S M L

हवाला सरगनाओं से जुड़े हैं कैश की किल्लत के तार !

आम लोगों की जानकारी से दूर हवाला नेटवर्क के बारे में जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, वे इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि हवाला नेटवर्क के इन गिरोहों को बेअसर करने के लिए जांच एजेंसियों को समन्वित प्रयास करने की जरूरत है.

Yatish Yadav Updated On: Apr 19, 2018 05:35 PM IST

0
हवाला सरगनाओं से जुड़े हैं कैश की किल्लत के तार !

पुरानी दिल्ली इलाके में मौजूद फतेहपुरी मार्केट कपड़े का होलसेल कारोबारियों का पसंदीदा ठिकाना है. यहां से कुछ दूरी पर 40-45 साल का एक शख्स दुकानों के बीच घूम-घूम कर पूजा की सामग्री बेच रहा था. उसके पास ब्लू रंग का खाली बैग भी था. साथ ही, उसने अपनी जेब में स्मार्टफोन भी रखा हुआ था. इसी क्रम में उसे बीच में ही एक और शख्स की तरफ से रोक लिया गया. इस दूसरे शख्स ने भी अपने कंधे पर पीले रंग का बैग लटका रखा था. हालांकि, दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, इसके बारे में पता नहीं चल सका, लेकिन वहां मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक दोनों ने अपनी-अपनी जेब से फोन निकाला और एक-दूसरे को अपने-अपने स्मार्टफोन में कुछ दिखाया. इसके बाद दोनों लोगों ने अपने-अपने बैग की अदला-बदली की और भीड़ भरी गलियों में गायब हो गए. जनवरी 2018 के मध्य की एक धुंध भरी सुबह को इस जोड़े की गतिविधियों पर बाकी लोगों ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया.

कुछ इस तरह से शुरू हुआ ऑपरेशन कुबेर

हालांकि, इस घटना पर जो शख्स नजर बनाए हुए था, वह राजस्थान आतंकवाद-निरोधक दस्ते (एटीएस) का प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी था. इस गतिविधि के बाद एटीएस राजस्थान के इस सुरक्षाकर्मी ने तुरंत अपने कंट्रोलर को फोन लगाया और उनसे इस सिलसिले में विस्तृत बातचीत की. सुरक्षाकर्मी ने अपने कंट्रोलर को अपनी आंखों के सामने हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी दी. सुरक्षाकर्मी और घटनास्थल से सैकड़ों मील दूर कमांड सेंटर में बैठे अधिकारी ने मौजूदा खुफिया फाइलों का जायजा लिया. साथ ही, कुछ दिनों पहले ह्यूमन इंटेलिजेंस ((HUMINT) द्वारा बताई गई जानकारी को ध्यान में रखते हुए इसी तरह की बातचीत के बारे में व्यापक जांच-पड़ताल की. इसके बाद अधिकारी ने सर्विलांस को लगातार जारी रखने का फैसला किया. दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम 'ऑपरेशन कुबेर' की शुरुआत था, जो बाद में देशभर में काफी गहरे तौर पर अपनी जड़ें जमा चुके हवाला नेटवर्क के बड़े पैमाने पर खुलासे का सबब बना.

नोटबंदी के कुछ समय बाद ही हवाला नेटवर्क ने तेजी से पांव पसारे

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से नोटबंदी का ऐलान किए जाने के कुछ समय बाद से यह नेटवर्क काफी तेजी से अपने पांव पसार रहा था. इस रहस्यपूर्ण ऑपरेशन का नाम इसके मिजाज को ध्यान में रखते हुए कुबेर चुना गया था. गौरतलब है कि कुबेर को धन का देवता माना गया है. दरअसल, आतंकवाद निरोधी दस्ते के जांचकर्मी एक राज्य से दूसरे राज्य में अवैध और हवाला संबंधी कैश के आने-जाने की पड़ताल कर रहे थे.

DemonetizationNews

कैश की दिक्कत के बीच सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दलील दी है कि देश में मुद्रा यानी नकदी का कोई संकट नहीं है. सरकार और केंद्रीय बैंक के मुताबिक, कैश की तात्कालिक कमी की मुख्य वजह रुपये की निकासी में हुई अचानक बढ़ोतरी और एटीएम मशीनों में कैश भरने में लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याएं हैं. हालांकि, 'ऑपरेशन कुबेर' में खुलासा हुआ है कि कैश की जमाखोरी करने वाले लोग और हवाला ऑपरेटर एक बार फिर से सिस्टम में सक्रिय हो गए हैं. साथ ही, कैश से जुड़ी हेराफोरी करने वाले लोगों के सक्रिय होने से बड़ी मात्रा में कैश बाजार से गायब हो रहा है.

आम आदमी की तरफ से रुपये की निकासी में अचानक से हुई बढ़ोतरी समस्या का एक सामान्य पहलू है. हालांकि, हवाला गिरोह का बाजार में फिर से वापसी करना गंभीर चिंता की बात है. खासतौर पर ऐसे स्थिति में जब सरकार ने खुद इस बात की जानकारी दी है कि नोटबंदी के ऐलान के तुरंत बाद जांच अधिकारियों ने तकरीबन 110 करोड़ के करेंसी नोट जब्त किए गए थे.

आतंकवादी निरोधक दस्ते ने हवाला संबंधी होने वाली बातचीत के बारे में पता लगाकर कुछ हफ्तों के भीतर इस बाबत सबूत इकट्ठा कर लिया कि कम से कम 4 राज्यों में हवाला नेटवर्क बड़े पैमाने पर सक्रिय है. इन राज्यों में दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश शामिल हैं. इस सिलसिले में मिली जानकारी के मुताबिक, नियमित अंतराल पर बड़े पैमाने पर कैश को अवैध रूप से एक जगह से दूसरे ठिकाने तक पहुंचाया जा रहा है.

एक उच्चस्तरीय सूत्र ने बताया, 'जब हम नियमित अंतराल की बात करते हैं तो इसका मतलब 6-7 दिनों में एक सौदा होता है. हवाला ऑपरेटरों द्वारा कंसाइनमेंट (संबंधित माल या काम ) की डिलीवरी को आम रूटीन के तौर पर अंजाम दिया जाता है. हवाला नेटवर्क में ऑपरेटर आमतौर पर ट्रांसपोर्टर्स से एक उच्चस्तरीय सूत्र के जरिये निपटते हैं और ट्रांसपोर्टर और रिसीवर (कैश की डिलीवरी लेने वाला) की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है.'

दिल्ली है मूल ठिकाना, औसतन 6-7 दिनों में होती है एक डील

कैश का मूल स्थान दिल्ली में था. कैश को दिल्ली से इधर-उधर ले जाने के लिए भिलवाड़ा और उदयपुर दो मुख्य प्वाइंट थे. उनके काम करने का तरीका बेहद अनोखा था. जिस शख्स ने कैश से भरा बैग उठाया था, वह अपनी मोबाइल फोन पर एक खास दस्तखत को पहचान के तौर पर दिखाता था. कैश की डिलीवरी करने वाले शख्स और इसे लेने वाले यानी रिसीवर के पास भी इसी तरह के दस्तखत थे. इस दस्तखत को वॉट्सअप मेंसेजर के जरिये हवाला ऑपरेटरों के गिरोह की तरफ से भेजा जाता था. आसान शब्दों में कहें, तो इसे 'चिन्ह देना' कहा जाता है. दस्तखत मिलान के इस सिस्टम के कारण इस नेटवर्क में सक्रिय लोगों के लिए एक-दूसरे की पहचान जाहिर करने की कोई जरूरत थी. सिर्फ दस्तखत वाला मेसेज ही पहचान सुनिश्चित करने के लिए काफी था. कुमार ने बताया, 'हमने हवाला नेटवर्क में सक्रिय लोगों की उनके मूल स्थान से निगरानी शुरू की.'

ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिये हासिल खुफिया सूचनाओं और तकनीकी सर्विलांस में खुलासा हुआ कि दिल्ली में हवाला नेटवर्क का एक एक्टिव सेल इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहा था. हालांकि, बाकी तरीकों के जरिये भी अवैध कैश की आवाजाही को अंजाम दिया जा रहा था.

कैश के स्मगलर की मार्च में हुई गिरफ्तारी

इस कैश तस्कर को आखिर में मार्च में एक प्राइवेट बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया और उसे आयकर विभाग को सौंप दिया गया. यह कैश तस्कर उस हवाला नेटवर्क का हिस्सा था, जो चार राज्यों में इस तरह की हरकत को अंजाम देने में सक्रिय था. चूंकि वे ऊंचे मूल्य वाले नोटों (मुख्य तौर पर 2,000 के नोट) के अवैध कारोबार में संलिप्त थे, लिहाजा इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि इस गिरोह के अहम लोग अब भी पकड़ से बाहर हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आंतकवाद निरोधक दस्ते के डीआईजी विकास कुमार ने बताया कि आयकर विभाग इन अवैध लेनदेन व सौदों से फायदा हासिल करने वालों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है और जहां तक 'ऑपरेशन कुबेर' का सवाल है, तो इससे हवाला नेटवर्क के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर काफी हद तक सुराग मिला है और जांच टीम इस गोरखधंधे के बारीक पहुलओं के बारे में पता लगाने को लेकर काम कर रही है.

कुमार ने बताया, 'हमारे ऑपरेशन से संकेत मिलते हैं कि बड़े पैमाने पर अवैध कैश को इधर-उधर पहुंचाया जा रहा है और इस पहलू को ध्यान में रखते हुए आयकर विभाग को इस सिलसिले में जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है. हमें लगता है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हवाला नेटवर्क के गिरोह के मामले को देखने को तैयारी में है, जिसके बारे में ऑपरेशन कुबेर के जरिये जानकारी मिली है. इस सिलसिले में हमारे पास कुछ सुराग है और हम हवाला नेटवर्क को चोट पहुंचाने और उसे ध्वस्त करने पर पूरी तरह से फोकस कर रहे हैं.'

सरकार और रिजर्व बैंक दोनों ने इस बात का आश्वासन दिया है कि कैश की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आने वाले दिनों में पर्याप्त मात्रा में करेंसी की सप्लाई की जाएगी. हालांकि, आम लोगों की जानकारी से दूर हवाला नेटवर्क के बारे में जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, वे इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि हवाला नेटवर्क के इन गिरोहों को बेअसर करने के लिए जांच एजेंसियों को समन्वित प्रयास करने की जरूरत है. इस मकसद को पूरा करने के लिए फिलहाल चल रहा 'ऑपरेशन कुबेर' अवैध रूप से कैश का काम करने वालों और इसके जमाखोरों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में महज शुरुआत है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Social Media Star में इस बार Rajkumar Rao और Bhuvan Bam

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi