहन कर गाड़ी चलाने की हिदायत दी जा रही है. मौसम के जानकारों का मानना है कि बारिश होने से ही अब प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है.

मौसम पर काम करने वाली संस्था स्काईमेट के अनुसार इस समय राजस्थान और राजस्थान से सटे पाकिस्तान बोर्डर पर भयंकर लू चल रही है. भयंकर लू चलने से तापमान के स्तर में 3 से 5 डिग्री तक की तेजी आ गई है. दूसरी तरफ हवा भी तेज चल रही है. हवा के तेज चलने से धूलकण काफी ऊपर तक पहुंच गई है.

लिहाजा इस समय पूर्वी राजस्थान, हरियाणा और पूरे दिल्ली-एनसीआर में धूल की परत हवा में देखने को मिल रही है. स्काईमेट के अनुसार यह स्थिति मॉनसून से पहले बारिश की कमी और गर्म हवाओं की वजह से बनती है.

प्रदूषण के कारण हजारों का नुकसान

बता दें कि पिछले कुछ सालों से दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं. दिल्ली के सड़कों पर रोजाना ट्रैफिक, जाम और प्रदूषण को देखते हुए कई कदम उठाए गए हैं. हाल के दिनों में दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या एक करोड़ को पार कर गई है. एक रिकॉर्ड के अनुसार दिल्ली में हर साल 60 हजार करोड़ रुपए का नुकसान प्रदूषण के कारण होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनेजेशन के अनुसार दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली-एनसीआर का नाम आता है.

मानकों के तहत हवा में ओजोन का स्तर 100 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) से अधिक नहीं होना चाहिए. दिल्ली-एनसीआर में इस वक्त ओजोन का औसतन स्तर 275 के करीब है. खासकर शाम के वक्त वाहनों से निकल रहे प्रदूषण से हवा और जहरीली हो जाती है.

दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदूषण के स्तर में धूल भरी आंधी और वाहनों की वजह से प्रदूषण के स्तर में काफी बढ़ोतरी हो रही है. वहीं मौसम पर काम करने वाली कुछ संस्थाओं का मानना है कि फॉरेन ट्रेड की वजह से ही सबसे ज्यादा प्रदूषण देश में फैलता है, जिसकी रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट 14 अक्टूबर 2003 को एक लैंडमार्क जजमेंट दिया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया है. देश में सबसे ज्यादा कचरा विदेशी डंपिग के कारण होती है.

पर्यावरण पर काम करने वाली कई सरकारी और गैरसरकारी एजेंसियों का साफ कहना है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा सांस लेने के लायक नहीं है. बीमार तो बीमार स्वस्थ लोगों के लिए भी यह हवा जानलेवा है. एक रिसर्च वेबसाइट इंडिया स्पेंड के मुताबिक पिछले साल 8 अक्टूबर के बाद से ही वायु की गुणवत्ता का स्तर कई बार खराब स्तर और बहुत खराब स्तर पार कर चुकी है.

पिछले दो-तीन दिनों से दिल्ली में कई जगहों पर हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है. यहां पर पीएम 2.5 की मात्रा 5 से 7 गुना तक अधिक हो गई है. इस समय दिल्ली के कई क्षेत्र में हवा सामान्य से 5 गुना तक अधिक प्रदूषित हो गई है. खास तौर से पीएम 2.5 का बढ़ता स्तर इस समय चिंताजनक बना हुआ है.

भारत में राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पीएम-2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि पीएम-10 के लिए यह स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए.

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