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राम सेतु की रक्षा करेगी सरकार, सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट से नहीं होगा नुकसान: केंद्र

भारत सरकार ने साफ किया है कि वो राष्ट्र हित में अपने सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी

FP Staff Updated On: Mar 16, 2018 01:29 PM IST

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राम सेतु की रक्षा करेगी सरकार, सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट से नहीं होगा नुकसान: केंद्र

भारत सरकार ने साफ किया है कि वो राष्ट्र हित में अपने सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी. मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में ये बात कही गई.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में उन्होंने भारत सरकार की सेतु समुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट से राम सेतु को संभावित नुकसान का मुद्दा रखा था. अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वो राष्ट्र हित को ध्यान में रखते हुए वो राम सेतु को कोई नुकसान न पहुंचे इसका ख्याल रखेगी.

मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग की ओर से फाइल किए गए एफिडेविट में कहा गया कि 'भारत सरकार राष्ट्र हित को ध्यान में रखते हुए राम सेतु को कोई नुकसान पहुंचे, इसके लिए सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के पुराने प्रस्ताव के दूसरे विकल्पों पर विचार करेगी.'

भारत सरकार ने 1990 में सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा था. और इस प्रोजेक्ट के व्यवहार्ता अध्ययन के आदेश दिए गए.

1997 में सरकार ने प्रोजेक्ट की शुरूआत करने का निर्णय लिया लेकिन पूरा प्रोजेक्ट 2005 तक फाइनल हो पाया. इस प्रोजेक्ट के पीछे सरकार का लक्ष्य जहाजों की यात्रा को 350 नॉटिकल मील कम करके लगने वाले समय को 10-13 घंटे तक कम करना था. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत और श्रीलंका में 13 छोटे बंदरगाह और कई फिशिंग हार्बर बनाने की योजना थी.

लेकिन बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने धार्मिक भावनाओं से जुड़े राम सेतु को नुकसान पहुंचने की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके इसके लिए राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की थी.

एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाने वाला राम सेतु समुद्र के अंदर लाइमस्टोन से बनी हुई एक पुल जैसी रचना है, जो रामेश्वर के पास के पाम्बान द्वीप के पास लेकर श्रीलंका के उत्तरी तट के पास स्थित मन्नार द्वीप तक फैला हुआ है.

इस रचना को लेकर भूविज्ञान में बहुत सी व्याख्याएं की गई हैं लेकिन भारत में हिंदूओं का इस बारे में पौराणिक मत है. हिंदू मानते हैं कि भगवान श्री राम लंका (आज के श्रीलंका) के राजा से लड़ाई के लिए अपनी वानर सेना की ओर से बनाए इस पत्थरों के पुल को पार किया था.

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