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दागी उम्मीदवारों की सदस्यता पर SC से बोली सरकार, पॉलिसी मैटर में दखल न दे कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि अगर किसी विधायक या सांसद पर आरोप तय होता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जाए

Updated On: Aug 28, 2018 09:06 PM IST

Bhasha

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दागी उम्मीदवारों की सदस्यता पर SC से बोली सरकार, पॉलिसी मैटर में दखल न दे कोर्ट
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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक के मामले में कहा कि इनकी सदस्यता रद्द करने का आदेश न दिया जाए. क्योंकि कई मामलों में आरोपी नेता बरी हो जाते हैं. इसलिए इन्हें राजनीतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि अगर किसी विधायक या सांसद पर आरोप तय होता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जाए. इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया था कि गंभीर अपराध में सजा पाए व्यक्ति और जिस व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय हो जाए, तो ऐसे नेता या व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इजाजत न मिले.

न्यायशास्त्र के अनुसार कोई व्यक्ति दोष सिद्ध न होने तक निर्दोष होता

अटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए इसका विरोध किया. अटॉर्नी जनरल ने अपनी दलील में कहा, 'न्यायशास्त्र के अनुसार कोई व्यक्ति दोष सिद्ध न होने तक निर्दोष होता है, यह एक लंबी प्रक्रिया है. इसलिए कोर्ट को इस तरह के आदेश जारी नहीं करने चाहिए.'

अटॉर्नी जनरल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सुझाव को नकार दिया जिसमें रेप, हत्या और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराधों के तहत सजा प्राप्त व्यक्ति और जिस व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय हो जाए उसके खिलाफ राजनीतिक दलों को निर्देश जारी करने के बारे में कहा गया था.

74 फीसदी मामलों में बरी हो जाते हैं आरोपी

अटॉर्नी जनरल ने लगभग 74 फीसदी मामले में लोग बरी हो जाते हैं. इसलिए यह पॉलिसी मैटर है और कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए. सुनवाई के दौरान जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा कि कई मामले झूठी शिकायतों पर आधारित होते हैं. ऐसे में बहुत सारे लोग बरी हो जाते हैं.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि है और उसके खिलाफ रेप, हत्या और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराध में आरोप तय होते हैं तो उसे किसी राजनीतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने से रोका जाए.' वहीं, चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी में ये भी कहा कि हम कानून की बात नहीं कर रहे हैं और न ही राजनीतिक पार्टियों की मान्यता के बारे में सुनवाई कर रहे हैं.

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