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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ऐतराज के बावजूद लालू पर केस दर्ज, अफसर का नाम शामिल नहीं

जिन दो अफसरों पर कार्रवाई होनी थी उनमें एक का नाम हटाया. वजह क्या रही, यह नहीं बताया गया

Updated On: Mar 19, 2018 10:56 AM IST

FP Staff

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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ऐतराज के बावजूद लालू पर केस दर्ज, अफसर का नाम शामिल नहीं
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पिछले साल सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने अपने ही कानूनी विभाग, अभियोजन निदेशालय का एक फैसला दरकिनार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए दबाव डाला था. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, साल 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने पटना में जमीन के लिए रेलवे के दो होटलों का ठेका एक निजी कंपनी को सौंप दिया.

अभियोजन निदेशालय ने जब इस अवैध ठेके में शामिल कथित साजिशकर्ताओं की लिस्ट तैयार की तो उसमें आर्थिक अपराध शाखा की ओर से मुहैया कराए गए आईआरसीटीसी के दो में से एक अधिकारी का नाम नहीं था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर बताती है कि जिस अधिकारी का नाम उस लिस्ट में शामिल नहीं था वे उस दौरान आईआरसीटीसी निदेशक (पर्यटन), राकेश सक्सेना थे. उनका नाम शामिल क्यों नहीं किया गया इसकी कोई खास वजह नहीं बताई गई. हालांकि बाद में सीबीआई अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया और राकेश सक्सेना के नाम के बगैर 7 जुलाई 2017 को एफआईआर दर्ज की गई.

एफआईआर में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स के डायरेक्टर्स विजय कोचर और विनय कोचर के नाम शामिल हैं. सरला गुप्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी हैं. इसी मामले में आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक पी. के. गोयल भी आरोपी हैं. क्या है पूरा मामला

सीबीआई के मुताबिक, विजय और विनय कोचर के मालिकाना हक वाले सुजाता होटल्स को दिए गए ठेके के बदले कथित तौर पर लालू और उनके परिवार को बिहार के प्रमुख स्थान पर प्लॉट दिया गया था. राकेश सक्सेना ने ही जुलाई 2006 में दोनों होटलों को निजी हाथों में देने की सिफारिश की. आंकड़े बताते हैं कि इन दोनों होटलों का पिछले तीन साल में सिर्फ पांच करोड़ का टर्नओवर था.

चौंकाने वाली बात यह है कि टेंडर जारी करने से पहले सक्सेना ने अक्टूबर 2006 में शर्तों में छूट दी. पहले न्यूनतम टर्नओवर की सीमा पांच करोड़ थी जिसे घटाकर उन्होंने तीन करोड़ की और फिर नेट वर्थ दो करोड़ से एक करोड़ कर दी. इसे पीके गोयल ने तत्काल मंजूरी दे दी थी.

मामले का खुलासा होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लालू प्रसाद और उनके परिवार का पटना स्थित तीन एकड़ का एक प्लॉट पिछले साल 8 दिसंबर को जब्त किया. इस कार्रवाई से पहले लालू की पत्नी राबड़ी देवी से पटना में छह दिन पूछताछ की गई थी. एजेंसी ने इस मामले में तीन एकड़ का एक प्लॉट जब्त किया, जिसपर एक मॉल बनाया गया है.

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