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बिहार: 10 साल, 582 करोड़ का घोटाला और कोई कार्रवाई नहीं

सीएजी के मुताबिक बिहार के 14 जिलों में हुए इस ऑडिट में 582 करोड़ रूपए की वित्तीय अनियमिता बरती गई है

Updated On: May 30, 2018 04:29 PM IST

FP Staff

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बिहार: 10 साल, 582 करोड़ का घोटाला और कोई कार्रवाई नहीं

बिहार में एक नए घोटाले का खुलासा हुआ है. कैग ने बिहार राज्य खाद्य निगम में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. बिहार के कुछ जिलों में कैग ने ऑडिट किया, जिसमें कई खुलासे हुए हैं.

ऑडिट में पता चला है कि फोर्थ ग्रेड के कई दागी कर्मचारियों को गोदाम का प्रभारी बनाना और बिना नंबर वाले ट्रकों, स्कूटरों और बाइक के जरिए बिहार राज्य खाद्य निगम में अनाज का उठाव और वितरण दिखाकर लूट-खसोट करने का मामला सामने आया है.

सीएजी को बिहार राज्य खाद्य निगम ने साल 2007-08 में वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा ,बेगूसराय और आरा आदि जिलों का ऑडिट करने कहा गया था. इस ऑडिट में सीएजी ने मुजफ्फरपुर, वैशाली और खगड़िया जिले में कई चौंकाने वाली वित्तीय अनियमितताओं को पकड़ा.

सीएजी के मुताबिक 14 जिलों में हुए इस ऑडिट में 582 करोड़ रूपए की वित्तीय अनियमिता बरती गई है. सीएजी ने पिछले 9 सालों में जिन बिंदुओं को लेकर वित्तीय अनियमिता की बात कही है उसे अभी तक सरकारी रिकार्डों से भी नहीं हटाया गया है.

भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को बनाया गया गोदाम का प्रभारी

सीएजी के मुताबिक वैशाली के महनार और देसरी के साथ ही मुजफ्फरपुर के पारू, मीनापुर और मोतीपुर गोदाम में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को गोदाम का प्रभारी बनाकर करोड़ों की अनियमितता की गई. वैशाली के महनार और देसरी में शैलेश कुमार सिंह नामक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को गोदाम का प्रबंधक बनाकर लाखों का गबन किया गया. जबकि शैलेश कुमार सिंह दो बार भ्रष्टाचार के आरोप में विभाग से निलंबित होकर जेल भी जा चुका था.

ट्रकों पर थे मोटरसाइकिल और स्कूटर के नंबर

बिहार राज्य खाद्य निगम में अनाज के उठाव और वितरण में ट्रांसपोर्टरों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है. इसी कड़ी को खंगालते हुए सीएजी ने खगड़िया जिले में कई चौंकाने वाले तथ्यों को पकड़ा है. खगड़िया में चावल, गेहूं और चीनी के ट्रांसपोर्ट के लिए जिन 32 ट्र्कों को एसएफसी प्रबंधक ने दिखाया उसका कोई अस्तित्व ही नहीं मिला. खगड़िया डीटीओ कार्यालय में भी इन ट्र्कों के गलत नंबर बताए गए थे. इसमें से आठ ट्र्कों के नंबर बिल्कुल फर्जी थे जबकि तीन मोटरसाइकिल, एक स्कूटर, एक जीप, चार मिनी ट्रक और 15 ट्रैक्टर के नंबर सीएजी को पड़ताल में मिले.

10 सालों में नहीं हुई कोई कार्रवाई

इस तथ्य को सीएजी ने साल 2008 में पकड़ा था लेकिन बीते 10 सालों में सीएजी की इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जबकि मोटरसाईकिल और स्कूटर के जरिए सैकड़ों क्विंटल अनाज को ढोने की फर्जी कवायद को सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में गंभीरतापूर्वक दर्शाया है. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सीएजी ने जिन तथ्यों को लेकर वित्तीय अनियमितता की बात उजागर की है उसे बीते 10 सालों में भी रिकार्डों से हटाया नहीं गया है.

(साभार: न्यूज़18 इंडिया के लिए प्रवीन ठाकुर की रिपोर्ट)

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