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पत्नी को मेंटनेंस देने पति 24,600 रुपए के सिक्के लेकर पहुंचा

कोर्ट में इतने सिक्के देखकर सब हैरान हो गए. इन सिक्कों को गिनने के लिए कोर्ट को वक्त और स्टाफ की कमी हो गई

Updated On: Jul 25, 2018 10:19 PM IST

FP Staff

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पत्नी को मेंटनेंस देने पति 24,600 रुपए के सिक्के लेकर पहुंचा

चंडीगढ़ की जिला अदालत में एक मामले की सुनवाई के दौरान अजीब स्थिति तब बन गई, जब पेशे से एक वकील एक व्यक्ति ने हर्जाने की रकम सिक्कों में अदा की. उसे 24 हजार 600 रुपये देने थे. कोर्ट में इतने सिक्के देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए. कोर्ट ने सिक्कों की गिनती के लिए मामले में अगली तारीख लगा दी. अब 27 जुलाई को सिक्के गिने जाएंगे.

ये है मामला

एक वकील और उनकी पत्नी के बीच तलाक का केस चल रहा है. इस केस में चंडीगढ़ की ज़िला अदालत ने वकील को आदेश दिया कि दो महीने का खर्च पत्नी को दे. इस आदेश के बाद वकील ने जो किया, उसने सभी को हैरान कर दिया. वकील ने पत्नी को हर्जाने के रूप में ‘पैसे’ ही दिए. जी हां, खर्च की सारी रकम 24,600 रुपये थी, जिसे वकील सिक्कों के रूप में कोर्ट में ले आया.

पत्नी ने किया सिक्के दिए जाने का विरोध

जिला अदालत में एडीजे रजनीश कुमार शर्मा की कोर्ट में मामले की सुनवाई थी. कोर्ट के आदेशानुसार, इस वकील को मेंटेनेंस के तौर पर अपनी पत्नी को दो महीने के 24600 रुपये देने थे. कोर्ट के आदेशानुसार, वकील ने हर्जाने के तौर पर 24600 रुपये सिक्कों के रूप में दिए. अदालत में पत्नी ने सिक्के के रूप में भुगतान किये जाने पर विरोध किया.

सिक्के गिनने के लिए पड़ गई स्टाफ की कमी

इतने सिक्के देखकर कोर्ट में सभी हैरान रह गए. सिक्कों की गिनती के लिए कोर्ट को समय और स्टाफ की कमी पड़ गई. जिसके बाद एडीजे रजनीश कुमार शर्मा ने इस मामले में तीन दिन का समय और दे दिया. इस मामले की अगली तारीख़ 27 जुलाई को है. तभी सिक्के गिने जाएंगे. अदालत में वकील ने कहा कि उसके पास सिर्फ इतने ही पैसे हैं और यह भी वह मांगकर, इकट्ठे करके लाया है.

2014 में हुई थी शादी

महिला ने कहा कि उसके पति के मन में उसके लिए कभी इज़्ज़त नहीं थी, जिसका सबूत सबके सामने है. महिला ने कहा कि उसका पति पेशे से वकील है. कई बड़े लोग उसके क्लाइंट हैं, इसलिये उसके पास रुपयों की कोई कमी नहीं है. वह परेशान करने की नीयत से अदालत में इतने सिक्के लाया है. महिला ने बताया कि 8 फरवरी 2014 को उसकी शादी हुई थी. शादी के दो महीने बाद ही पति ने उसको घर से बहार निकाल दिया. मई 2014 को पति ने ज़िला अदालत में ज्यूडिशियल सेपरेशन की याचिका दायर की थी लेकिन एक साल बाद खुद ही वापस ले ली. इसके बाद अक्टूबर 2015 में पति ने तलाक के लिए केस दर्ज कर दिया. इस पर महिला ने मेंटेनेंस के लिए अदालत में अर्ज़ी दी थी, जो मंज़ूर हो गई.

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