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बजट 2017: अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए सरकारी घाटे को कम करने का लक्ष्य

सरकार साल 2017-18 के वित्तीय वर्ष में सरकारी घाटे को जीडीपी का 3.3 से 3.4 फीसदी तक रखेगी

Updated On: Jan 31, 2017 07:05 PM IST

FP Staff

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बजट 2017: अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए सरकारी घाटे को कम करने का लक्ष्य

गोल्डमैन सैक्स की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सरकार साल 2017-18 के वित्तीय वर्ष में सरकारी घाटे को जीडीपी का 3.3 से 3.4 फीसदी तक रखेगी.

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘नोटबंदी के चलते बने कमजोर आर्थिक हालात को सुधारने के लिए सरकार मांग को बढ़ाने और फिस्कल कंसोलिडेशन को बढ़ाने के लिए सोच-समझ कर कदम उठा रही है. हमें लगता है कि सरकारी घाटे को जीडीपी का 3.3 फीसदी करने का लक्ष्य सरकार बजट में रख सकती है. यह सरकार द्वारा मध्यावधि फिस्कल कंसोलिडेशन प्रोग्राम में तय योजना से 0.30 फीसदी अधिक है.’

फिस्कल कंसोलिडेशन के तहत अधिक से अधिक लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाता है.

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नोटबंदी के बाद सरकारी घाटे में कम कटौती कमजोर आर्थिक हालात में मांग को प्रोत्साहित करने के लिए की जा रही है.

एसबीआई की भीतरी रिसर्च रिपोर्ट इकोव्रैप के अनुसार वित्तीय साल 2017-18 के लिए सरकारी घाटे को 5.75 लाख करोड़ रखने का लक्ष्य है, जो जीडीपी का 3.4 फीसदी है.

अगले वित्तीय वर्ष में टैक्स रेवेन्यू में वृद्धि और खर्चों में होगी कमी 

वित्तीय साल 2016-17 में सरकारी घाटा जीडीपी का 3.5 फीसदी रहा. गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट की मुताबिक सरकार वित्तीय वर्ष 2016-17 में सरकारी घाटे के इस लक्ष्य को इसलिए हासिल कर पाई क्योंकि टैक्स रेवेन्यू में उम्मीद से अधिक वृद्धि हुई और सरकारी खर्चों में भी कमी हुई.

मुख्य तौर पर पेट्रोल-डीजल पर ऊंचे रेवेन्यू के कारण सरकार इस चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी घाटे के लक्ष्य को हासिल कर पाई.

इस रिपोर्ट के अनुसार संस्थाओं के अघोषित आय पर सितंबर, 2017 तक वसूले जाने वाले इनकम टैक्स रेवेन्यू से भी सरकार के टैक्स रेवेन्यू में 0.10 फीसदी की वृद्धि होगी.

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चालू वित्तीय वर्ष में बजट में अनुमानित खर्च जीडीपी का 1.6 फीसदी था जो अब घटकर 1.5 फीसदी ही रहने का अनुमान है.

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में सरकार के टैक्स रेवेन्यू में 16 फीसदी की वृद्धि होगी.

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में टैक्स रेवेन्यू में 13 फीसदी की सकल वृद्धि होगी. खासकर कारपोरेशन टैक्स में 28.8 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि होगी.

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