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आम बजट 2017: बजट से बढ़ेगी सड़क निर्माण की रफ्तार?

करीब 52 लाख किलोमीटर की लंबाई के साथ भारत सड़क नेटवर्क वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.

Updated On: Jan 27, 2017 05:53 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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आम बजट 2017: बजट से बढ़ेगी सड़क निर्माण की रफ्तार?

सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की कोशिश है कि देश के हर कोने को सड़कों से जोड़ा जाए.

इस बारे में मंत्रालय हर साल आंकड़ा भी देती है. जिसमें सड़क परिवहन के क्षेत्र में हुए कामकाज का लेखा-जोखा होता है.

पिछले साल भारत के वित्त मंत्री ने आम बजट में रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे मंत्रालय को 1450 करोड़ रुपए दिए थे.

पीपीपी और विदेशी कंपनियों के भरोसे हाईवे प्रोजेक्ट्स 

साल 2015 के अगस्त तक देश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 112 प्रोजेक्ट्स को पूरा कर लिया गया था. 149 प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहे थे. इनमें से कई प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं तो कई प्रोजेक्ट में देरी हो गई है.

सरकार का दावा है कि साल 2020 तक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 3100 करोड़ रुपए राष्ट्रीय राजमार्गों पर इंवेस्ट किए जाएंगे.

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015 में 97,135 किलोमीटर से वित्त वर्ष 2016 तक 100,475 किलोमीटर हाईवे बनाने का लक्ष्य रखा था.

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भारत सरकार को देश में हाईवे प्रोजेक्ट के लिए कई दूसरे देशों जैसे मलेशिया और जापान की निजी कंपनियों से भी मदद मिल रही है. इन देशों के प्राइवेट कंपनियों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर 60 प्रतिशत तक निवेश किया है.

भारत में सड़क मार्ग को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है- स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे और जिला और गांव की सड़कें.

देश में इस समय स्टेट हाईवे की लंबाई 1,48,256 किलोमीटर है. यह  देश के कुल सड़क मार्ग का 3.0 फीसदी है. नेशनल हाईवे की लंबाई 1,00,475 किलोमीटर है. यह भारत के कुल सड़क मार्ग का 2.0 फीसदी है. जबकि जिला और गांव को जोड़ने वाली सड़कों की कुल लंबाई 49,83,579 किलोमीटर है. यह देश के कुल सड़क मार्ग का 95.0 फीसदी है.

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किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए बढ़िया सड़क नेटवर्क एक बुनियादी जरूरत होती है. यह सड़क देश के दूरदराज के क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने का काम करता है. बाजारों, अस्पतालों और स्कूलों तक आम लोगों की पहुंच को आसान करता है.

करीब 52 लाख किलोमीटर की लंबाई के साथ भारत सड़क नेटवर्क वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.  देश की 64.5 फीसदी माल ढुलाई सड़क के जरिए होती है. देश के 85.9 फीसदी लोग एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं

घोषणाओं के मुताबिक रफ्तार नहीं 

साल 2016 के आम बजट में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए कई घोषणाएं की गई थीं. बजट में सरकार ने कहा था कि अगले एक साल में देश में नेशनल हाईवे की लंबाई में 10 हजार किलोमीटर तक बढ़ाई जाएगी. आम बजट 2017-18 के पेश में होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और आंकड़े कुछ और ही कहानी कहती है.

देश के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लक्ष्य हासिल करने के लए कई नीतियां भी बनाई थीं. लेकिन इन नीतियां को अभी तक जमीन पर उतारा नहीं जा सका है.

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नितिन गडकरी ने साल 2016 के आम बजट के बाद कहा था कि देश में रोजाना 30 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाए जाएंगे. लेकिन पिछले दिन मंत्रालय ने जो रिपोर्ट कार्ड जारी किया है, उसमें यह आंकड़ा महज 16 किलोमीटर का है. 1 अप्रैल 2016 से 30 नवंबर 2016 तक सिर्फ 4028 किलोमीटर नेशनल हाईवे बना है.

पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में सड़क नेटवर्क के लिए 96 हजार करोड़ रुपए दिया गया था. इन पैसों से 10 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाने का लक्ष्य रखा गया था. मंत्रालय ने लगभग 60 हजार करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए और इन्हें ठेकेदारों को आवंटित भी कर दिया गया. बाकी रुपयों के लिए एनएचएआई को 15 हजार करोड़ रुपए बॉण्ड के जरिए इकट्ठा करने की इजाजत गई.

सरकार के कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिन पर काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास पीएम मोदी ने दिसंबर 2015 में किया था. लेकिन एक साल से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो पाया है.

नितिन गडकरी के दावे 

nitin gadkari

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कहते हैं कि रोजाना 40 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य तय करने की दिशा में हमलोग अग्रसर हैं. वे यह भी कहते हैं कि सरकार इस वित्तीय वर्ष में 6 लाख करोड़ रुपए के ठेके का आवंटन करेगी.

उनका दावा है कि इस वित्तीय वर्ष में 15 हजार किलोमीटर के हाईवे निर्माण का ठेका भी आवंटित कर दिया जाएगा.

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नितिन गडकरी का कहना है कि जब एनडीए सरकार सत्ता में आई थी तो देश में लगभग 400 से ज्यादा प्रोजेक्ट ठप पड़े थे. लेकिन नई सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया है. सरकार मेट्रो शहरों को भारी वाहनों की भीड़ से मुक्त कराने के लिए कई कदम उठाए हैं.

देश में सड़कों पर भारी बोझ है. इस वजह से सलाना लगभग 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं. इन दुर्घटनाओं में करीब डेढ़ लाख लोगों की जान जाती है. हर साल बजट में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और सुरक्षा पर लाखों खर्च किए जाते हैं, पर नतीजा जस का तस बना रहता है.

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