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लुटियन जोन के नेताजी हुए 'नॉट रिचेबल', नेटवर्क सुधारने की कवायद शुरू

दिल्ली में राज्य सरकार के निर्देशों के तहत स्कूल, अस्पताल, कॉलेज और के आसपास मोबाइल टावर लगाने पर रोक है

Bhasha Updated On: Apr 30, 2017 03:52 PM IST

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लुटियन जोन के नेताजी हुए 'नॉट रिचेबल', नेटवर्क सुधारने की कवायद शुरू

कॉल ड्रॉप की गहराती समस्या से निपटने के लिए लुटियन दिल्ली स्थित केन्द्र सरकार की इमारतों पर भी अब मोबाइल फोन टावर लगाने का रास्ता साफ हो गया है.

मध्य दिल्ली इलाके में सरकारी इमारतों पर मोबाइल फोन टावर लगाने की अनुमति नहीं होने के कारण लुटियन दिल्ली सहित पूरे इलाके में नेटवर्क की समस्या गंभीर होती जा रही है.

इससे निपटने के लिए  केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने मध्य दिल्ली स्थित सरकारी इमारतों पर निजी मोबाइल फोन कंपनियों के टावर लगाने पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति दे दी है.

नई दिल्ली पालिका परिषद एनडीएमसी इलाके में सरकारी एजेंसियों और स्थानीय निकायों द्वारा सुरक्षा एवं अन्य कारणों से अपनी इमारतों पर निजी मोबाइल कंपनियों के टावर लगाने की अनुमति देने से इंकार करने के बाद कॉल ड्रॉप की समस्या बढ़ गई थी.

इसके मद्देनजर निजी ऑपरेटरों के अनुरोध पर मंत्रालय ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के दिशानिर्देशों के तहत उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए मोबाइल टावर के लिए सरकारी इमारतों के इस्तेमाल की पहल की है.

मंत्रालय ने कॉल ड्रॉप की समस्या पर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति की सिफारिश पर यह पहल की है.

समिति ने हाल ही में शहरी विकास मंत्रालय से सभी केन्द्रीय मंत्रालयों और स्थानीय निकायों से इस मुद्दे पर बातचीत कर उनकी इमारतों पर जल्द ही मोबाइल टावर लगाने के इंतजाम करने की सिफारिश की थी.

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट्रल दिल्ली के आसपास घनी आबादी वाले इलाकों में दिल्ली नगर निगम और एनडीएमसी द्वारा ट्राई के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले निजी मोबाइल टावर को हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद कॉल ड्रॉप की समस्या गहरा गई है.

मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद सरकारी संपदा और रक्षा मंत्रालय सहित सभी केन्द्रीय मंत्रालय, एनडीएमसी की इमारतों पर निजी मोबाइल कंपनियां अपने सुरक्षा मानकों को पूरा कर टावर लगा सकेंगी.

मोबाइल टावर लगाने में केन्द्रीय संपदा के इस्तेमाल के एवज में कंपनियों को टावर की लाइसेंस फीस देनी होगी. साथ ही टावर लगाने वाली कंपनी को अन्य मोबाइल कंपनियों को नेटवर्क साझा करने की भी छूट देनी होगी. इससे सभी कंपनियों के अलग अलग टावर लगाने की जरूरत पर रोक लगाते हुए टावरों की संख्या को सीमित रखा जा सकेगा.

इस दिशा में रक्षा मंत्रालय ने शुरआती पहल करते हुए उसकी इमारतों पर टावर लगाए जाने के लिए मानक भी तय कर दिए हैं. इसमें मंत्रालय ने दिल्ली केंट क्षेत्र में टावर लगाने के लिए 61 स्थानों को चिन्हित कर रक्षा संपदा की इमारतों और खुले मैदान में 'टावर ऑन व्हील्स' का भी रास्ता साफ कर दिया है.

रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली सहित देश भर में मौजूद केंट क्षेत्र में निजी दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल टावर लगाने के लिए किराए पर जगह देने संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा है. इसका मकसद मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी बेहतर कर कॉल ड्रॉप की समस्या से निपटने में मदद करना है.

इसी तरह की पहल डाक विभाग ने भी दिल्ली सहित देश भर के लिए की है. स्थायी समिति की रिपोर्ट में दिल्ली से बाहर देश भर में केन्द्र सरकार की इमारतों पर टावर लगाने की नीति को लागू कर कॉल ड्रॉप की समस्या के समाधान में मददगार बनने की सिफारिश की गई है.

मौजूदा नीति के तहत सुरक्षा कारणों से सरकारी इमारतों पर निजी क्षेत्र की संचार कंपनियों के मोबाइल टावर लगाने की अनुमति नहीं है. ऐसे में कंपनियों के पास रिहायशी क्षेत्रों के आसपास खाली जमीन पर 'टावर ऑन व्हील्स' का ही विकल्प ही बचता है. दिल्ली में राज्य सरकार के दिशानिर्देशों के तहत स्कूल, अस्पताल, कॉलेज और जेल के आसपास मोबाइल टावर लगाना प्रतिबंधित है.

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