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एमके सिन्हा के खुलासे से पता चलता है कि CBI ताकतवर लोगों के हाथ का 'तोता' बन चुकी है

एमके सिन्हा ने केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी, अजित डोवाल, कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा, कानून सचिव सुरेश चंद्रा और सीवीसी चीफ केवी चौधरी पर संगीन आरोप लगाए हैं

Updated On: Nov 20, 2018 12:05 PM IST

Yatish Yadav

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एमके सिन्हा के खुलासे से पता चलता है कि CBI ताकतवर लोगों के हाथ का 'तोता' बन चुकी है

सीबीआई के अधिकारी एमके सिन्हा ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी तो महज एक कठपुतली है, जो सत्ता के गलियारों में घूमने वाले ताकतवर लोगों के इशारे पर चलती है. पिछले महीने आधी रात को जब सरकार ने सीबीआई में सफाई अभियान चलाया था, तो एमके सिन्हा का तबादला नागपुर कर दिया गया था. सिन्हा ने दावा किया है कि सीबीआई तो सरकार में अहम पदों पर बैठे लोगों के इशारों पर काम करती है. एमके सिन्हा ने केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा, कानून सचिव सुरेश चंद्रा और मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) केवी चौधरी पर संगीन आरोप लगाए हैं.

एमके सिन्हा ही कर रहे थे अस्थाना के खिलाफ लगे आरोपों की जांच

असल में एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर अपना तबादला रद्द करने की अपील की है. वो सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के डीआईजी थे. एमके सिन्हा ही स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में सिन्हा ने सीबीआई के भीतर और बाहर चल रहे संदिग्ध दांव-पेचों को ठीक उसी तरह उजागर करने का दावा किया है, जिस तरह उनके बॉस यानी सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने किया.

सिन्हा ने राकेश अस्थाना पर लगे आरोपों की पड़ताल विशेष जांच टीम से कराने की गुहार लगाई है. एमके सिन्हा ने दावा किया है कि मोईन कुरैशी केस में दलाल मनोज प्रसाद को दुबई से दिल्ली आने पर पकड़कर सीबीआई मुख्यालय लाया गया था. उसे 16 अक्टूबर को पकड़ा गया था. सिन्हा का दावा है कि पूछताछ के दौरान मनोज प्रसाद ने मौजूदा सरकार के कई ताकतवर लोगों का नाम लेकर सीबीआई अधिकारियों पर रौब गांठने की कोशिश की.

कुरैशी केस में पकड़े गए दलाल ने डोवाल और रॉ तक के अधिकारियों में पैठ की बात कही थी

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में एमके सिन्हा ने लिखा है कि, 'मनोज प्रसाद से याचिकाकर्ता और दूसरे अधिकारियों ने पूछताछ की. उसने अपने खिलाफ जांच को रोकने के लिए बहुतेरी कोशिश की. पूछताछ में उसने सत्ता में 'ऊंचे पदों पर बैठे ताकतवर लोगों' और सरकार में अपनी 'पैठ' का हवाला दिया. ताकि हम डर जाएं. उससे पूछताछ की जो बातें इस मामले से जुड़ी हैं, वो यहां रखी जा रही हैं. मनोज प्रसाद के मुताबिक, उसके और  सोमेश (सोमेश कुरैशी केस में दूसरा आरोपी दलाल और मनोज प्रसाद का भाई है) के पिता दिनेश्वर प्रसाद रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग में संयुक्त सचिव पद से रिटायर हुए थे. उनके मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से अच्छे ताल्लुक हैं.'

NSA अजीत डोवाल.

NSA अजीत डोवाल.

'सीबीआई मुख्यालय लाए जाने के साथ ही मनोज प्रसाद ने ये दावा किया था. वो अपनी गिरफ्तारी से अचरज और गुस्से में था. उसने पूछा कि सीबीआई की हिम्मत कैसे हुई कि उसे गिरफ्तार कर ले. जबकि उसके मौजूदा एनएसए अजित डोवाल से नजदीकी सबंध हैं. उसने लंबी-चौड़ी हांकनी शुरू कर दी और दावा किया कि उसका भाई सोमेश, दुबई में तैनात एक बड़े अधिकारी और रॉ के अधिकारी सामंत गोयल का करीबी है. सामंत गोयल इस वक्त रॉ में विशेष सचिव हैं. मनोज प्रसाद ने जांच अधिकारियों को धमकी दी कि वो उन्हें चुटकी बजाते हुए निपटा सकता है. मनोज ने व्यंग में कहा कि तुम लोगों की कोई औकात नहीं है. इसलिए 'अपनी हद में रहो' और मुझे छोड़ दो. उसने दावा किया कि उसके भाई सोमेश और सामंत गोयल ने हाल ही में एनएसए अजित डोवाल की एक बहुत अहम निजी मामले में मदद की थी. उसने ये भी दावा किया कि भारत ने हाल ही में इंटरपोल के एक पद के चुनाव से खुद को हटा लिया था.'

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दलाल का एक दावा सही भी निकला था

'मनोज के तमाम दावों में से उसके अजित डोवाल का नजदीकी होने के दावे की सच्चाई हमें नहीं पता. हालांकि इंटरपोल से जुड़े उसके दावे की हमने गुप-चुप पड़ताल की. इससे पता ये चला कि मनोज प्रसाद का दावा सही था. भारत, इंटरपोल में नुमाइंदगी के लिए दावे की रेस में था, सीबीआई में संयुक्त निदेशक (पॉलिसी) श्री एके खन्ना को भारत ने अपना नुमाइंदा बनाया था. इंटरपोल में इस ओहदे के लिए 4 और देश भी रेस में थे. इसके लिए चुनाव नवंबर महीने के तीसरे हफ्ते में कभी भी होने वाले थे. सितंबर में किसी वक्त एके शर्मा को एक बैठक के लिए विदेश जाना था. लेकिन आखिरी मौके पर एके शर्मा का ये दौरा रद्द हो गया. बताया ये गया कि भारत इंटरपोल के इस मुकाबले से खुद को अलग कर रहा है. इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेज दिल्ली में सीबीआई के आईपीसीसी मुख्यालय में मौजूद हैं और हासिल किए जा सकते हैं.'

एमके सिन्हा ने आरोप लगाया है कि सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ने 17 अक्टूबर को एनएसए अजित डोवाल को इस मामले की पूरी जानकारी दी थी. वर्मा ने अजित डोवाल को ये भी बताया था कि विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का नाम 15 अक्टूबर को दर्ज घूसखोरी के केस में है. एमके सिन्हा ये आरोप भी लगाते हैं कि अस्थाना ने अजित डोवाल से कहलाकर अपनी गिरफ्तारी होने से किसी तरह सीबीआई को रोका.

केंद्रीय मंत्री पर हरिभाई चौधरी को सना ने करोड़ों रुपए घूस में देने की बात कही है

सिन्हा का आरोप है कि अस्थाना केस के शिकायतकर्ता सतीश बाबू सना ने ये राज उजागर किया था कि इस मामले में केंद्रीय कोयला और खनन राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी को भी पैसे दिए गए थे.

सिन्हा की अर्जी के मुताबिक, 'जून 2018 के पहले पखवारे में मौजूदा केंद्रीय कोयला और खान मंत्री हरिभाई को करोड़ों रुपयों का भुगतान हुआ था. श्री सतीश सना के मुताबिक इस मामले में हरिभाई पार्थीभाई चौधरी ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के जरिए दखलंदाजी की थी. सीबीआई के निदेशक इसी मंत्रालय के मंत्री को रिपोर्ट करते हैं. पैसों का भुगतान अहमदाबाद के विपुल के जरिए हुआ था. इन बातों की जानकारी सतीश सना ने मुझे 20 अक्टूबर 2018 को दी थी.

केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी. (फेसबुक से साभार)

केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी. (फेसबुक से साभार)

'मैंने ये बात तुरंत ही सीबीआई निदेशक और एडिश्नल डायरेक्टर एके शर्मा को दी थी. इस बारे में गुप-चुप जांच की गई थी, सूत्रों ने बताया कि जून महीने में एक और जांच एजेंसी ने कुछ फोन कॉल सुनी थीं. इसमें हैदराबाद के मेडचल के विधायक के लक्ष्मण रेड्डी और सतीश सना के बीच ये बात हुई थी कि एक या दो करोड़ रुपए भेजे जा रहे हैं. मैं इस अदालत के सामने बड़े सम्मान से कह रहा हूं कि इस याचिकाकर्ता को बस इतना मालूम है कि मंत्री हरिभाई चौधरी को रिश्वत दी गई. याचिकाकर्ता को इस बात की जानकारी नहीं है कि क्या सीबीआई के किसी अधिकारी को भी रिश्वत दी गई. हालांकि याचिकाकर्ता को ये भरोसा है कि अगर इस मामले की संजीदा पड़ताल की जाए तो आखिर में सच सामने आ जाएगा.'

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सीबीआई के डीआईजी ने ये राज भी खोला कि सतीश बाबू ने उन्हें बताया था कि वो सीवीसी केवी चौधरी से भी मिले थे. दिल्ली में हुई इस मुलाकात में उनके साथ गोरंतला रमेश भी थे. सीवीसी के साथ मीटिंग में मोईन कुरैशी केस को लेकर बातचीत हुई थी. सना के बयान के हवाले से सिन्हा ने दावा किया है कि गोरंतला रमेश ने 2011 में कोई जमीन बेची थी और इस फरोख्त से मिले पैसों में से 4 करोड़ रुपए सतीश बाबू सना को दिए थे. साथ ही 50 लाख रुपए मोईन कुरैशी को भी दिए गए थे.

एमके सिन्हा ने अपनी अर्जी में दावा किया है कि, 'इसीलिए गोरंतला रमेश से सीबीआई ने मोईन कुरैशी केस में पूछताछ की थी. सतीश बाबू सना के मुताबिक बाद में सीवीसी केवी चौधरी ने राकेश अस्थाना को बुलाकर इस बारे में पूछताछ की. राकेश अस्थाना ने सीवीसी को बताया कि उनके खिलाफ कोई खास सबूत नहीं हैं. इसमें कोई गैरकानूनी काम नहीं हुआ है. लेकिन ये बात रिकॉर्ड के लिए यहां अदालत के सामने रखी जा रही है. इस बात की कोई पड़ताल भी नहीं हुई. ये बात मैं केवल सतीश बाबू सना के हवाले से कह रहा हूं.'

'बाद में याचिकाकर्ता ने सतीश बाबू सना से पूछा कि आखिर ये पैसे इतने लोगों को क्यों दिए गए. सना ने जवाब दिया कि उसके पास 'राहत पाने' के लिए इसके सिवा कोई और रास्ता नहीं था. सना ने कहा कि उसे 'धमकाया' गया और वो लगातार 'डर' में जी रहा था. उसने तो बस 'अपने कारोबार की हिफाजत' के लिए ये कदम उठाया. वो 400 कर्मचारियों वाली 3-4 कंपनियां चलाता है. उसके पास कोई और रास्ता नहीं था. ये तो विशुद्ध रूप से वसूली का मामला था. सना ने इस बात का भी दुख जताया कि उसकी कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है फिर भी उसे ये मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं, जबकि हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लेने वाले बड़े आराम से घूम रहे हैं. याचिकाकर्ता ने सना से ये भी पूछा था कि आखिर उसकी शिकायत में केंद्रीय मंत्री हरिभाई के इस मामले से ताल्लुक और रोल का जिक्र क्यों नहीं है. तो, उसका जवाब था कि उसने सीबीआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी को, सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ अपनी शिकायत दी थी. इसलिए अर्जी में इसका जिक्र करने का कोई मतलब नहीं था. उसने ये कदम अपने वकीलों की सलाह पर उठाया.'

केंद्रीय सचिव सुरेश चंद्रा और कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा का भी नाम आया सामने

साफ है कि एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच को प्रभावित करने के मकसद से याचिका लगाई है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन्हें पता चला कि केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चंद्रा ने राकेश अस्थाना मामले में शिकायतकर्ता सतीश बाबू सना से संपर्क साधने की कोशिश की.

सिन्हा ने अपनी अर्जी में लिखा है कि '8.11.2018 को आंध्र प्रदेश काडर की आईएएस अधिकारी सुश्री रेखा रानी ने सतीश बाबू सना के दफ्तर से संपर्क किया. रेखा रानी ने दावा किया कि उस वक्त लंदन में मौजूद कानून सचिव सना से बात करना चाहते थे. रेखा रानी ने सतीश बाबू सना के दफ्तर को सचिव का लंदन का नंबर भी दिया.'

एमके सिन्हा का दावा है कि 'सतीश बाबू सना ने 8.11.2018 की शाम को वॉट्सऐप के जरिए केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चंद्रा से बात की. सुरेश चंद्रा ने कहा कि नीरव मोदी मामले में किसी काम से लंदन गए हैं. चंद्रा ने ये भी कहा कि वो पिछले 4-5 दिनों से सना से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा का संदेश उन तक पहुंचा सकें कि केंद्र सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा देगी. सुरेश चंद्रा ने सतीश सना से कहा कि 13 तारीख को बड़ा बदलाव होगा इसलिए सना को 14 नवंबर को उनसे यानी सुरेश चंद्रा से मिलना चाहिए. चंद्रा ने ये भी कहा कि आईबी भी उनकी लोकेशन का पता नहीं लगा पा रही थी. चंद्रा ने लंदन में होटल में मिले चामुंडेश्वरनाथ नाम के एक आदमी के जरिए भी सना तक संदेश भिजवाने की कोशिश की थी. सना ने ये कहते हुए बातचीत खत्म की थी कि वो सुरेश चंद्रा को रात में दोबारा कॉल करेंगे.'

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सीवीसी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाने के बाद एमके सिन्हा ने दावा किया है कि कानून सचिव सुरेश चंद्रा ने 13 नवंबर को एक बार फिर से आईएएस अधिकारी रेखा रानी से सतीश बाबू सना के बारे में पूछा था.

सीबीआई ऑफिस, नई दिल्ली.

सीबीआई ऑफिस, नई दिल्ली.

ताकतवर लोगों ने सीबीआई को अपना तोता बना लिया है

एमके सिन्हा ने अपनी अर्जी में दावा किया है कि, 'ऐसा लगता है कि इस बार की बातचीत में सुरेश चंद्रा ने खुलकर रेखा रानी से गुजारिश की कि वो सतीश सना से कहें कि मदद करे. चंद्रा ने ये भी वादा किया कि वो भविष्य में सतीश सना की सारी परेशानियों को दूर कर देंगे. चंद्रा ने रेखा रानी से कहा कि वो सतीश सना को गुरुवार या शुक्रवार यानी 15/16 नवंबर 2018 को दिल्ली ले आएं. ये आखिरी वाक्य रेखा रानी ने खुद सतीश सना को बताया था...सतीश सना का मामला इस बात की मिसाल है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई किस कदर बीमार है. याचिकाकर्ता सना के आरोपों से हैरान है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो ये हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था के साथ-साथ सीबीआई पर भी गहरा दाग हैं.'

सरकार पर तगड़ा हमला बोलते हुए एमके सिन्हा ने आरोप लगाया कि जिस तरह से अस्थाना के खिलाफ जांच कर रही पूरी टीम को रातों-रात भंग करके बिना वजह बताए दिल्ली से बाहर भेज दिया गया, उससे ऊंचे पदों पर बैठकर फैसला लेने वालों की नीयत पर सवाल उठते हैं.

एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी में आरोप लगाया कि 'जिस वक्त, तरीके और तेजी से रातों-रात एक झटके में पूरी जांच टीम को बिना वजह बताए भंग कर के, टीम के सभी अहम सदस्यों को दूर-दराज के इलाकों में फेंक दिया गया, उससे लगता है कि उन्हें सबक सिखाने के लिए सजा दी गई. इससे बेहद खतरनाक संकेत निकलते हैं. न केवल जांच अधिकारियों के पेशेवर करियर, बल्कि मामले की जांच ही खतरे में पड़ गई. इससे ये भी साफ है कि सीबीआई को ताकतवर लोग अपने निजी हित साधने के लिए हांक रहे हैं. ताकि किसी को फंसा सकें या फिर कुछ खास लोगों को बेगुनाह साबित किया जा सके, भले ही केस कुछ भी हो.'

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