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बजट 2019-शेयर बाजार की खुशी के मायने

किसान प्रिय बजट पर शेयर बाजार खुश हो ऐसे बहुत उदाहरण भारतीय अर्थव्यवस्था में मिलते नहीं हैं.

Updated On: Feb 01, 2019 06:26 PM IST

Alok Puranik Alok Puranik
लेखक आर्थिक पत्रकार हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में कामर्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं

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बजट 2019-शेयर बाजार की खुशी के मायने

 

अंतरिम वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने जो अंतरिम बजट पेश किया है, उसे आम तौर पर किसानों, कामगारों का बजट कहा जा रहा है पर इस बजट से शेयर बाजार भी खुश दिखाई दे रहा है. आज मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 212.74 बिंदु ऊपर जाकर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 62.70 बिंदु ऊपर जाकर बंद हुआ.

किसान प्रिय बजट पर शेयर बाजार खुश हो ऐसे बहुत उदाहरण भारतीय अर्थव्यवस्था में मिलते नहीं हैं. यह बजट 75000 करोड़ छोटे किसानों को ट्रांसफर करने की बात करता है. इसका मोटा मतलब यह हुआ कि किसानों के हाथ में कुछ खरीद क्षमता आएगी. खरीद क्षमता कहीं भी आए उससे शेयर बाजार की खुशी की वजह यह है कि तमाम कंपनियों का माल ज्यादा बिकेगा. लाभ बढ़ेंगे.

बजट के बाद मोटरसाइकल बनाने वाली बड़ी कंपनी हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो के भाव बढ़े. टूथपेस्ट से लेकर साबुन से लेकर तेल बनानेवाली कंपनियों मैरिको, डाबर,हिन्दुतान लीवर के शेयरों ने भी करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की.

बजट बहुत खरीद क्षमता देने के बावजूद कहीं फिजूलखर्ची करता हुआ नहीं दिखता

यूं निवेशकों की एक बड़ी मांग पर वित्त मंत्री ने कोई ध्यान न दिया. निवेशकों की मांग थी कि शेयरों पर लगाया गया दीर्घ कालिक पूंजीगत लाभ कर हटाया जाए. पर यह मांग कूड़ेदान में डाल दी गई.

फिर भी शेयर बाजार इस बजट को निवेश मित्र कुछ वजहों से मानकर चल रहा है. पांच लाख रुपए तक कि आय कर मुक्त कर दी गई है और कर बचत निवेश करने पर कोई 6 लाख 50000 तक की आय को कोई कर मुक्त रख सकता है. यानी 5 लाख सालाना आय वाले के हाथ में कुछ पैसा बचेगा या तो किसी साज सामान की खरीद में जाएगा या किसी निवेश में जाएगा. दोनों ही सूरतों में उद्योग जगत और वित्तीय जगत का भला ही होगा.

इस तरह से यह बजट कुछ अतिरिक्त खरीद क्षमता को बाजार में डालेगा. उससे कुछ बाइक ज्यादा बिक पाएंगी. कुछ दूसरे आइटम ज्यादा बिक पाएंगे. बाजार की खुशी का एक कारण और है कि सारी कवायद में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे के मसले पर अनुशासन दिखाया है. इस तरह से देखें तो बजट बहुत खरीद क्षमता देने के बावजूद कहीं फिजूलखर्ची करता हुआ नहीं दिखता.

किसानों के हाथ मे कितनी बड़ी खरीद क्षमता आने की उम्मीद है यह इस बात से समझा जा सकता है कि जीएसटी संग्रह करीब 1 लाख करोड़ रुपए हर महीने बैठता है इसका करीब 75 प्रतिशत छोटे किसानों के लिए प्रस्तावित है. यह सटीक राजनीति है और सटीक अर्थशास्त्र भी,ऐसा शेयर बाजार का रुख बताता है.

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