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भारत में कैंसर ने 1990 की तुलना में दोगुना लोगों को अपना शिकार बनाया

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार इस साल पूरे विश्व में कैंसर से 9.6 मिलियन लोग अपनी जान गंवा देंगे. इसमें से 8.17 प्रतिशत मौतें भारत में होगी

Updated On: Nov 13, 2018 11:12 PM IST

FP Staff

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भारत में कैंसर ने 1990 की तुलना में दोगुना लोगों को अपना शिकार बनाया

भारत में 2016 में कैंसर से मरने वाले लोगों की संख्या 1990 की तुलना में दोगुनी हो गई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक 1990 में कैंसर से 3.82 लाख लोग मरे थे वहीं 2016 में यह संख्या बढ़कर 8.3 लाख हो गई. इसके पीछे प्रमुख कारण तंबाकू और शराब का सेवन करना है. कई विशेषज्ञों के अनुसार खाने में मिलावट, खराब लाइफस्टाइल और घरों में मौजूद प्रदूषण भी इसके पीछे का प्रमुख कारण है.

कैंसर रोगियों की संख्या में भी दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई. 1990 में 5.48 लाख से बढ़कर 2016 में 11 लाख हो गई. स्टडी के अनुसार 2016 में 8.3 प्रतिशत मौतें कैंसर के कारण हुई. 1990 की तुलना में यह 112.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. भारत में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसर में- पेट का कैंसर (9 प्रतिशत), स्तन कैंसर (8.2 प्रतिशत), फेफड़ों का कैंसर (7.5 प्रतिशत), मुंह का कैंसर (7.2 प्रतिशत), नैजोफैरिक्स कैंसर (6.8 प्रतिशत), कोलन और रेक्टम कैंसर (5.8 प्रतिशत), ल्यूकेमिया (5.2 प्रतिशत) और सर्विकल कैंसर (5.2 प्रतिशत) है.

भारत में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर है. इस साल पूरे विश्व में कैंसर की मृत्यु की 8.17 प्रतिशत मौतें भारत में होंगी. डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार इस साल पूरे विश्व में कैंसर से 9.6 मिलियन लोग अपनी जान गंवा देंगे. इसमें से 8.17 प्रतिशत मौतें भारत में होंगी.

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