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गृह मंत्रालय के मुताबिक घाटी में नहीं है ISIS के आतंकी

हालांकि जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एस पी वैद्य ने श्रीनगर में कहा कि अब यह साफ है कि आईएसआईएस ने हमले को अंजाम दिया था

Updated On: Feb 27, 2018 08:08 PM IST

Bhasha

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गृह मंत्रालय के मुताबिक घाटी में नहीं है ISIS के आतंकी

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की मौजूदगी से इनकार करते हुए मंगलवार को कहा कि घाटी में इसका कोई वजूद नहीं है. गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘घाटी में आईएस का कोई भौतिक बुनियादी ढांचा या सदस्य नहीं है. घाटी में इसका वजूद नहीं है.’

केंद्र सरकार ने यह टिप्पणी तब की है जब आईएस ने रविवार को जम्मू-कश्मीर में फारूक अहमद यातू नाम के एक पुलिसकर्मी की हत्या की जिम्मेदारी ली. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा पुलिसकर्मी पर हमले के पीछे हो सकता है. और एशा फजली नाम का एक स्थानीय आतंकवादी इस मामले में मुख्य संदिग्ध के तौर पर उभरा है. फजली पहले हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था और बाद में उसने लश्कर-ए-तैयबा के प्रति अपनी वफादारी जताई थी.

हालांकि जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एस पी वैद्य ने श्रीनगर में कहा कि अब यह साफ है कि आईएसआईएस ने हमले को अंजाम दिया था और यह ‘वास्तव में चिंताजनक संकेत है.’

आईएसआईएस के झंडे के साथ वायरल हुई थीं तस्वीरें

नवंबर 2017 में ऐसी खबरें थी कि आतंकवादी संगठन आईएसआईएस श्रीनगर में सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में शामिल रहा है. जिसमें मुगीस नाम का एक आतंकवादी मारा गया था. और इमरान टाक नाम का एक सब-इंस्पेक्टर शहीद हुआ था. जिसकी जिम्मेदारी आईएसआईएस की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ‘अमक’ ने ली थी।

दरअसल आईएसआईएस के झंडे के साथ मुगीस की तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए सामने आई थीं. जिनमें दफनाए जाने के समय उसका शव आतंकवादी संगठन के झंडे में लिपटा हुआ था.

तहरीक-उल-मुजाहिदीन का कमांडर था मुगीस 

बहरहाल, सुरक्षा अधिकारियों ने उस वक्त दावा किया था कि मुगीस तहरीक-उल-मुजाहिदीन नाम के एक चरमपंथी संगठन से संबंध रखता है और पुलवामा जिले में इस संगठन का कमांडर था. तहरीक-उल-मुजाहिदीन 1990 के दशक के शुरुआती वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पैर पसारने के वक्त सामने आए शुरुआती आतंकवादी संगठनों में से एक है. अधिकारियों के मुताबिक इस संगठन के सदस्यों की संख्या काफी कम है और वह हथियारों की कमी का भी सामना कर रहा है.

उन्होंने कहा कि तहरीक-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन की स्थापना से बहुत पहले स्थापित हो चुका था. मुगीस के मारे जाने के बाद आदिल अहमद को पुलवामा में संगठन का कमांडर नियुक्त किया गया था.

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