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इशरत जहां केस: CBI कोर्ट ने वंजारा और अमीन के बरी किए जाने की याचिका खारिज की

गुजरात के पूर्व डीआईजी वंजारा ने राज्य के पूर्व प्रभारी डीजीपी पीपी पांडेय को बरी किए जाने के तर्ज पर खुद को बरी करने की मांग की थी

FP Staff Updated On: Aug 07, 2018 04:03 PM IST

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इशरत जहां केस: CBI कोर्ट ने वंजारा और अमीन के बरी किए जाने की याचिका खारिज की

सीबीआई की विशेष अदालत ने इशरत जहां से संबंधित कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा और एनके अमीन की आरोप-मुक्त किए जाने की याचिका खारिज कर दी है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले पुलिस मुठभेड़ में मारी गई इशरत जहां की मां शमीमा कौसर ने इस केस से जुड़े अधिकारियों को आरोप मुक्‍त न करने की गुजारिश कोर्ट से की थी.

इशरत जहां की मां की ओर से मौजूद वकील ने कोर्ट को बताया था कि इन अधिकारियों को आरोप मुक्‍त नहीं किया जा सकता क्‍योंकि उनके खिलाफ पुख्‍ता सबूत हैं. दोनों आरोपी अधिकारी उस समय मुठभेड़ की जगह मौजूद थे. सभी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

क्या है मामला?

गौरतलब है कि 15 जून, 2004 को इशरत जहां और तीन दूसरे लोगों को मुठभेड़ में मारा गया था. ये मुठभेड़ अहमदाबाद में हुई थी. सितंबर 2009 में ही अहमदाबाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दे दिया. गुजरात पुलिस ने इशरत के साथ तीन और लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था. लेकिन ये दावा सीबीआई की निगाह में सरासर झूठा है. मारे जाने से पहले ये तमाम लोग पुलिस हिरासत में थे. इस फर्जी एनकाउंटर को आईबी की मिलीभगत से अंजाम दिया गया. पुलिस नें इस मामले में गुजरात पुलिस के 6 अफसरों के अलावा आईबी के दो अफसरों को भी आरोपी बनाया है. सीबीआई ने ये भी कहा है कि मारने से पहले इशरत समेत चारों को बेहोशी की दवा दी गई थी.

गुजरात के पूर्व डीआईजी वंजारा ने राज्य के पूर्व प्रभारी डीजीपी पीपी पांडेय को बरी किए जाने के तर्ज पर खुद को बरी करने की मांग की थी. पांडेय को इस वर्ष फरवरी में साक्ष्यों के अभाव में मामले में बरी कर दिया गया था.

वंजारा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि केंद्रीय एजेंसी की तरफ से दायर आरोपपत्र ‘मनगढ़ंत’ है और उनके खिलाफ कोई भी ‘अभियोग लायक सामग्री नहीं’ है. गुजरात एटीएस के पूर्व प्रमुख ने कहा कि गवाहों के बयान ‘काफी संदिग्ध’ हैं.

पुलिस अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त अमीन ने इस आधार पर बरी किए जाने की मांग की कि मुठभेड़ वास्तविक था और केंद्रीय जांच ब्यूरो की तरफ से पेश गवाहों की गवाही विश्वास योग्य नहीं है.

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