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बुलंदशहर हिंसा: गोकशी पर पुलिस FIR में 7 मुसलमानों के नाम, 2 नाबालिग, 5 गांव में थे ही नहीं

यूपी पुलिस ने गोकशी के मामले में जिले के नयाबांस गांव के 7 मुस्लिमों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. 7 में से दो नाबालिग बताए जा रहे हैं जिनकी उम्र 11 और 12 साल है

Updated On: Dec 05, 2018 12:33 PM IST

FP Staff

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बुलंदशहर हिंसा: गोकशी पर पुलिस FIR में 7 मुसलमानों के नाम, 2 नाबालिग, 5 गांव में थे ही नहीं

कथित गोकशी के शक में भड़की हिंसा में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में सोमवार एक पुलिस अधिकारी और एक आम नागरिक की मौत हो गई थी. यूपी पुलिस ने गोकशी के मामले में जिले के नयाबांस गांव के 7 मुस्लिमों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. 7 में से दो नाबालिग बताए जा रहे हैं जिनकी उम्र 11 और 12 साल है. गांव के लोगों और स्थानीय पुलिसकर्मियों के मुताबिक, नाबालिगों को छोड़कर बाकी के 5 घटना के दिन गांव में मौजूद नहीं थे.

सोमवार को भीड़ की हिंसा में जान गंवाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के मामले में दर्ज किए गए एक अलग एफआईआर में बजरंग दल के जिला प्रमुख और मुख्य आरोपी योगेश राज के बयान के आधार पर ही ये शिकायत दर्ज की गई थी.

नाबालिगों के माता-पिता और रिश्तेदारों का कहना है कि एफआईआर में दर्ज आरोपियों की खोज में पुलिस उनके घर आई और शुरुआती पूछताछ के बाद बच्चों को एक रिश्तेदार के साथ अपने साथ लेकर चली गई. रिश्तेदार ने कहा कि पुलिस मुझे थाने ले घई और वहां पर करीब 4 घंटे मुझे बिठाया गया. पुलिस ने मेरे से नाम और फोन नंबर भी लिखवाया.

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न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, एक नाबालिग ने बताया कि हमने वहां पर मुश्किल ही कुछ बात की. मुझे अच्छा नहीं लगा रहा था. मैं कभी भी पुलिस स्टेशन के अंदर नहीं गया था. नाबालिग ने बताया कि जब मेरे चाचा ने कहा कि मेरी उम्र 18 साल से कम है तब उन्होंने मेरी उम्र जांचने के लिए आधार कार्ड की मांग की.

बुलंदशहर के एसएसपी कृष्ण बी सिंह ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और कहा कि हम तथ्यों की जांच कर रहे हैं.

एफआईआर में दर्ज किए गए नामों में पहला सुदैफ का है. गांव वालों के मुताबिक, यहां पर इस नाम का कोई आदमी कभी रहा ही नहीं. लिस्ट में दूसरा नाम इल्यास का है. इस नाम के दो लोग इस गांव में थे लेकिन दोनों करीब 15 साल पहले ही अपने परिवार के साथ नौकरी की तलाश में बाहर चले गए और फिलहाल एनसीआर में रह रहे हैं. एफआईआर में तीसरा नाम शराफत का है जो लंबे समय से हरियाणा के फरीदाबाद में रह रहा है.

Allahabad: Samajwadi Party workers take part in a candle light march to pay tribute to police inspector Subodh Singh, who was killed in Monday's mob violence in Bulandshahr, in Allahabad, Tuesday, Dec 4, 2018. (PTI Photo) (PTI12_4_2018_000139B)

इसी गांव के सैफुद्दीन और परवेज का नाम भी एफआईआर में दर्ज है. हालांकि दोनों शनिवार से ही गांव से 45 किलोमीटर दूर इत्जेमा में शामिल होने के लिए गए हुए थे और घटना के समय तक वहां से लौटे नहीं थे. दोनों के परिवार वालों ने सबूत के तौर पर इत्जेमा के फोटोग्राफ और वीडियो भी पुलिस को मुहैया कराए.

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इसी बीच, इस मामले में एकमात्र शिकायतकर्ता योगेश राज द्वारा दर्ज कराए गए बयान की धरातल पर पुष्टि नहीं हो पाई है. राज ने कहा था कि सोमवार की सुबह 9 बजे वह अपने तीन दोस्तों के साथ गांव से टहलने के लिए निकला था. बजरंग दल जिला अध्यक्ष योगेश राज के मुताबिक, पड़ोसी गांव महाव के जंगल वाले इलाके में उसने देखा कि 7 लोग गोकशी कर रहे हैं. जबतक हमलोग कुछ कर पाते तब तक वे फरार हो गए. योगेश राज ने कहा था कि वे सब के सब उसी गांव के रहने वाले थे.

हालांकि जब योगेश राज की बहन से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने भाई के बयान के उलट बात बताई. सुमन माथुर ने कहा कि महाव गांव के किसी व्यक्ति ने उसे कॉल किया था, जिसके बाद वह घर से निकला. बहन सुमन माथुर के मुताबिक, वह पुलिस स्टेशन भी गया था लेकिन बाद में कॉलेज परीक्षा के लिए वह वहां से लौट आया. वह दोबारा 2.30 बजे दोपहर को घर आया और आधे घंटे के बाद फिर से चला गया. तब से हमलोगों ने उसे देखा नहीं है.

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