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मॉडरेशन नीति को लेकर जारी है खींचतान, CBSE कर सकता है सुप्रीम कोर्ट का रुख

CBSE मॉडरेशन नीति जारी रखने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है.

Updated On: May 25, 2017 07:02 PM IST

FP Staff

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मॉडरेशन नीति को लेकर जारी है खींचतान, CBSE कर सकता है सुप्रीम कोर्ट का रुख

सीबीएसई बोर्ड के करीब 1.5 करोड़ बच्चों की किस्मत मॉडरेशन नीति को लेकर चली आ रही उथल-पुथल के बीच झूल रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया पर छपी खबर के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) मॉडरेशन नीति जारी रखने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है.

मिली जानकारी के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय में प्रकाश जावडे़कर की अध्यक्षता में बुधवार को एक हाई लेवल बैठक हुई. साथ ही मंत्रालय इस बारे में कानूनी राय ले रहा है.

माना जा रहा है कि मॉडरेशन पॉलिसी को लेकर चली आ रही खींचतान के कारण ही सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट्स की घोषणा में भी देरी हो रही है. इससे पहले मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को अपनी मॉडरेशन नीति जारी रखने का आदेश दिया था.

क्या कहा था हाईकोर्ट ने

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब इस साल छात्र 12वीं की परीक्षा दे चुके हैं, तो ऐसे में यह पॉलिसी बदली नहीं जा सकती. सीबीएसई इस पॉलिसी को फिलहाल उन छात्रों के लिए जारी रखे, जो इस साल एग्जामिनेशन फॉर्म जमा कर चुके हैं. बोर्ड के मॉडरेशन नीति को खत्म करने के फैसले का विरोध करते हुए कुछ अभिभावकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मॉडरेशन नीति खत्म करने के फैसला के विरोध में दायर याचिका में कहा गया था कि ये छात्रों के लिए विनाशकारी होगा.

इस फैसले के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सीबीएसई चेयरमैन राकेश चुतर्वेदी को भी तलब किया गया.

ये है मामला दरअसल हाल ही में सीबीएसई ने एक अहम फैसले में मॉडरेशन नीति को खत्म करने की घोषणा की थी. आपको बता दें कि इसके तहत छात्रों को मुश्किल सवालों के लिए ग्रेस अंक दिए जाते रहे हैं. उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह फैसला किया गया.

मॉडरेशन नीति के अनुसार परीक्षार्थियों को खास प्रश्नपत्र में सवालों के कठिन प्रतीत होने पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त अंक दिए जाते थे. हालांकि अगर कोई छात्र कुछ नंबर से परीक्षा पास करने से रह जाता है तो ऐसे में ग्रेस अंक देकर पास करने का प्रावधान जारी रहेगा. माना जा रहा है ये कदम 12वीं बोर्ड एग्जाम में मार्क्स और अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में कट-ऑफ को नीचे लाने के लिए उठाया गया है.

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