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आतंक से निपटने में कितनी कारगर साबित हो रही है सरकार की रणनीति

सरकार के दस्तावेजों से पता चलता है कि आतंकी गतिविधियों के लिए आने वाले फंड पर अंकुश लगाने के प्रस्ताव में मसले पर चार बिंदुओं के अंतर्गत विचार किया गया है.

Updated On: Oct 24, 2018 08:49 PM IST

Yatish Yadav

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आतंक से निपटने में कितनी कारगर साबित हो रही है सरकार की रणनीति
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सरकार आंतरिक सुरक्षा बजट में सुरक्षा संबंधी व्यय की टेक पर आतंकवाद से निबटने के मद में होने वाले खर्चे के लिए एक सहयोगी नीति बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस नीति के अंतर्गत एक कार्यक्रम का प्रस्ताव है. आतंकवाद से निबटने तथा चरमपंथ के उभार को रोकने के मद में केंद्रीय तथा प्रांतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा होने वाला खर्च इस कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल है. साथ ही सुरक्षा संबंधी खरीद के लिए खरीदारी की नीति में बदलाव करने और संबंधित प्रौद्योगिकी की बेंचमार्किंग को भी कार्यक्रम के दायरे में रखा गया है जिसमें खुफिया ब्यूरो (आईबी) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) सत्यापन के नोडल विभाग की भूमिका निभाएंगे.

फ़र्स्टपोस्ट को हासिल दस्तावेजों से पता चलता है कि गृहमंत्रालय ने दो केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को प्रस्तावित कार्यक्रम की एक रूपरेखा तैयार करने को कहा है. इसमें राज्यों को भी जोड़ा गया है. उन्हें सुरक्षा बलों के सालाना टेक्नॉलॉजी ऑडिट की व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी है.

सूत्रों के मुताबिक ऐसी तैयारी के पीछे सोच ये है कि आतंकवाद की घटनाओं से निबटने  में हर राज्य समान रूप से ताकतवर हो और पूरे देश में आतंकी गतिविधियों के खिलाफ मोर्चाबंदी मजबूत और असरदार हो सके. देश के अंदरुनी हिस्सों में आतंकवाद अपने कई चेहरों के साथ मौजूद है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है. आतंकी तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने के लिए कई किस्म के तरीके अपनाते हैं. उन्हें अपने काम को अंजाम देने में ज्यादा लागत भी नहीं आती क्योंकि वे स्लीपर सेल का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सुरक्षा एजेंसी पूरी तरह से मुस्तैद ना हो तो उसे अपने काम में ज्यादा मुश्किल पेश आती है.

सस्ती, सुविधाजनक और तेजी से काम करने वाली टेक्नालॉजी की मांग बढ़ती जा रही है. राज्यों की पुलिस अपने स्पेशल ब्रांच की जरूरत के हिसाब से सायबर टूल्स और जेलों में लगाए जाने वाले जैमर खरीद सके, इसे ध्यान में रखते हुए विशेष फंड का प्रावधान किया गया है. जिन जेलों को संवेदनशील माना गया है वहां निगरानी की व्यवस्था में सुधार और बदलाव में यह फंड मददगार होगा.'

पंजाब में पठानकोट के इंडियन एयर फोर्स बेस पर आतंकी हमले के बाद भारतीय सैनिकों का चाक-चौबंद (REUTERS)

तस्वीर: प्रतीकात्मक

दिशानिर्देश बनाने के एक और प्रस्ताव पर विचार चल रहा है. यह दिशानिर्देश सायबर जगत और वास्तविक दुनिया दोनों ही जगहों पर अंडरकवर ऑपरेशन को पहले की तुलना में ज्यादा कानूनी सुरक्षा प्रदान करने से जुड़ा है. इसे अमेरिका जारी चलन के हिसाब से तैयार किया जाना है. अंडरकवर ऑपरेशन को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने का प्रस्ताव 2015 में आया था लेकिन कई वजहों से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.

सरकार नेशनल इन्क्रिप्शन पॉलिसी बनाने पर भी विचार कर रही है. इससे कानून लागू करने का जिम्मा संभाल रही एजेंसियां इन्क्रिप्टेड संचार चैनलों तक पहुंच बना सकेंगी. टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल्स को शेयर करने के लिए जिस फॉरमेट का उपयोग करते हैं उसे मानकीकृत करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं.

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित बदलावों में महाराष्ट्र पुलिस की आतंकरोधी रणनीति की कुछ बातों की मदद ली जाएगी. महाराष्ट्र पुलिस ने 26/11 की मुंबई आतंकी हमले के बाद एलिट कमांडो ‘फोर्स वन’ तैयार किया था. एनटीआरओ तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में राज्यों की मदद करेगा और नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड राज्यों के विशेष सुरक्षाबलों को समेकित (इंटीग्रेटेड) डेटाबेस मुहैया कराएगा.

नेशनल पुलिस अकादमी पुलिसकर्मियों को विशेष तथा भाषा संबंधी प्रशिक्षण देगी. कौशल बढ़ाने का प्रशिक्षण केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से दिया जायेगा. हथियारों और उपकरणों के मानकीकरण के लिए भी सहायता मुहैया करायी जायेगी.

देश में केंद्रीय स्तर पर आतंकरोधी कानूनों को अमल में लाने का जिम्मा नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) का है और एनआईए ने आतंकी गतिविधियों के मामले में राज्यों की पुलिस से अपने अनुभवों का साझा करने के लिए विशेष पाठ्यक्रम चलाने की पेशकश की है.

सूत्रों ने कहा, 'हमलोग नोडल हेल्पडेस्क की मांग आई है और हमलोग इसके बारे में भी विचार कर रहे हैं. यह डेस्क चौबीसों घंटे काम करेगा और व्हाट्सएप तथा अन्य इन्स्टैंट मैसेजिंग एप्लीकेशन कंपनियों के संदेशों को लेकर मांगी जाने वाली जरूरी जानकारी राज्यों में कानून लागू करने का जिम्मा निभा रही एजेंसियों को मुहैया कराएगा.'

सूत्रों ने यह भी बताया कि आतंकी गतिविधियों को चलाए रखने के लिए जो फंड आ रहा है उसपर कारगर तरीके से अंकुश लगाना एक बड़ी चुनौती है और प्रस्तावित बदलावों में उन पहलकदमियों की तरफ ध्यान दिया जाएगा जो केंद्रीय स्तर से की जानी चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि आतंकी गतिवधियों के लिए होने वाली फंडिंग को लेकर चर्चा मुख्य रुप से, 'दो बिंदुओं पर केंद्रित होती है. इसमें एक पक्ष डिजिटाइजेशन से पहले के दौर में अपनाए जाने वाले तरीकों से संबंधित है. हवाला और जाली नोट ऐसे ही तरीकों के उदाहरण हैं जबकि क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) और पूर्वी युरोप, पश्चिम अफ्रीका तथा रूसी ठिकानों से आने वाले कूटबद्ध संदेशों तक पहुंच बनाने के लिए नई तकनीक का उपयोग डिजिटाइजेशन के बाद के दौर में अपनाये जाने वाले तरीके का उदाहरण है.'

सरकार के दस्तावेजों से पता चलता है कि आतंकी गतिविधियों के लिए आने वाले फंड पर अंकुश लगाने के प्रस्ताव में मसले पर चार बिंदुओं के अंतर्गत विचार किया गया है. इनके नाम हैं: बुनियादी ढांचे की तैयारी, मानव संसाधन का विकास, साझेदारी और समन्वय के प्रयास तथा सायबर-संसार संबंधी जागरुकता अभियान. केंद्र ने राज्यों से हैदराबाद, गांधीनगर, कोलकाता तथा चंडीगढ़ के सायबर फोरेंसिक लैबोट्रिज की सेवाओं का इस्तेमाल करने को कहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रस्ताव में कहा गया है कि आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए होने वाली फंडिंग पर रोक लगाने की दिशा में बहुत कुछ किया जाना शेष है क्योंकि इससे जुड़ी तैयारियों के मामले में पुलिस अभी कई मोर्चों पर पीछे है.

सरकारी दस्तावेज में कहा गया है, 'रवैये में बदलाव की जरूरत है. प्रतिक्रिया में कदम उठाने की जगह पहले से सक्रियता दिखाते हुए पहलकदमी करने, मसले से जुड़े सभी पक्षों को एकजुट करने के लिए उनके बीच बेहतर तालमेल कायम करने, बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी क्षमता का विकास करने, संसाधन और कौशल के विकास तथा संबंधित कानून और नियमन के फ्रेमवर्क की समीक्षा कर सहायक माहौल बनाने की जरूरत है.'

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