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जीएसटी के करीब होगा बजट का टैक्स ढांचा

जीएसटी व्यवस्था का मतलब होगा न्यूनतम रियायतें और यह बजट उस दिशा में ही आगे बढ़ेगा.

Updated On: Jan 30, 2017 10:45 AM IST

Rajeev Ranjan Jha Rajeev Ranjan Jha
लेखक आर्थिक पत्रिका निवेश मंथन और समाचार पोर्टल शेयर मंथन के संपादक हैं.

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जीएसटी के करीब होगा बजट का टैक्स ढांचा

जीएसटी को लेकर बहुत-सी बातें साफ हो गयी हैं, मगर इसके अमल को लेकर अब भी बहुत सारे सवाल बाकी हैं. उम्मीद की जा रही है कि ऐसे काफी सवालों का जवाब आगामी बजट में मिल सकता है.

यह एक सामान्य आशा है कि इस बजट में तमाम अप्रत्यक्ष करों को जीएसटी संरचना के करीब ले जाया जायेगा. इसी के अनुरूप यह माना जा रहा है कि सर्विस टैक्स में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक 

हाल में 16 जनवरी को हुई जीएसटी काउंसिल की अपनी नौवीं बैठक में बहुत-से अटके हुए मुद्दों को सुलझाया गया है.

खास कर जीएसटी में करदाताओं पर प्रशासनिक अधिकार के मुद्दे पर सहमति बनी.

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इस बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद के इस फैसले की जानकारी दी कि 1.5 करोड़ रुपए की सीमा तक के सालाना कारोबार वाले 90% करदाता राज्यों के अधीन रहेंगे, जबकि 1.5 करोड़ रुपए से कम सालाना कारोबार वाले बाकी 10% करदाता केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में होंगे.

इसके साथ ही जेटली ने यह भी संकेत दे दिया कि जीएसटी लागू करने की व्यावहारिक तिथि 1 जुलाई 2017 हो सकती है, यानी उन्होंने मान लिया है कि 1 अप्रैल 2017 से इसे लागू करना संभव नहीं लग रहा है.

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जीएसटी लागू करने के लिए पिछले साल जो 101वां संविधान संशोधन अधिनियम संसद में पारित हुआ है, उसके अनुसार सरकार इस साल 16 सितंबर तक जीएसटी लागू करने के लिए बाध्य है.

फिलहाल, 16 जनवरी की बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों को जीएसटी के मसौदा कानूनों में शामिल करके जीएसटी परिषद की 18 फरवरी को होने वाली अगली बैठक में रखा जायेगा.

जीएसटी के अमल पर होगा काम 

जीएसटी पर अमल के संबंध में आगे किस तरह से कदम उठाए जाने वाले हैं, इनकी जानकारी बजट में दी जा सकती है.

यह स्वाभाविक ही होगा कि बजट के काफी सारे प्रस्ताव अप्रत्यक्ष करों को जीएसटी के करीब ले जाएंगे.

इस समय कर व्यवस्था के जानकारों को उम्मीद है कि बजट में जीएसटी को लागू करने की दिशा में उठाये जाने वाले विभिन्न कदमों की समयबद्ध प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा.

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एसजीएसटी, सीजीएसटी और आईजीएसटी कानूनों को संसद में कब पारित कराया जायेगा, इसका संकेत मिलना चाहिए. सेंट्रल जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी के विधेयकों को केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में ही पारित कराने का प्रयास करेगी.

जीएसटी से जुड़े सवालों का मिलेगा जवाब

जीएसटी की दरें कितनी रहेंगी और सेवाओं पर जीएसटी किस दर से लागू होगी. जीएसटी से जुड़े तमाम नियम क्या रहेंगे.

इन सब बातों पर लोगों के मन में जो सवाल हैं, उनमें से जितने अधिक सवालों के जवाब इस बजट में मिल सकें, वह बेहतर होगा.

जीएसटी परिषद ने 5%, 12%, 18% और 28% जीएसटी दर की चार श्रेणियों को स्वीकृति दी है.

इनमें से मानक दर 12% और 18% की होगी.

वहीं कुछ आवश्यक वस्तुओं को शून्य दर पर भी रखा जायेगा, जबकि विलासिता या हानिकारक वस्तुओं पर 28% जीएसटी दर के अलावा भी अतिरिक्त सेस लगेगा.

मगर किस चीज पर कितनी दर लगेगी, इसकी सूची अभी घोषित नहीं हुई है. अब जीएसटी के संबंध में सबसे प्रतीक्षित पहलू यही जान पड़ता है. संभवतः 18 फरवरी को जीएसटी परिषद की अगली बैठक में इसका मसौदा रखा जायेगा.

क्या हैं मौजूदा दरें 

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इसी तरह सर्विस टैक्स अभी 15% है और संभावित जीएसटी दर 18% है. इन दोनों के बीच के अंतर को बजट में किस हद तक पाटा जायेगा, इस पर खास नजर रहेगी.

क्या मोदी सरकार पांच राज्यों के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पेश हो रहे इस बजट में सर्विस टैक्स में सीधे 3% की बड़ी बढ़ोतरी करने का राजनीतिक जोखिम उठाना चाहेगी?

सरकार अगर ऐसा करती है तो विभिन्न सेवाएं तुरंत महंगी हो जायेंगी. सर्विस टैक्स पर लगने वाले दो सेस-कृषि कल्याण सेस और स्वच्छ भारत सेस को भी हटा कर जीएसटी के करीब की एक सर्विस टैक्स दर लागू की जा सकती है.

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यह भी कयास लगाया जा रहा है कि सर्विस टैक्स की तीन श्रेणियां रखी जा सकती हैं जिनके तहत विलासिता, मानक और मूलभूत सेवाओं के लिए अलग-अलग दरें होंगी.

इस समय भी अलग-अलग तरह की सेवाओं के लिए अलग-अलग सर्विस टैक्स दरें लागू हैं, हालाँकि मानक दर 15% की है.

टैक्स ढांचे को आसान बनाना जरूरी

जीएसटी लागू करने का एक मुख्य उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना है.

लिहाजा इस बात पर भी नजर रहेगी कि कपड़ा, सीमेंट, ऑटो जैसे विभिन्न उद्योगों में कच्चे माल, उद्योग के आकार आदि पैमानों पर अलग-अलग उत्पाद शुल्कों की जो व्यवस्था बनी हुई है, उसे किस हद तक एकरूप बनाया जाता है.

जीएसटी का एक असर यह भी होगा कि बहुत-सी मौजूदा रियायतें खत्म की जा सकती हैं.

जीएसटी व्यवस्था का मतलब होगा न्यूनतम रियायतें और यह बजट उस दिशा में ही आगे बढ़ेगा.

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आगामी बजट में ऐसे उत्पादों पर उत्पाद शुक्ल की छूट घटायी या खत्म की जा सकती है, जो 5% या 12% जीएसटी दर के दायरे में आने वाले हैं.

जीएसटी कानून के मसौदे में भी कर भुगतान के लिए अगले महीने की 20 तारीख तक का समय दिया गया है. लिहाजा यह अपेक्षा है कि बजट में सर्विस टैक्स भुगतान की समय-सीमा इसके अनुरूप कर दी जाये.

जीएसटी के करीब आएगा सेनवैट क्रेडिट

सेनवैट क्रेडिट के प्रावधानों को उदार बना कर इसे आगामी जीएसटी व्यवस्था के करीब लाया जा सकता है, जिसमें सभी तरह की वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए क्रेडिट की अनुमति मिले.

जीएसटी के मसौदा कानून में ट्रांजिशन प्रावधानों के तहत पिछली तारीखों तक के एजुकेशन सेस और सेकेंडरी ऐंड हायर एजुकेशन सेस के क्रेडिट की अनुमति नहीं दी गयी है. इसलिए यह मांग भी की जा रही है कि सरकार बजट में इस क्रेडिट की अनुमति दे.

सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर रखी गयी सेवाओं की नकारात्मक सूची को कुछ और छोटा किया जा सकता है.

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हालांकि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य फौरी तौर पर इन पर सर्विस टैक्स की छूट के कुछ नये प्रावधान भी हो सकते हैं.

अभी किसी महीने के सर्विस टैक्स का भुगतान करने के लिए अगले महीने की छह तारीख तक का समय मिलता है, जबकि वैट में 20 तारीख तक का.

अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि बजट में वित्त वर्ष 2017-18 के आरंभिक तीन महीनों (जब मौजूदा अप्रत्यक्ष कर जारी रहेंगे) और जुलाई-मार्च के नौ महीनों की अवधियों के लिए अप्रत्यक्ष कर संग्रह के अनुमान कितने-कितने रखे जाते हैं.

इन आंकड़ों से यह अंदाजा मिलेगा कि सरकार जीएसटी लागू होने के तुरंत बाद अपने राजस्व में किस तरह के बदलाव की संभावना देख रही है.

लेखक आर्थिक पत्रिका 'निवेश मंथन' और समाचार पोर्टल शेयर मंथन (www.sharemanthan.in) के संपादक हैं. इससे पहले वे लंबे समय तक ज़ी बिजनेस, एनडीटीवी, आजतक और अमर उजाला से जुड़े रहे हैं. ईमेल : rajeev@sharemanthan.com

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