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सीबीआई में वर्चस्व की जंग: आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की अदावत का अंजाम क्या होगा

सीबीआई के डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के बीच की लड़ाई एक बार फिर से केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) के चौखट तक पहुंची है.

Updated On: Sep 21, 2018 09:13 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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सीबीआई में वर्चस्व की जंग: आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की अदावत का अंजाम क्या होगा

सीबीआई के डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के बीच की लड़ाई एक बार फिर से केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) के चौखट तक पहुंची है. पिछले कई महीनों से दोनों के बीच ओहदे की लड़ाई को लेकर संग्राम छिड़ा हुआ है.ओहदे की लड़ाई से शुरू हुई यह अदावत अब भ्रष्टाचार के मामले तक पहुंच गई है. सीबीआई में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले राकेश अस्थाना ने अपने ही सीनियर अधिकारी और सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की शिकायत सबसे पहले सरकार से की थी. सरकार ने किसी विवाद से बचने और मामला भ्रष्टाचार से जुड़े होने के कारण केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) के पास भेज दिया. फिलहाल सीवीसी इस पूरे मामले की जांच गहनता से कर रहा है. सीवीसी पता कर रहा है कि क्या वाकई में सीबीआई डायरेक्टर के खिलाफ जांच का मामला बनता है या नहीं?

यह पहला मौका नहीं है जब इन दो अधिकारियों की ओहदे की लड़ाई सीवीसी के पास पहुंची हो. इससे पहले भी इसी साल जुलाई महीने में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने राकेश अस्थाना की शिकायत सीवीसी से की थी. सीवीसी ने उस समय भी एक तरह से राकेश अस्थाना के पक्ष में ही फैसला सुनाया था. राकेश अस्थाना जिन-जिन अधिकारियों को सीबीआई के अंदर रखना चाहते थे,उन सभी अधिकारियों को सीवीसी ने दोबारा से बहाल कर दिया था.सीवीसी प्रमुख केवी चौधरी ने तमाम अटकलों और आशंकाओं को दरकिनार करते हुए सीबीआई में नंबर- 2 की हैसियत रखने वाले स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की टीम के कुछ अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ा दिया था.

आलोक वर्मा

आलोक वर्मा

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पांच आईपीएस अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाया था. ज्वाइंट डायरेक्टर लेवल के तीन और दो डीआईजी लेवल के अधिकारी शामिल थे. एवाईवी कृष्णा, एस. मनोहर अरामने और मनीष किशोर सिन्हा ज्वाइंट डायरेक्टर हैं, जबकि दो आईपीएस अधिकारी अनीष प्रसाद और अभिषेक शांडिल्य डीआईजी स्तर के अधिकारी थे.

बता दें कि सीबीआई के ही कुछ अधिकारियों ने ही उस समय सीवीसी को लेटर लिखा था. लेटर में कहा गया था कि राकेश अस्थाना सीबीआई के डायरेक्टर बनने के लायक नहीं है. इस बात के सामने आने के बाद ही कयास लगाए जा रहे थे कि यह पत्र सीबीआई के किसी वरिष्ठ अधिकारी कहने पर ही कुछ अधिकारियों ने लिखा है. इस पत्र के सामने आने के बाद ही सीबीआई में खेमेबाजी की बात खुलकर सामने आ गई थी.

पिछले कई महीने से सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच खटपट की खबरें अंदरखाने से आती रहती थीं. गुजरात कैडर से आने के कारण राकेश अस्थाना को इस समय मोदी सरकार का करीबी माना जाता है. यही वजह है कि विभाग में बैठे अधिकारी और विपक्षी पार्टियां भी राकेश अस्थाना पर समय-समय पर निशाना साधती रहती हैं. हाल ही में कुछ रहस्यमय दस्तावेज और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त की डायरी को आधार बनाकर उनके खिलाफ शिकायतों का अंबार भी लगाया गया था.

शायद इन्हीं बातों परेशान हो कर राकेश अस्थाना सीवीसी पहुंचे हैं. राकेश अस्थाना को लगता है कि आलोक वर्मा उनके छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. अब जब मामला सीवीसी के पास है तो जांच होनी तय मानी जा रही है. सीवीसी एक संवैधानिक संस्था है जो भ्रष्टाचार के हाइप्रोफाइल केसों की जांच करती है. ऐसा माना जा रहा है कि शुरुआती जांच में अगर आलोक वर्मा के खिलाफ सबूत मिलते हैं तो आलोक वर्मा को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. अगर सीवीसी की शुरुआती जांच में कुछ भी साक्ष्य नहीं मिलेंगे तो मामला बंद भी किया जा सकता है.

राकेश अस्थाना का आरोप है कि सीबीआई डायेरक्टर आलोक वर्मा अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर रहे हैं. बिना सबूत के ही कुछ मामलों में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है. आईआरसीटीसी केस में लालू प्रसाद यादव से जुड़े मामले में भी अस्थाना को आलोक वर्मा की हस्तक्षेप मंजूर नहीं है. ऐसा माना जा रहा है कि राकेश अस्थाना जिन-जिन मामलों को देख रहे हैं डायरेक्टर उन मामलों में भी अपना दखल रखना चाहते हैं. जबकि, अस्थाना को यह मंजूर नहीं कि उन्हें या उनकी टीम के किसी भी सदस्य को आलोक वर्मा कुछ निर्देश दें.

बता दें राकेश अस्थाना इस समय देश के कई हाईप्रोफाइल मामलों की जांच कर रहे हैं. इनमें अगस्ता वेस्टलैंड, किंग फिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या का बैंकों के साथ धोखाधड़ी का मामला, सीआरसीटीसी होटल लीज मामले में लालू प्रसाद यादव की संलिप्ता का मामला, शारदा चिंटफंड, रोज वैली, नारदा घोटाले सहित और कई चिट-फंड मामलों की जांच की निगरानी कर रहे हैं.

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फेसबुक से ली गई तस्वीर

बता दें कि दरअसल यह जंग आलोक वर्मा के डायरेक्टर बनते ही शुरू हो गई थी. आलोक वर्मा ने सीबीआई निदेशक बनते ही अपने कुछ करीबी अधिकारियों को सीबीआई में लाने की जुगत लगाई थी. वर्मा के डायरेक्टर बनने से पहले गुजरात कैडर के आईपीएस ऑफिसर राकेश अस्थाना पूर्णकालिक एक्टिंग डायरेक्टर के रूप में सीबीआई का काम देख रहे थे. उन्होंने नए अधिकारियों को सीबीआई में रखे जाने का विरोध किया और ध्यान दिलाया कि उन अधिकारियों पिछला रिकॉर्ड शक के घेरे में है. इसी बात को लेकर दोनों अधिकारियों में काफी महीनों से ठनी हुई है.

दूसरी तरफ राकेश अस्थाना को भी स्पेशल डायरेक्टर बनाए जाने की सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आलोचना की थी. प्रशांत भूषण ने इसे सरकार का 'गैरकानूनी' कदम बताया था. उन्होंने केंद्र सरकार पर सीबीआई की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया था.

प्रशांत भूषण ने राकेश अस्थाना की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी. प्रशांत भूषण ने उस समय कहा था कि राकेश अस्थाना का नाम स्टर्लिंग बायोटेक की डायरी में दर्ज है. इस मामले की सीबीआई ने खुद एफआईआर दर्ज की है. इसके बाद राकेश अस्थाना की नियुक्ति कैसे हो सकती है? हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण की याचिका खारिज कर दी थी.

prashant bhusan

सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई अपनी दलील में प्रशांत भूषण ने कहा था कि राकेश अस्थाना की नियुक्ति गैरकानूनी तरीके से की गई है. क्योंकि, कुछ दिन पहले ही इनकम टैक्स विभाग ने एक डायरी बरामद की गई थी, इस डायरी में राकेश अस्थाना का भी नाम शामिल है. प्रशांत भूषण एक बार फिर से सीवीसी जांच पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं.

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