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इतना सुरक्षित! ब्रह्मांड खत्म हो जाएगा लेकिन आधार डेटा रहेगा अभेद

सुप्रीम कोर्ट में आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है, इसी दौरान यूआईडीएआई सीईओ ने ये बातें कहीं

FP Staff Updated On: Mar 23, 2018 04:57 PM IST

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इतना सुरक्षित! ब्रह्मांड खत्म हो जाएगा लेकिन आधार डेटा रहेगा अभेद

आधार की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने गुरुवार को कहा कि आधार का बायोमेट्रिक डेटा किसी से शेयर नहीं किया जाता है. यह 2048 बिट के साथ एनक्रिप्टेड है. अगर कोई इसे हासिल करने की कोशिश करता है तो ब्रह्मांड खत्म हो जाएगा लेकिन दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर भी आधार बायोमेट्रिक को भेद नहीं पाएगा.

उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक कभी किसी को दिया नहीं जाता. हमारे सॉफ्टवेयर में जैसे ही कोई सेव बटन दबाता है, वैसे ही सारे डेटा 2048 बिट एनक्रिप्टेड-की पर चले जाते हैं. इस 'की' को तोड़ने के लिए दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर भी एक युग से ज्यादा का समय लेगा.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. इस पांच सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जस्टिस सिकरी ने पांडेय से पूछा कि जब बायोमेट्रिक आपके पास पहुंच जाता है, तब यह एनक्रिप्टेड हो जाता है लेकिन अगर आधार इनरोलमेंट सेंटर पर कोई प्राइवेट पार्टी इसे कैप्चर कर लें तब का क्या. इसके जवाब में पांडेय ने कहा कि नहीं, ऐसा नहीं हो सकता.

जस्टिस खानविलकर ने कहा कि कई आरोपों में कहा गया था कि जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था वह विदेशी था. ऐसे में डेटा का गलत हाथों में जाने का डर है.

इसके जवाब में यूआईडीएआई अधिकारियों ने कहा कि बायोमेट्रिक मैचिंग के लिए जिन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया वो दुनिया के तीन सबसे अच्छी कंपनीयों के थे. अधिकारियों ने कहा कि यह इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी है और कंपनियां किसी से सोर्स कोड शेयर नहीं किया करती हैं.

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