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Exclusive: ब्रजेश ठाकुर के NGO का भंडाफोड़, गवर्निंग बॉडी में पत्नी, भाई, साला, मौसा

बालिका गृह चलाने के लिए इस एनजीओ को हर साल सरकार की ओर से लगभग 36 लाख रुपए मिलते थे. इसकी गवर्निंग बॉडी में आधे से ज्यादा सदस्य ब्रजेश के रिश्तेदार थे

Updated On: Aug 20, 2018 09:01 PM IST

Alok Kumar

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Exclusive: ब्रजेश ठाकुर के NGO का भंडाफोड़, गवर्निंग बॉडी में पत्नी, भाई, साला, मौसा

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने बेहद शातिर तरीके से अपने एनजीओ की गवर्निंग बॉडी से खुद को दूर रखा, जबकि पत्नी, भाई और साले समेत चार रिश्तेदारों को अहम पदों पर बैठा दिया. सरकारी अनुदान से बालिका गृह चलाने की जिम्मेदारी आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के पास थी.

मुजफ्फरपुर के साहू रोड स्थित ब्रजेश ठाकुर के आवासीय परिसर में ही बालिका गृह का संचालन होता था, जहां 34 नाबालिग लड़कियों के साथ लगातार रेप होता रहा और उन्हें शारीरिक यातना दी गई. बालिका गृह चलाने के लिए इस एनजीओ को हर साल सरकार की ओर से लगभग 36 लाख रुपए मिलते थे.

ब्रजेश ठाकुर ने सरकारी फंड को निजी खाते में पहुंचाने के लिए हर नियम को ताक पर रख दिया. एनजीओ की गवर्निंग बॉडी के सात सदस्यों में चार ब्रजेश के रिश्तेदार हैं. शुरुआती सभी तीन महत्वपूर्ण पदों - प्रेसिडेंट, सचिव और कोषाध्यक्ष- पर ब्रजेश के करीबी रिश्तेदारों के नाम हैं. इसके अलावा सदस्यों की सूची में एक नाम ब्रजेश ठाकुर की पत्नी आशा ठाकुर का है. न्यूज18 के पास इसे पुख्ता करने के दस्तावेज मौजूद हैं.

ब्रजेश ठाकुर का नाम कार्यकारिणी समिति में कहीं नहीं

हालांकि खुद ब्रजेश ठाकुर का नाम कार्यकारिणी समिति में कहीं नहीं दिखाई देता. समाज कल्याण विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कुछ पत्राचार में ब्रजेश ने खुद को एनजीओ का संरक्षक बताया है.

मामले की जांच सीबीआई के पास जाने के बाद कार्यकारिणी के सभी सदस्य भूमिगत हो गए हैं. हालांकि न्यूज18 ने सेवा संकल्प एवं विकास समिति के सचिव रमेश ठाकुर तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की.

रमेश ठाकुर, ब्रजेश का चचेरा भाई है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कहीं नौकरी करता है. पता न बताने की शर्त पर रमेश ने कहा कि एनजीओ से उसका लेना -देना नहीं हैं और किसी चेकबुक पर उसने साइन नहीं किया है.

प्रेसिडेंट के तौर पर ब्रजेश ठाकुर के साले संजय सिंह का नाम दर्ज

प्रेसिडेंट के तौर पर ब्रजेश ठाकुर के साले संजय सिंह का नाम दर्ज है, जो ठाकुर के अरेस्ट होने के बाद से ही भूमिगत हैं. हालांकि इनके नाम के आगे जो मोबाइल नंबर दिया गया है, उसका इस्तेमाल ब्रजेश ठाकुर खुद किया करते थे. कोषाध्यक्ष के आगे शिवशंकर सिंह का नाम दर्ज है.

न्यूज18 की तहकीकात में पता चला कि ये ब्रजेश के मौसा हैं, पर असल में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिस्ट्री वुमन मधु कुमारी उर्फ शाहिस्ता परवीन संभालती थी. शिवशंकर के नाम पर जो मोबाइल नंबर दिया गया है, वो भी मधु कुमारी का है.

हालांकि किसी भी मोबाइल नंबर पर फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है. अगर दस्तावेज पर गौर करें तो उसमें सफेद झूठ बताया गया है कि सदस्यों में से कोई आपस में किसी तरह संबंधित नहीं है. जिस कॉलम में ये सार्वजनिक करना है कि क्या कोई सदस्य किसी दूसरे से किसी भी तरह से संबंधित है. उसमें सभी रिश्तेदारों के नाम के आगे .. नहीं.. लिखा हुआ है.

ब्रजेश की पत्नी आशा ठाकुर गवर्निंग बॉडी की सदस्य

ब्रजेश की पत्नी आशा ठाकुर गवर्निंग बॉडी की सदस्य हैं. वो मुजफ्फरपुर में ही एक निजी कॉलेज में प्रोफेसर हैं. न्यूज18 ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई.

शातिराना अंदाज में ब्रजेश ठाकुर ने खुद को और अपने बेटे राहुल आनंद को इस एनजीओ से बाहर रखा और इसका फायदा उठाते हुए एनजीओ से जुड़े लोगों पर चल-अचल संपत्ति बेचने की रोक के बावजूद शहर के बीचोबीच 11 कट्ठे जमीन करोड़ों रुपए में बेच दी.

(साभार: न्यूज18)

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